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नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच बने अस्थायी सीजफायर ने वैश्विक स्तर पर राहत की उम्मीद जगा दी है। भारत ने इस समझौते का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के जरिए होने वाले व्यापार में अब रुकावट कम होगी और वैश्विक सप्लाई चेन फिर पटरी पर लौट सकती है।

भारत ने जताई राहत, शांति की उम्मीद

विदेश मंत्रालय ने साफ कहा कि भारत हमेशा से मिडिल ईस्ट में शांति और स्थिरता का पक्षधर रहा है। मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि यह सीजफायर क्षेत्र में स्थायी शांति की दिशा में एक सकारात्मक कदम हो सकता है। भारत ने खास तौर पर ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ का जिक्र करते हुए कहा कि यह वैश्विक ऊर्जा सप्लाई का अहम मार्ग है। युद्ध के कारण यहां व्यापार और तेल सप्लाई पर असर पड़ा था, जिससे दुनिया भर में महंगाई और अनिश्चितता बढ़ गई थी।

युद्ध से टूटी सप्लाई चेन

बीते हफ्तों में मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने वैश्विक सप्लाई चेन को झटका दिया था। भारत जैसे देश, जो बड़ी मात्रा में कच्चा तेल आयात करते हैं, उन पर इसका सीधा असर पड़ा। अब सीजफायर से हालात सुधरने की उम्मीद है। विदेश मंत्रालय ने दो टूक कहा कि किसी भी संघर्ष का समाधान केवल बातचीत और कूटनीति से ही संभव है। भारत ने दोनों देशों से अपील की कि वे तनाव कम करें और शांति बहाल करने की दिशा में कदम बढ़ाएं।

ऐसे बनी सीजफायर पर सहमति

अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्तों के लिए सीजफायर पर सहमति बनी है। यह समझौता ईरान पर हुए हमलों के करीब 39 दिन बाद सामने आया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया था कि अगर ईरान होर्मुज को सुरक्षित और खुला रखेगा, तो हमले रोके जा सकते हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ किया कि अगर हमले बंद होते हैं, तो ईरान भी अपनी जवाबी कार्रवाई रोक देगा। इससे संकेत मिलते हैं कि दोनों पक्ष फिलहाल टकराव से पीछे हटने को तैयार हैं।

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