उत्तर प्रदेश के चंदौली में प्रशासनिक गलियारों को हिला देने वाला एक मामला सामने आया है, जहां दो उच्च पदस्थ अफसर—SDM पति-पत्नी—का निजी विवाद अब खुलकर कानूनी जंग में बदल चुका है। आरोप इतने गंभीर हैं कि मामला दहेज, घरेलू हिंसा और जान से मारने की कोशिश तक जा पहुंचा है, जिससे पूरा सिस्टम सवालों के घेरे में आ गया है।
अफसर दंपती की शादी से विवाद तक की कहानी
उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में तैनात SDM अनुपम मिश्रा और SDM दिव्या ओझा की शादी कभी एक हाई-प्रोफाइल रिश्ते के रूप में चर्चा में रही थी। 1 दिसंबर 2020 को प्रयागराज में धूमधाम से हुई इस शादी को लोग प्रशासनिक जगत की ‘परफेक्ट जोड़ी’ मानते थे। लेकिन समय के साथ यह रिश्ता दरकता गया।
बीते कई महीनों से दोनों के बीच तनाव और मनमुटाव की खबरें सामने आ रही थीं। जो रिश्ता कभी प्रशासनिक ताकत और प्रतिष्ठा का प्रतीक था, वह अब आरोप-प्रत्यारोप और विवादों का केंद्र बन गया है।
ससुर का बड़ा कदम: दामाद पर FIR दर्ज
मामले ने तब बड़ा मोड़ लिया जब SDM दिव्या ओझा के पिता निशाकांत ओझा ने प्रतापगढ़ के महिला थाने में अपने दामाद अनुपम मिश्रा के खिलाफ FIR दर्ज करा दी। एफआईआर में घरेलू हिंसा, मानसिक प्रताड़ना और दहेज उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। एक पूर्व प्राचार्य होने के नाते निशाकांत ओझा का यह कदम न सिर्फ पारिवारिक बल्कि सामाजिक स्तर पर भी बड़ा संदेश दे रहा है। इस कार्रवाई के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई है और मामला अब व्यक्तिगत विवाद से निकलकर सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गया है।
20 करोड़ दहेज का आरोप, हत्या की कोशिश तक का दावा
एफआईआर में लगाए गए आरोपों ने पूरे मामले को और सनसनीखेज बना दिया है। शिकायत के मुताबिक, SDM अनुपम मिश्रा पर शादी के बाद 20 करोड़ रुपये दहेज मांगने का आरोप है, जो बाद में घटाकर 5 करोड़ तक बताया गया। इतना ही नहीं, शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि दिव्या ओझा को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और यहां तक कि जान से मारने की कोशिश भी की गई। ये आरोप न सिर्फ व्यक्तिगत रिश्ते को झकझोरते हैं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था की छवि पर भी सवाल खड़े करते हैं।
तलाक की अर्जी और कानूनी लड़ाई
सूत्रों के मुताबिक, अनुपम मिश्रा ने कोर्ट में तलाक की अर्जी भी दाखिल कर दी है। यानी मामला अब पूरी तरह कानूनी मोड़ ले चुका है। एक तरफ पत्नी और उसके परिवार की ओर से गंभीर आरोप हैं, तो दूसरी ओर पति ने वैवाहिक संबंध खत्म करने का रास्ता चुना है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के हाई-प्रोफाइल मामलों में हर कदम बेहद संवेदनशील होता है और इसका असर दोनों पक्षों की पेशेवर छवि पर भी पड़ता है।
दोनों अफसरों की चुप्पी, सिस्टम में सन्नाटा
हैरानी की बात यह है कि इतने बड़े विवाद के बावजूद दोनों ही अधिकारी मीडिया से दूरी बनाए हुए हैं। न तो अनुपम मिश्रा और न ही दिव्या ओझा ने इस मामले पर कोई सार्वजनिक बयान दिया है। वहीं, जिले के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी इस पूरे विवाद पर चुप्पी साधे हुए हैं। यह चुप्पी ही इस मामले को और रहस्यमयी बना रही है, जिससे अफवाहों और कयासों का दौर तेज हो गया है।
चंदौली से प्रतापगढ़ तक मचा हड़कंप
एफआईआर दर्ज होने के बाद चंदौली से लेकर प्रतापगढ़ तक इस मामले की चर्चा जोरों पर है। प्रशासनिक गलियारों में यह मामला ‘टॉक ऑफ द टाउन’ बन चुका है। लोग इस बात को लेकर हैरान हैं कि जो अधिकारी कानून व्यवस्था संभालते हैं, उनके अपने जीवन में ही कानून का सहारा लेना पड़ रहा है। यह विवाद न सिर्फ एक परिवार की कहानी है, बल्कि यह उस सच्चाई को भी उजागर करता है कि पद और प्रतिष्ठा के पीछे भी इंसानी रिश्ते उतने ही नाजुक होते हैं।