पटना। बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। Samrat Choudhary ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर राज्य की सत्ता की कमान संभाल ली है। राज्यपाल Syed Ata Hasnain ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस ऐतिहासिक मौके पर पूर्व मुख्यमंत्री Nitish Kumar भी मौजूद रहे। यह पहली बार है जब बिहार में भारतीय जनता पार्टी पूर्ण रूप से नेतृत्व की भूमिका में नजर आ रही है।
मंदिर में पूजा के बाद शुरू हुआ सत्ता का सफर
शपथ ग्रहण से पहले सम्राट चौधरी ने पटना के बेली रोड स्थित हनुमान मंदिर में पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया। इसके बाद वे सीधे लोकभवन पहुंचे, जहां शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया गया। लोकभवन पहुंचते ही उन्होंने सबसे पहले पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास जाकर उनका आशीर्वाद लिया। यह दृश्य राजनीतिक शिष्टाचार और सम्मान का प्रतीक बना रहा।
लोकभवन में शपथ, NDA नेताओं की मौजूदगी
शपथ ग्रहण समारोह की शुरुआत राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के साथ हुई। इसके बाद राज्यपाल ने सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई। इस मौके पर NDA के सभी विधायक और विधान परिषद सदस्य मौजूद रहे। राजनीतिक हलकों में उस समय हलचल बढ़ गई, जब कांग्रेस विधायक सुरेंद्र कुशवाहा भी इस समारोह में शामिल होते दिखे, जो पहले राज्यसभा चुनाव में वोटिंग से गैरहाजिर रहे थे।
परिवार की मौजूदगी ने बढ़ाया महत्व
सम्राट चौधरी के पिता शकुनी चौधरी समेत पूरा परिवार इस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बना। परिवार की मौजूदगी ने इस समारोह को और भावनात्मक बना दिया। सम्राट चौधरी का यह सफर काफी संघर्ष और राजनीतिक अनुभव से भरा रहा है। 2025 में उन्होंने मुंगेर के तारापुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतकर अपनी मजबूत पकड़ साबित की थी। इसके बाद उन्हें बिहार सरकार में उपमुख्यमंत्री बनाया गया था।
ऐसे बनी सीएम बनने की राह
बिहार की राजनीति में जब यह साफ हो गया कि मुख्यमंत्री पद अब बीजेपी के पास जाएगा, तो पार्टी ने तेजी से रणनीति बनाई। केंद्रीय पर्यवेक्षक के रूप में Shivraj Singh Chouhan को पटना भेजा गया। बीजेपी विधानमंडल दल की बैठक में उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने सम्राट चौधरी के नाम का प्रस्ताव रखा। सभी विधायकों ने एकमत से इसका समर्थन किया। इसके बाद NDA विधायक दल की बैठक में नीतीश कुमार ने उनके नाम पर अंतिम मुहर लगा दी।
बीजेपी के लिए नया दौर
सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के साथ ही बिहार में बीजेपी का प्रभाव और मजबूत होता नजर आ रहा है। यह पहली बार है जब पार्टी राज्य में इतनी मजबूती से नेतृत्व की भूमिका निभा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव आने वाले चुनावों में भी बड़ा असर डाल सकता है। बीजेपी अब विकास, प्रशासनिक सुधार और कानून व्यवस्था को लेकर अपनी नई रणनीति के साथ मैदान में उतरेगी।
चुनौतियां भी कम नहीं
हालांकि नई सरकार के सामने कई बड़ी चुनौतियां भी हैं। बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दे अभी भी राज्य के सामने प्रमुख हैं। इसके अलावा गठबंधन की राजनीति को संतुलित रखना भी एक बड़ी जिम्मेदारी होगी। NDA के सभी सहयोगियों के बीच तालमेल बनाए रखना सरकार की सफलता की कुंजी होगी।
जनता की उम्मीदें बढ़ीं
बिहार की जनता अब नई सरकार से बेहतर प्रशासन और तेज विकास की उम्मीद कर रही है। खासकर युवा वर्ग रोजगार और अवसरों को लेकर सरकार से बड़ी अपेक्षाएं रखता है। सम्राट चौधरी के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन उम्मीदों पर खरा उतरने की होगी।