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उत्तर प्रदेश के देवरिया में नकली नोट गिरोह के खुलासे ने सिर्फ अपराध की परतें ही नहीं खोलीं, बल्कि सियासत में भी जबरदस्त तूफान खड़ा कर दिया है। एक ओर गिरफ्तारी में सामने आया नाम—विवेक यादव—और दूसरी ओर तस्वीरों व वीडियो के जरिए उठते सवाल… अब यह मामला पुलिस से ज्यादा राजनीति के अखाड़े में लड़ा जा रहा है।

नकली नोट कांड से उठी सियासी चिंगारी

उत्तर प्रदेश के देवरिया में पुलिस ने जब नकली नोटों के बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया, तो मामला सामान्य अपराध की तरह शुरू हुआ था। लेकिन जैसे ही इस गिरोह के सरगना के तौर पर विवेक यादव का नाम सामने आया, यह केस राजनीतिक रंग लेने लगा। पुलिस ने छह लोगों को गिरफ्तार कर उनके पास से 1.18 लाख रुपये के नकली नोट, लैपटॉप और प्रिंटर बरामद किए। शुरुआती जांच में यह साफ हुआ कि गिरोह बाजार में फर्जी नोट खपाने का संगठित नेटवर्क चला रहा था। लेकिन असली ‘धमाका’ तब हुआ, जब इस केस को लेकर राजनीतिक दल आमने-सामने आ गए।

तस्वीरों से भड़की सियासत, सोशल मीडिया बना रणभूमि

सबसे पहले समाजवादी पार्टी के मीडिया सेल ने X (पूर्व ट्विटर) पर कुछ तस्वीरें साझा कीं। इन तस्वीरों में भाजपा विधायक शलभमणि त्रिपाठी कुछ युवकों के साथ नजर आ रहे थे। सपा ने दावा किया कि जिन युवकों को भाजपा ‘सपाई’ बता रही है, उनकी तस्वीरें खुद भाजपा विधायक के साथ मौजूद हैं। सवालों की झड़ी लगाते हुए सपा ने पूछा—क्या अब इन तस्वीरों पर जवाब मिलेगा? क्या जांच विधायक तक पहुंचेगी? इसके बाद सोशल मीडिया एक तरह से सियासी युद्धभूमि में बदल गया, जहां हर पोस्ट नए आरोपों की चिंगारी बन रहा था।

अखिलेश यादव की एंट्री से बढ़ा सियासी तापमान

मामला तब और गरमा गया जब सपा प्रमुख अखिलेश यादव खुद इस विवाद में कूद पड़े। उन्होंने सपा मीडिया सेल की पोस्ट को शेयर करते हुए भाजपा पर तीखा हमला बोला। अखिलेश ने कहा कि नकली नोट देश के अंदर चलाए जा रहे हैं और असली नोट बाहर भेजे जा रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सबूत सामने आने के बावजूद कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है। उनके बयान ने इस पूरे मामले को स्थानीय विवाद से उठाकर प्रदेशस्तरीय सियासी मुद्दा बना दिया, जिससे राजनीतिक तापमान अचानक बढ़ गया।

शलभमणि त्रिपाठी का पलटवार, वीडियो बना हथियार

सपा के आरोपों के बाद भाजपा विधायक शलभमणि त्रिपाठी ने भी जोरदार पलटवार किया। उन्होंने विवेक यादव का एक वीडियो साझा किया, जिसमें वह खुद को समाजवादी पार्टी का कार्यकर्ता बता रहा है। त्रिपाठी ने इसे ‘गुनाहगार की गवाही’ बताते हुए सपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उनके पास आने वाले हर व्यक्ति के साथ तस्वीर होना अपराध नहीं है, क्योंकि जनप्रतिनिधि के तौर पर वह सभी से मिलते हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि उन्हें कैसे पता होगा कि कौन व्यक्ति ‘नकली नोट का एटीएम’ चला रहा है।

आरोप-प्रत्यारोप के बीच बढ़ती बयानबाजी

विवाद यहीं नहीं थमा। शलभमणि त्रिपाठी ने एक और पोस्ट में विवेक यादव की तस्वीरें सपा नेताओं के साथ साझा कर सपा पर संगठित साजिश का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि लाल टोपी की आड़ में जाली नोट का कारोबार कराया जा रहा है और उन्हें बदनाम करने के लिए योजनाबद्ध तरीके से तस्वीरें खिंचवाई गईं। दूसरी तरफ सपा लगातार यह सवाल उठाती रही कि अगर भाजपा के साथ तस्वीरें हैं तो फिर जांच सिर्फ एक दिशा में क्यों जा रही है। इस तरह आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला लगातार तेज होता गया।

कौन है विवेक यादव और आगे क्या?

पूरे विवाद के केंद्र में मौजूद विवेक यादव अब एक ऐसा नाम बन चुका है, जो अपराध और राजनीति के बीच की रेखा को धुंधला कर रहा है। उसका दावा है कि वह सपा कार्यकर्ता है और उसे राजनीतिक साजिश के तहत फंसाया जा रहा है। वहीं पुलिस जांच में उसकी भूमिका नकली नोट गिरोह के सरगना के रूप में सामने आई है। अब सवाल यह है कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ेगी—क्या यह केवल आपराधिक मामला रहेगा या राजनीतिक आरोपों के बीच उलझता जाएगा? फिलहाल एक बात साफ है—देवरिया का यह केस अब सिर्फ नकली नोटों का नहीं, बल्कि सियासी भरोसे और आरोपों की असली परीक्षा बन चुका है।

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