Social Sharing icon

बरेली कॉलेज में एक फेसबुक पोस्ट ने ऐसा तूफान खड़ा किया कि पूरा परिसर रणक्षेत्र में बदल गया। छात्रों का गुस्सा सड़कों से दफ्तरों तक पहुंचा, धक्का-मुक्की हुई, तालाबंदी हुई और आखिरकार प्रशासन को झुकना पड़ा। सवाल अब सिर्फ एक पोस्ट का नहीं, बल्कि जिम्मेदारी, मर्यादा और कैंपस की गरिमा का बन गया है।

फेसबुक पोस्ट से भड़की चिंगारी, कॉलेज बना अखाड़ा

बरेली कॉलेज में बुधवार को एक कथित फेसबुक पोस्ट ने पूरे परिसर का माहौल बदल दिया। चीफ प्रॉक्टर प्रो. आलोक खरे के नाम से बनी आईडी से महिलाओं को लेकर की गई कथित अभद्र टिप्पणी जैसे ही सामने आई, छात्रों में आक्रोश फैल गया। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के कार्यकर्ताओं ने इसे छात्राओं की गरिमा पर हमला बताते हुए तुरंत विरोध का बिगुल फूंक दिया। देखते ही देखते कॉलेज का शांत वातावरण नारों, विरोध और भीड़ के शोर में बदल गया। हर तरफ एक ही सवाल गूंज रहा था—क्या यह पोस्ट सच में जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति की सोच को दर्शाती है?

सड़क से दफ्तर तक गूंजे नारे, पैदल मार्च से बढ़ा दबाव

गुस्साए छात्रों ने कॉलेज परिसर में पैदल मार्च निकाला और सीधे प्राचार्य कार्यालय का रुख किया। नारेबाजी और विरोध के बीच माहौल लगातार गरमाता गया। छात्र नेताओं ने आरोप लगाया कि इस तरह की पोस्ट न सिर्फ महिलाओं का अपमान है, बल्कि पूरे संस्थान की छवि को भी धूमिल करती है। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक सख्त कार्रवाई नहीं होगी, आंदोलन जारी रहेगा। कॉलेज के मुख्य मार्गों पर छात्र-छात्राओं की भीड़ और गूंजते नारे प्रशासन पर दबाव बनाते नजर आए।

चीफ प्रॉक्टर पहुंचे सामने, गुस्से में बदली भीड़ की भाषा

स्थिति उस वक्त और बिगड़ गई जब प्रदर्शनकारियों की मांग पर चीफ प्रॉक्टर प्रो. आलोक खरे मौके पर पहुंचे। जैसे ही वे सामने आए, भीड़ ने उन्हें घेर लिया और माहौल अचानक उग्र हो गया। नारेबाजी के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई, जिसमें छात्राओं ने भी खुलकर हिस्सा लिया। हालात इतने तनावपूर्ण हो गए कि सुरक्षा कर्मियों को तुरंत हस्तक्षेप करना पड़ा। किसी तरह चीफ प्रॉक्टर को भीड़ से निकालकर सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया। यह दृश्य कॉलेज के इतिहास के सबसे तनावपूर्ण पलों में से एक बन गया।

प्रशासन ने लिया त्वरित फैसला, प्रॉक्टर पद से हटाए गए

मामले की गंभीरता को देखते हुए कॉलेज प्रशासन ने तुरंत बड़ा कदम उठाया। प्राचार्य प्रो. ओम प्रकाश राय ने चीफ प्रॉक्टर को तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया और पूरी प्रॉक्टोरियल टीम को भंग करने का आदेश जारी कर दिया। यह निर्णय छात्रों के बढ़ते आक्रोश को शांत करने के लिए लिया गया, लेकिन हालात इतने गर्म थे कि यह कार्रवाई भी तुरंत असर नहीं दिखा सकी। प्रशासन के इस फैसले ने यह संकेत जरूर दिया कि मामले को हल्के में नहीं लिया जा रहा।

गुस्सा नहीं थमा, दफ्तर पर जड़ा ताला और चाबी सौंप दी

प्रदर्शनकारी छात्रों का आक्रोश यहीं नहीं रुका। उन्होंने चीफ प्रॉक्टर के कार्यालय पर ताला जड़ दिया और उसकी चाबी प्राचार्य को सौंप दी। यह कदम प्रतीकात्मक विरोध के साथ-साथ प्रशासन के खिलाफ खुली नाराजगी का संकेत था। एबीवीपी के विभाग संगठन मंत्री विकास गोला और महानगर मंत्री आनंद कठेरिया के नेतृत्व में छात्रों ने साफ कहा कि यह सिर्फ शुरुआत है, जब तक दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी, आंदोलन जारी रहेगा।

तनाव में घिरा परिसर, जांच और कार्रवाई की उठी मांग

पूरे घटनाक्रम के बाद कॉलेज परिसर में लंबे समय तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। प्रशासन हालात को सामान्य करने में जुटा रहा, वहीं छात्र संगठन निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग पर अड़ा रहा। अब नजर इस बात पर है कि जांच में क्या सामने आता है और क्या यह मामला सिर्फ एक फर्जी आईडी का है या इसके पीछे कुछ और गहरी साजिश छिपी है। फिलहाल, बरेली कॉलेज का यह विवाद पूरे शहर में चर्चा का विषय बन चुका है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *