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बरेली उपद्रव मामले में कानून ने आखिरकार अपनी सख्ती दिखा दी है। लंबे समय से राहत की उम्मीद लगाए बैठे तीनों आरोपियों को हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने न सिर्फ एफआईआर रद्द करने की याचिका खारिज की, बल्कि गिरफ्तारी पर लगा स्टे भी खत्म कर दिया। अब साफ है—कानून का शिकंजा कसने वाला है और गिरफ्तारी कभी भी हो सकती है।

हाईकोर्ट का सख्त रुख, आरोपियों की बढ़ीं मुश्किलें

बरेली में हुए चर्चित उपद्रव मामले में हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए तीनों आरोपियों—साजिद सकलैनी, अजमल रफी और नईम कुरैशी—की याचिका खारिज कर दी। इन आरोपियों ने अदालत में यह दलील दी थी कि पुलिस ने उनके खिलाफ गलत तरीके से मुकदमा दर्ज किया है और एफआईआर को रद्द किया जाए। लेकिन कोर्ट ने इन तर्कों को सिरे से खारिज करते हुए साफ कर दिया कि मामले में हस्तक्षेप की कोई जरूरत नहीं है। इस फैसले के बाद आरोपियों की कानूनी सुरक्षा लगभग खत्म हो गई है और गिरफ्तारी का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।

स्टे खत्म, अब गिरफ्तारी तय मानी जा रही

इस मामले में सबसे बड़ा झटका साजिद सकलैनी को लगा है, जिसे पहले गिरफ्तारी से स्टे मिला हुआ था। हाईकोर्ट ने उसका यह स्टे भी खत्म कर दिया है। वहीं, बाकी दो आरोपी—अजमल रफी और नईम कुरैशी—पहले ही अग्रिम जमानत ले चुके थे, लेकिन अब कोर्ट के इस फैसले के बाद उनकी स्थिति भी कमजोर हो गई है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, अब किसी भी समय तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी हो सकती है। कानून के शिकंजे से बचने की उनकी आखिरी कोशिश भी नाकाम हो गई है।

पेट्रोल बम, एसिड और फायरिंग से दहला था शहर

यह मामला 26 सितंबर को हुए उस बड़े उपद्रव से जुड़ा है, जिसने पूरे बरेली शहर को हिला दिया था। आरोप है कि मौलाना तौकीर रजा के आह्वान पर हुए इस उपद्रव में भीड़ ने पुलिस पर पेट्रोल बम, एसिड की बोतलें फेंकीं और फायरिंग तक की। कई पुलिसकर्मी घायल हुए और शहर में दहशत का माहौल बन गया। उपद्रवियों ने आगजनी और तोड़फोड़ की भी कोशिश की थी। इस घटना ने प्रशासन को झकझोर दिया था और कानून-व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े हुए थे।

पांच थानों में दर्ज हुए 10 मुकदमे, क्राइम ब्रांच सक्रिय

घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने शहर के पांच अलग-अलग थानों में कुल 10 मुकदमे दर्ज किए थे। इनमें कोतवाली में पांच, बारादरी में दो और किला, प्रेमनगर व कैंट थाने में एक-एक मुकदमा शामिल है। इन मुकदमों में से दो प्रमुख मामलों की जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी गई थी। इंस्पेक्टर संजय धीर को इसकी जिम्मेदारी दी गई, जिन्होंने मामले की गहराई से जांच करते हुए आरोपियों के खिलाफ मजबूत साक्ष्य जुटाए।

कोर्ट में पुलिस की पैरवी बनी गेम चेंजर

इस पूरे घटनाक्रम में क्राइम ब्रांच की सक्रियता और कोर्ट में की गई मजबूत पैरवी निर्णायक साबित हुई। इंस्पेक्टर संजय धीर ने अदालत में ठोस तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की याचिका को खारिज कराने में अहम भूमिका निभाई। कोर्ट ने पुलिस की दलीलों को स्वीकार करते हुए साफ संकेत दिया कि मामले में आरोप गंभीर हैं और इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता। यही वजह रही कि न सिर्फ याचिका खारिज हुई, बल्कि गिरफ्तारी पर लगा स्टे भी खत्म कर दिया गया।

अब आगे क्या? गिरफ्तारी और सख्त कार्रवाई की तैयारी

हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब पुलिस पूरी तरह एक्शन मोड में आ गई है। सूत्रों के मुताबिक, आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीमें तैयार कर दी गई हैं और जल्द ही बड़ी कार्रवाई हो सकती है। प्रशासन का साफ संदेश है कि कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। बरेली उपद्रव मामला अब एक मिसाल बनने जा रहा है, जहां कानून ने देर से ही सही, लेकिन सख्ती से अपनी पकड़ मजबूत की है।

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