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पश्चिम बंगाल/नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में बीजेपी की जीत के बाद भारत-बांग्लादेश संबंधों में नई हलचल देखने को मिल रही है। बांग्लादेश के विदेश मंत्री Khalilur Rahman ने ‘पुश-इन’ को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि अगर सीमा पर ऐसी कोई घटना होती है, तो ढाका सरकार जवाबी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगी। उनके इस बयान ने दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तापमान बढ़ा दिया है।

‘पुश-इन’ पर बांग्लादेश की सख्त चेतावनी

ढाका में स्टेट गेस्ट हाउस ‘पद्मा’ में पत्रकारों से बातचीत करते हुए विदेश मंत्री Khalilur Rahman ने कहा कि बांग्लादेश-भारत सीमा पर अगर जबरन घुसपैठियों को वापस भेजने यानी ‘पुश-इन’ की घटनाएं सामने आती हैं, तो सरकार आवश्यक कदम उठाएगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि पश्चिम बंगाल में हालिया राजनीतिक बदलावों के बाद सीमा पर ऐसे मामलों की आशंका को लेकर ढाका सतर्क है। यह बयान ऐसे समय में आया है, जब बंगाल चुनाव के बाद क्षेत्रीय राजनीति में नए समीकरण बन रहे हैं।

भारत ने आरोपों को किया खारिज

बांग्लादेश के इन आरोपों पर भारत पहले ही अपनी स्थिति स्पष्ट कर चुका है। भारतीय पक्ष ने ‘पुश-इन’ के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि सीमा सुरक्षा बल (BSF) अंतरराष्ट्रीय नियमों और द्विपक्षीय समझौतों के तहत ही कार्रवाई करता है। भारत का कहना है कि अवैध घुसपैठ को रोकना और सीमा की सुरक्षा सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है, और इस दौरान किसी भी तरह की जबरदस्ती का आरोप निराधार है।

बंगाल चुनाव के बाद क्यों बढ़ी चिंता?

विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल में बीजेपी की जीत के बाद सीमा सुरक्षा और अवैध घुसपैठ जैसे मुद्दे और अधिक सख्ती से उठाए जा सकते हैं। बीजेपी लंबे समय से बंगाल में घुसपैठ को एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाती रही है। ऐसे में बांग्लादेश को यह आशंका है कि नई राजनीतिक परिस्थिति में सीमा पर निगरानी और कार्रवाई और सख्त हो सकती है, जिससे ‘पुश-इन’ जैसे विवादित मुद्दे उभर सकते हैं।

तीस्ता जल बंटवारा फिर चर्चा में

विदेश मंत्री Khalilur Rahman ने इस दौरान तीस्ता नदी के जल बंटवारे के मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश को इस समझौते को लागू करने के मामले में भारत से ठोस प्रगति की उम्मीद है। तीस्ता जल बंटवारा लंबे समय से दोनों देशों के बीच एक संवेदनशील मुद्दा रहा है, जिस पर अभी तक कोई अंतिम समझौता नहीं हो सका है।

चीन के साथ बढ़ता सहयोग, भारत के लिए संकेत?

दिलचस्प बात यह है कि बांग्लादेश अब तीस्ता परियोजना को लेकर चीन के साथ भी बातचीत कर रहा है। विदेश मंत्री ने पुष्टि की कि उनकी आगामी चीन यात्रा के दौरान इस मुद्दे पर चर्चा होगी। उन्हें चीन सरकार के निमंत्रण पर बीजिंग जाना है, जहां वे 7 मई तक रहेंगे। इस दौरान तीस्ता नदी परियोजना पर चीन के प्रस्तावित मास्टर प्लान पर भी बातचीत की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत के लिए एक रणनीतिक संकेत हो सकता है, क्योंकि चीन की बढ़ती भागीदारी क्षेत्रीय राजनीति को प्रभावित कर सकती है।

अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर भी बयान

विदेश मंत्री ने अमेरिका के साथ हालिया व्यापार समझौते पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि यह समझौता बांग्लादेश के लिए फायदेमंद है और इसकी आलोचना करने वाले लोग इसकी अहमियत को सही तरीके से नहीं समझ रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब इस समझौते की तुलना अन्य देशों के साथ किए गए समझौतों से की जाएगी, तब इसकी वास्तविक उपयोगिता सामने आएगी।

भारत-बांग्लादेश रिश्तों पर क्या असर?

भारत और बांग्लादेश के बीच संबंध ऐतिहासिक रूप से मजबूत रहे हैं, लेकिन समय-समय पर सीमा, जल बंटवारा और घुसपैठ जैसे मुद्दों पर तनाव भी देखने को मिला है। बंगाल चुनाव के बाद आए इस बयान से साफ है कि आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत और भी महत्वपूर्ण हो जाएगी। दोनों देशों के लिए यह जरूरी होगा कि वे संवाद के जरिए विवादों को सुलझाएं।

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