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नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईरान से जुड़े युद्ध जैसे हालात अब भारत की अर्थव्यवस्था पर भारी पड़ सकते हैं। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने अपनी मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद साफ संकेत दिया है कि अगर हालात नहीं सुधरे तो महंगाई, ग्रोथ और वित्तीय स्थिरता पर बड़ा असर पड़ेगा।

सप्लाई शॉक से डिमांड पर भी पड़ेगा असर

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि वैश्विक सप्लाई चेन में आई बाधा अगर जल्द ठीक नहीं हुई तो शुरुआती सप्लाई शॉक आगे चलकर डिमांड शॉक में बदल सकता है। इसका मतलब है कि पहले उत्पादन प्रभावित होगा और बाद में खपत भी गिर सकती है।

महंगाई और तेल पर बढ़ेगा दबाव

भारत करीब 85 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में युद्ध के कारण तेल की कीमतों में उछाल आने पर महंगाई बढ़ना तय है। साथ ही चालू खाते का घाटा भी बढ़ सकता है, जिससे रुपये पर दबाव और बढ़ेगा।

इंडस्ट्री से लेकर खेती तक असर

एनर्जी मार्केट, उर्वरक और अन्य कमोडिटी सप्लाई में बाधा से उद्योग, कृषि और सेवा क्षेत्र पर सीधा असर पड़ेगा। उत्पादन घट सकता है और इससे आर्थिक गतिविधियां धीमी पड़ सकती हैं।

निवेश और लिक्विडिटी पर संकट

वैश्विक अनिश्चितता बढ़ने से निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। इससे घरेलू बाजार में लिक्विडिटी कम हो सकती है, जिसका असर निवेश और उपभोग दोनों पर पड़ेगा।

निर्यात और रेमिटेंस पर चोट

ग्लोबल ग्रोथ कमजोर होने से भारत की बाहरी मांग घट सकती है। इसके साथ ही विदेशों से आने वाली रेमिटेंस में भी कमी आ सकती है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चिंता की बात है।

वित्तीय बाजार भी हो सकते हैं प्रभावित

आरबीआई ने चेतावनी दी है कि वैश्विक वित्तीय बाजारों में अस्थिरता का असर भारत के घरेलू वित्तीय हालात पर भी पड़ेगा। इससे उधारी महंगी हो सकती है और निवेश गतिविधियां प्रभावित होंगी।

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