इस्लामाबाद। आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की नीतियों पर अब अपने ही देश में सवाल उठने लगे हैं। एक टीवी शो में पाकिस्तानी विश्लेषक इरशाद भट्टी ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि अगर भारत और इजरायल से रिश्ते ठीक होते तो शहबाज शरीफ वहां से भी कर्ज ले चुके होते।
‘पूरी दुनिया में घूमकर सिर्फ कर्ज मांग रहे PM’
इरशाद भट्टी ने तंज कसते हुए कहा कि शहबाज शरीफ के पास बताने के लिए एक ही उपलब्धि है—किस देश से कितना कर्ज मिला। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का पूरा फोकस देश की अर्थव्यवस्था सुधारने के बजाय विदेशों में घूम-घूमकर कर्ज जुटाने पर है।
विदेश दौरे बढ़े, निवेश गिरा
भट्टी ने यह भी आरोप लगाया कि शहबाज शरीफ संसद से ज्यादा विदेश यात्राओं में सक्रिय रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि 40-50 विदेशी दौरों के बावजूद पाकिस्तान में विदेशी निवेश 41 फीसदी तक गिर गया है, जो पिछले कई दशकों में सबसे खराब स्थिति है।
आर्थिक संकट के मुहाने पर पाकिस्तान
इस समय पाकिस्तान गंभीर आर्थिक दबाव से गुजर रहा है। हालात ऐसे हैं कि देश को पुराने कर्ज का ब्याज चुकाने के लिए भी नया कर्ज लेना पड़ रहा है। विदेशी मुद्रा भंडार पर भी दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
UAE के साथ समझौता नहीं, 3.5 अरब डॉलर लौटाने की नौबत\
स्थिति और गंभीर तब हो गई जब पाकिस्तान सात साल में पहली बार यूएई के साथ 3.5 अरब डॉलर के कर्ज को आगे बढ़ाने (रोलओवर) के समझौते में नाकाम रहा। अब पाकिस्तान को यह रकम चुकानी पड़ेगी, जो उसके कुल विदेशी मुद्रा भंडार का करीब 18 फीसदी है।
तेल संकट और कर्ज का दबाव बढ़ा रहा खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार, बढ़ती तेल कीमतों और कमजोर अर्थव्यवस्था के चलते पाकिस्तान पर आर्थिक दबाव और बढ़ सकता है। ऐसे में आने वाले समय में देश को और बड़े वित्तीय संकट का सामना करना पड़ सकता है।
देश में बढ़ी आलोचना, सरकार पर सवाल
पाकिस्तान के अंदर ही अब सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठने लगे हैं। इरशाद भट्टी जैसे विश्लेषकों के बयान से साफ है कि आर्थिक मोर्चे पर सरकार की रणनीति को लेकर असंतोष बढ़ता जा रहा है।