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नई दिल्ली। संसद के विशेष सत्र में आज महिला आरक्षण को लेकर ऐतिहासिक बहस शुरू हो गई है। इस बहस से पहले केंद्र सरकार के शीर्ष नेतृत्व ने रणनीति को अंतिम रूप देने के लिए हाईलेवल बैठक की। गृहमंत्री Amit Shah की अध्यक्षता में हुई इस अहम बैठक में केंद्रीय मंत्री Kiren Rijiju और Arjun Meghwal समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। दूसरी ओर, पूरे देश की नजरें आज दोपहर 3 बजे होने वाले प्रधानमंत्री Narendra Modi के संबोधन पर टिकी हैं, जिसे इस विधेयक के भविष्य के लिए निर्णायक माना जा रहा है।

बैठक में बनी रणनीति, संसद में गरमाई बहस

महिला आरक्षण से जुड़े तीन अहम विधेयकों पर चर्चा से पहले सरकार ने अपनी रणनीति को पुख्ता करने के लिए यह बैठक बुलाई। सूत्रों के मुताबिक, बैठक में संसद के अंदर और बाहर विपक्ष के सवालों का जवाब देने और विधेयकों को पारित कराने की रणनीति पर विस्तार से मंथन हुआ। संसद में जैसे ही चर्चा शुरू हुई, सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच महिला सशक्तिकरण, आरक्षण की समयसीमा और परिसीमन जैसे मुद्दों पर तीखी बहस देखने को मिली।

3 बजे पीएम मोदी का बड़ा संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज दोपहर 3 बजे महिला आरक्षण विधेयक पर देश को संबोधित करेंगे। इससे पहले उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि— “यह देश के लिए महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम होगा। हमारी माताओं और बहनों का सम्मान ही राष्ट्र का सम्मान है।” पीएम का यह संबोधन न केवल राजनीतिक रूप से अहम है, बल्कि इससे विधेयक के पारित होने की दिशा भी तय मानी जा रही है।

लोकसभा सीटें बढ़ाने का प्रस्ताव—850 तक पहुंचेगी संख्या

इस संशोधन विधेयक का सबसे बड़ा पहलू लोकसभा की सीटों में बढ़ोतरी है। प्रस्ताव के अनुसार:

  • लोकसभा में कुल सीटें बढ़ाकर 850 की जाएंगी
  • राज्यों से चुने जाने वाले सदस्यों की संख्या 815 तक सीमित होगी
  • केंद्र शासित प्रदेशों के लिए अधिकतम 35 सीटें निर्धारित होंगी

वर्तमान में लोकसभा में 543 सदस्य हैं, लेकिन नए प्रस्ताव के तहत यह संख्या ऐतिहासिक रूप से बढ़ाई जा सकती है।

महिलाओं को 33% आरक्षण—सियासत का बड़ा फैसला

विधेयक के तहत लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान किया गया है। यह कदम देश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। लंबे समय से लंबित इस मुद्दे पर अब निर्णायक पहल होते दिख रही है।

परिसीमन और जनगणना पर नया फॉर्मूला

संशोधन विधेयक में अनुच्छेद 82 में बदलाव का प्रस्ताव है।

  • सीटों के आवंटन को अब 2027 की जनगणना से नहीं जोड़ा जाएगा
  • इसके बजाय 2011 की जनगणना के आधार पर आरक्षण लागू करने की तैयारी है
  • इससे 2029 के आम चुनाव से पहले महिला आरक्षण लागू करने का रास्ता साफ हो सकता है

यह बदलाव इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि इससे आरक्षण लागू होने में होने वाली देरी को कम किया जा सकेगा।

विपक्ष के सवाल—क्या तुरंत लागू होगा आरक्षण?

जहां सरकार इसे ऐतिहासिक कदम बता रही है, वहीं विपक्ष ने कुछ अहम सवाल उठाए हैं:

  • आरक्षण लागू करने की समयसीमा क्या होगी?
  • क्या इसे तुरंत लागू किया जाएगा या परिसीमन के बाद?
  • क्या ओबीसी महिलाओं के लिए अलग कोटा होगा?

इन सवालों को लेकर संसद में बहस तेज हो गई है और आने वाले समय में यह मुद्दा और गरमाने की संभावना है।

महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा मोड़

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह विधेयक पारित होता है, तो भारतीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी में बड़ा बदलाव आएगा। अब तक संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की संख्या सीमित रही है, लेकिन 33% आरक्षण लागू होने से लाखों महिलाओं के लिए राजनीति के दरवाजे खुल सकते हैं।

राजनीतिक गणित भी बदलेगा

महिला आरक्षण लागू होने के बाद राजनीतिक दलों को अपनी रणनीति बदलनी पड़ेगी।

  • टिकट वितरण में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी
  • नए चेहरे राजनीति में आएंगे
  • क्षेत्रीय और राष्ट्रीय दलों का समीकरण बदलेगा

यह बदलाव सिर्फ सामाजिक नहीं, बल्कि राजनीतिक परिदृश्य को भी पूरी तरह बदल सकता है।

देश की नजरें संसद पर टिकीं

आज का दिन संसद के इतिहास में अहम माना जा रहा है। एक ओर सरकार इसे महिला सशक्तिकरण का बड़ा कदम बता रही है, तो दूसरी ओर विपक्ष इसके प्रावधानों पर सवाल उठा रहा है। अब सभी की नजरें प्रधानमंत्री मोदी के 3 बजे के संबोधन और संसद में होने वाली बहस के नतीजों पर टिकी हैं।

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