उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले के हसायन क्षेत्र में बेटे की चाहत एक परिवार पर भारी पड़ गई। 35 वर्षीय रीना देवी ने सातवीं बार मां बनते हुए एक बच्ची को जन्म दिया, लेकिन डिलीवरी के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव ने उनकी जान ले ली। अब सातों बेटियां मां के साए के बिना हैं और गांव में इस घटना ने कई गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं।
सातवीं डिलीवरी… और मौत का सन्नाटा
हाथरस जिले की कोतवाली हसायन क्षेत्र के गांव श्यामपुर निवासी 35 वर्षीय रीना देवी, पत्नी राजेश कुमार, सोमवार को अचानक प्रसव पीड़ा से तड़प उठीं। परिजन उन्हें आनन-फानन में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। यह उनकी सातवीं डिलीवरी थी। डॉक्टरों की निगरानी में उन्होंने एक बच्ची को जन्म दिया। परिवार को बेटे की उम्मीद थी, लेकिन फिर बेटी हुई। इसी दौरान प्रसव के बाद रीना की तबीयत अचानक बिगड़ गई। अत्यधिक रक्तस्राव शुरू हो गया। अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई। डॉक्टरों ने हालत गंभीर देखते हुए तत्काल अलीगढ़ हायर सेंटर रेफर कर दिया।
अलीगढ़ पहुंचने से पहले टूट गई सांसों की डोरी
परिजन रीना को लेकर अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज के लिए निकले, लेकिन रास्ते में ही उनकी हालत और बिगड़ती गई। सांसें उखड़ने लगीं। एक निजी अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घर लौटती एंबुलेंस में नवजात बच्ची थी… और एक निर्जीव शरीर। जिस मां ने सात बार जीवन दिया, वह खुद जिंदगी की जंग हार चुकी थी।
सात बेटियां… और अधूरा सपना
रीना देवी के पहले से छह बेटियां थीं। परिवार को इस बार बेटे की उम्मीद थी। लेकिन सातवीं बार भी बेटी का जन्म हुआ। गांव में चर्चा है कि बेटे की चाहत में बार-बार गर्भधारण का जोखिम उठाया गया। हालांकि यह पारिवारिक मामला है, लेकिन घटना ने सामाजिक मानसिकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सातों बेटियां अपनी मां के बिना हैं। उनमें सबसे बड़ी अभी किशोरावस्था में है और सबसे छोटी नवजात।
सवालों में स्वास्थ्य तंत्र
घटना के बाद स्थानीय स्तर पर चर्चाएं तेज हैं—
- क्या सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पर्याप्त सुविधाएं थीं?
- क्या समय पर रक्त की व्यवस्था हो पाई?
- क्या रेफरल प्रक्रिया तेज थी?
डॉक्टरों ने गंभीर हालत देख हायर सेंटर भेजा, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में रेफरल और उपचार के बीच का अंतराल कई बार जानलेवा बन जाता है। अत्यधिक रक्तस्राव (Postpartum Hemorrhage) प्रसव के दौरान मातृ मृत्यु का बड़ा कारण माना जाता है।
आंकड़े भी देते हैं चेतावनी
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि:
- बार-बार गर्भधारण से मां का शरीर कमजोर हो जाता है
- हर प्रसव के साथ जटिलताओं का खतरा बढ़ता है
- ग्रामीण क्षेत्रों में समय पर आपात चिकित्सा सुविधा न मिलने से मौतें बढ़ती हैं
रीना की मौत कोई अकेली घटना नहीं है। देश में हर साल हजारों महिलाएं प्रसव संबंधी जटिलताओं के कारण जान गंवाती हैं।
गांव में पसरा मातम
मंगलवार को रीना देवी का अंतिम संस्कार कर दिया गया। गांव में सन्नाटा छाया है। पड़ोसी बताते हैं कि परिवार साधारण आर्थिक स्थिति का है। अब सबसे बड़ा सवाल है— सात बेटियों की परवरिश कैसे होगी? मां का साया उठते ही घर का संतुलन भी डगमगा गया है।
सामाजिक सोच पर सवाल
यह घटना सिर्फ एक पारिवारिक त्रासदी नहीं है। यह उस मानसिकता का आईना भी है जहां आज भी कई इलाकों में बेटे को प्राथमिकता दी जाती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि जागरूकता, परिवार नियोजन और महिला स्वास्थ्य को लेकर गंभीर प्रयास ही ऐसी घटनाओं को रोक सकते हैं।