बरेली में एक खुले नाले ने न सिर्फ एक युवक की जिंदगी निगल ली, बल्कि पूरे सिस्टम की हकीकत भी उजागर कर दी। 30 घंटे तक चला हाई-वोल्टेज रेस्क्यू ऑपरेशन, मशीनों का महायुद्ध और 95 कर्मचारियों की जिद—आखिरकार गुरुवार तड़के 3:30 बजे उस दर्दनाक अंत तक पहुंची, जहां जिंदगी नहीं, सिर्फ एक शव मिला।
मौत का नाला बना सिस्टम पर सवाल
सेटेलाइट बस स्टैंड के पास खुले नाले में गिरा युवक तौहीद 30 घंटे तक जिंदगी और मौत के बीच कहीं गुम रहा। यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि शहर की लापरवाही की खुली पोल बन गया। मंगलवार रात करीब 9:30 बजे जैसे ही युवक के गिरने की खबर मिली, पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। सवाल उठने लगे—क्या यह हादसा रोका जा सकता था? क्या खुले नालों की अनदेखी ही इस मौत की वजह बनी?
30 घंटे की जंग: अफसर से लेकर मजदूर तक मैदान में
रेस्क्यू ऑपरेशन का सबसे बड़ा चेहरा बने नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य, जो पूरी रात मौके पर डटे रहे। उनके साथ अपर नगर आयुक्त शशि भूषण राय और इंजीनियर एके राठी भी लगातार निगरानी करते रहे। बुधवार देर रात तक जब कोई सफलता नहीं मिली, तो मौके पर मौजूद लोगों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए, लेकिन अफसरों ने हार नहीं मानी। साफ संदेश था—“जब तक युवक नहीं मिलेगा, ऑपरेशन नहीं रुकेगा।”
नाले के भीतर मौत की तलाश, टीमों की जिद बनी ताकत
करीब 95 कर्मचारियों की टीम ने दिन-रात एक कर दिया। एसडीआरएफ, नगर निगम और पुलिस की टीमें बारी-बारी से नाले में उतरती रहीं। बदबू, कीचड़ और अंधेरे के बीच यह ऑपरेशन बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। हर मिनट उम्मीद और निराशा के बीच झूलता रहा, लेकिन टीमों ने हार नहीं मानी। आखिरकार उनकी जिद ही सफलता की वजह बनी।
मशीनों का महायुद्ध: नाला बना रणभूमि
जब इंसानी कोशिशें कम पड़ने लगीं, तब मशीनों ने मोर्चा संभाला। रामपुर से मंगाई गई स्टोन ब्रेकर मशीन, जेसीबी, रोड ब्रेकर और हाई पावर पंपों ने नाले को चीरना शुरू किया। पीलीभीत रोड पर 10-10 मीटर तक स्लैब तोड़े गए। कई जगहों पर नाले का ढांचा तोड़ना पड़ा। यह ऑपरेशन किसी युद्ध से कम नहीं था, जहां हर वार मौत की परतें खोल रहा था।
16 लाख खर्च, लेकिन प्राथमिकता रही इंसानियत
नगर निगम के मुताबिक इस ऑपरेशन में करीब 16 लाख रुपये खर्च हुए। डीजल, मशीनों का किराया, संसाधन—सब कुछ झोंक दिया गया। पर्यावरण अभियंता राजीव राठी ने बताया कि विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है। लेकिन इस पूरे अभियान में सबसे बड़ी बात यह रही कि पैसों से ज्यादा अहम एक इंसान को ढूंढना था—चाहे वह जिंदा मिले या मृत।
पोस्टमार्टम ने खोली सच्चाई, अब सख्ती का दावा
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में साफ हुआ कि तौहीद की मौत डूबने से हुई। उसके फेफड़ों, सांस की नली और पेट तक में कीचड़ भर गया था, जिससे दम घुट गया। रिपोर्ट ने हादसे की भयावहता को उजागर कर दिया। घटना के बाद नगर निगम जागा है—मुख्य अभियंता मनीष अवस्थी ने सभी जेई को खुले नालों को तुरंत ढकने और सुरक्षा व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही चेतावनी दी गई है कि लापरवाही पर सीधे कार्रवाई होगी।