दिल्ली-एनसीआर। राजधानी से सटे नोएडा में नशे के कारोबार का खौफनाक चेहरा सामने आया है। यहां डार्क वेब के जरिए विदेशी ‘ओजी गांजा’ मंगाकर युवाओं और छात्रों को सप्लाई करने वाले संगठित गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। थाना सेक्टर-126 पुलिस की इस कार्रवाई में दो शातिर तस्करों को गिरफ्तार किया गया है, जो पीजी, हॉस्टल और यूनिवर्सिटी के छात्रों को निशाना बनाकर नशे का जाल फैला रहे थे। इस खुलासे ने अभिभावकों और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।
डार्क वेब से सौदा, सड़कों पर सप्लाई
जांच में सामने आया कि आरोपी डार्क वेब के जरिए ‘ओजी गांजा’ की खरीदारी करते थे। यह गांजा उच्च गुणवत्ता का माना जाता है और इसकी कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में काफी ज्यादा होती है। आरोपी थोक में गांजा खरीदते और फिर उसे छोटे-छोटे पैकेट्स में बांटकर ऊंचे दामों पर बेचते थे। पुलिस के मुताबिक, यह पूरा नेटवर्क बेहद शातिर तरीके से संचालित किया जा रहा था। ऑनलाइन ऑर्डर लिए जाते थे और फिर ऑफलाइन डिलीवरी दी जाती थी, जिससे पुलिस की नजरों से बचा जा सके।
पीजी और हॉस्टल बने नशे का हॉटस्पॉट
आरोपियों का सबसे बड़ा टारगेट पीजी, हॉस्टल और कॉलेज के आसपास रहने वाले छात्र थे। इन इलाकों में नशे की मांग अधिक होने के कारण उन्हें लगातार ग्राहक मिलते थे। छात्रों को आसानी से फंसाने के लिए आरोपी सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुप का सहारा लेते थे। नए ग्राहकों को जोड़ने के लिए रेफरल सिस्टम भी इस्तेमाल किया जाता था, जिससे नेटवर्क तेजी से फैलता गया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से करीब 500 ग्राम विदेशी ‘ओजी गांजा’ बरामद किया है, जिसकी कीमत 7 से 8 लाख रुपये आंकी जा रही है। इसके अलावा 2 मोबाइल फोन, 2 इलेक्ट्रॉनिक कांटा, 1 होंडा सिटी कार, 20 पॉलिथीन और 16 पैकिंग लिफाफे भी जब्त किए गए हैं। यह बरामदगी इस बात का संकेत है कि गिरोह बड़े स्तर पर नशे का कारोबार कर रहा था और इसके जरिए मोटी कमाई कर रहा था।
ऐसे चलता था पूरा खेल
पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि वे पहले डार्क वेब से गांजा मंगाते थे। फिर इलेक्ट्रॉनिक तराजू से उसका वजन कर छोटे पैकेट्स तैयार करते थे। इन पैकेट्स को पारदर्शी पॉलिथीन और लिफाफों में पैक किया जाता था। इसके बाद कार की सीटों के नीचे या अन्य जगहों पर छिपाकर माल की सप्लाई की जाती थी। डिलीवरी के लिए कभी-कभी लोकल राइडर्स का भी इस्तेमाल किया जाता था, जिन्हें कमीशन दिया जाता था। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि दोनों आरोपी पिछले करीब दो साल से इस अवैध कारोबार में लिप्त थे। इस दौरान उन्होंने कई व्हाट्सएप ग्रुप और सोशल मीडिया नेटवर्क बना लिए थे, जिनके जरिए ग्राहकों से संपर्क किया जाता था। ऑर्डर मिलने के बाद तय स्थान पर डिलीवरी दी जाती थी और भुगतान नकद या डिजिटल माध्यम से लिया जाता था। इस धंधे में उन्हें 3 से 5 गुना तक मुनाफा होता था।
ओडिशा-आंध्र से दिल्ली तक सप्लाई चेन
पुलिस के अनुसार, ‘ओजी गांजा’ ओडिशा और आंध्र प्रदेश से दिल्ली लाया जाता था। इसके बाद इसे दिल्ली-एनसीआर और आसपास के इलाकों में सप्लाई किया जाता था। तस्करी के लिए ट्रेन और कारों का इस्तेमाल किया जाता था, जिससे पुलिस की नजरों से बचा जा सके। यह नेटवर्क कई राज्यों तक फैला होने की आशंका है। मामले में एडीसीपी मनीषा सिंह ने बताया कि थाना सेक्टर-126 पुलिस ने बीट पुलिसिंग और लोकल इंटेलिजेंस की मदद से इस गिरोह का भंडाफोड़ किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान गाजियाबाद के कौशांबी निवासी शिवम कुंवर (26) और नोएडा के सदरपुर कॉलोनी निवासी नितिन चौहान (25) के रूप में हुई है। दोनों को सेक्टर-94 पुश्ता रोड के पास घेराबंदी कर गिरफ्तार किया गया। पुलिस अब इनके मोबाइल फोन और डिजिटल डाटा की जांच कर रही है, जिससे नेटवर्क के अन्य सदस्यों और सप्लायर्स तक पहुंचा जा सके।
युवाओं को बना रहे थे नशेड़ी, समाज के लिए खतरा
यह मामला केवल एक अपराध नहीं, बल्कि समाज के लिए एक बड़ा खतरा है। जिस तरह से युवाओं और छात्रों को निशाना बनाकर नशे का कारोबार फैलाया जा रहा है, वह बेहद चिंताजनक है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के नेटवर्क युवाओं के भविष्य को बर्बाद कर रहे हैं और उन्हें अपराध की ओर धकेल रहे हैं। पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई केवल शुरुआत है। आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया जाएगा। फिलहाल पुलिस आरोपियों से गहन पूछताछ कर रही है और पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि नशे के कारोबार को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।