इंदौर। वंदे मातरम को लेकर इंदौर नगर निगम में शुरू हुआ विवाद अब सियासी संग्राम में बदल गया है। खजराना वार्ड की कांग्रेस पार्षद रुबीना खान के विवादित बयान के बाद पार्टी ने उनके खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए निष्कासन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। शहर कांग्रेस कमेटी ने प्रस्ताव बनाकर प्रदेश नेतृत्व को भेज दिया है।
वंदे मातरम पर गरमाई सियासत
नगर निगम सदन में वंदे मातरम को लेकर पहले ही हंगामा चल रहा था। इसी बीच रुबीना खान का बयान सामने आया—“भाड़ में जाए कांग्रेस, हम औवेसी की पार्टी जॉइन कर लेंगे।” इस बयान ने राजनीतिक माहौल को और ज्यादा गर्म कर दिया।
पार्टी ने माना अनुशासनहीनता
कांग्रेस संगठन ने इस बयान को गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पार्टी का कहना है कि राष्ट्रीय गीत और संगठन की गरिमा से समझौता किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। विवाद बढ़ने के बाद रुबीना खान ने भी साफ कर दिया कि अगर पार्टी उन्हें निकालती है तो उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि “एक बाप की औलाद” वाला बयान गुस्से में निकल गया था और वे पार्टी के फैसले को स्वीकार करेंगी।
वंदे मातरम अनिवार्य, निर्देश जारी
शहर कांग्रेस कमेटी ने अपने सभी कार्यक्रमों में वंदे मातरम गाना अनिवार्य कर दिया है। कांग्रेस नेता चिंटू चौकसे ने स्पष्ट कहा कि जो इसे नहीं गाना चाहते, वे पार्टी के कार्यक्रमों में न आएं। उन्होंने यह भी कहा कि रुबीना का बयान उनका निजी है, पार्टी उससे सहमत नहीं है।
फौजिया शेख पर भी बढ़ा विवाद
इसी मुद्दे पर पार्षद फौजिया अलीम शेख के खिलाफ भी शिकायत दर्ज कराई गई है। हिंदूवादी संगठनों ने एमजी रोड थाने में आवेदन देकर उन पर राष्ट्रीय गीत का अपमान करने का आरोप लगाया है। वहीं एबीवीपी और भाजपा पार्षदों ने दोनों पार्षदों को अयोग्य घोषित करने की मांग को लेकर प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपा है।
सियासत तेज, कार्रवाई पर नजर
वंदे मातरम विवाद के चलते इंदौर की राजनीति गरमा गई है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि कांग्रेस संगठन रुबीना खान पर क्या अंतिम फैसला लेता है और आगे यह विवाद किस दिशा में जाता है।