बरेली जिले में शत्रु संपत्तियों को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। 220 संपत्तियों में से 177 के वेस्टिंग ऑर्डर मिल चुके हैं, लेकिन कई मामलों में मंदिर, पुलिस थाना, स्कूल और कब्रिस्तान बने होने से स्थिति जटिल हो गई है। अब जिला प्रशासन ने 15 दिन के अंदर सभी लंबित मामलों की डीवीसी रिपोर्ट और नामांतरण प्रक्रिया पूरी करने का अल्टीमेटम जारी कर दिया है।
थाना, मंदिर और कब्रिस्तान… ‘शत्रु संपत्तियों’ की जमीन पर उलझा बरेली!
उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में 220 शत्रु संपत्तियों का मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। कलेक्ट्रेट में हुई उच्चस्तरीय बैठक में प्रशासन ने साफ कहा—अब कोई फाइल लंबित नहीं रहेगी। वर्षों से अटके मामलों को 15 दिन में निपटाने का स्पष्ट आदेश दे दिया गया है।
क्या है मौजूदा स्थिति?
- कुल शत्रु संपत्तियां: 220
- वेस्टिंग ऑर्डर प्राप्त: 177
- अमलदरामद (क्रियान्वयन): 135
- पूरी डीवीसी: 120+
- डीबीसी भेजी जानी हैं: 106
- नामांतरण लंबित: 85
यह आंकड़े बताते हैं कि प्रशासन ने आधे से ज्यादा काम पूरा कर लिया है, लेकिन जमीनी हकीकत अभी भी जटिल बनी हुई है।
मंदिर, थाना, नलकूप… कैसे होगा मूल्यांकन?
सबसे बड़ा विवाद आंवला क्षेत्र में सामने आया। यहां 13 शत्रु संपत्तियों पर सार्वजनिक उपयोग की संरचनाएं बनी हुई हैं—
- पुलिस थाना
- मंदिर
- स्कूल
- नलकूप
जिला मूल्यांकन समिति (DVC) को निर्देश दिया गया है कि इन सार्वजनिक उपयोग वाले हिस्सों को अलग करते हुए बाकी भूमि का मूल्यांकन किया जाए। महेशपुर अटरिया में एक ही गाटा के विभाजन के कारण सात अलग-अलग डीवीसी तैयार हुईं। प्रशासन ने आदेश दिया है कि भ्रम खत्म करने के लिए पार्ट-वार एकीकृत डीवीसी तैयार की जाए।
कब्रिस्तान की जमीन और लखनऊ से मार्गदर्शन
कुछ गाटों पर कब्रिस्तान मौजूद होने से मामला और संवेदनशील हो गया है। इन संपत्तियों के संबंध में लखनऊ स्थित शत्रु संपत्ति कार्यालय से मार्गदर्शन लेकर आगे बढ़ने का फैसला किया गया है। प्रशासन का कहना है कि किसी भी धार्मिक या सार्वजनिक स्थल को प्रभावित किए बिना वैधानिक प्रक्रिया के अनुसार शेष जमीन का पुनर्मूल्यांकन किया जाएगा।
कोर्ट केस भी नहीं रोक पाएंगे प्रक्रिया
बैठक में स्पष्ट कर दिया गया कि जिन संपत्तियों पर अदालत में वाद लंबित हैं, उनका भी जिला मूल्यांकन समिति द्वारा मूल्यांकन कराया जाएगा। आंवला में गलत बंटवारे से जुड़े मामलों में 15 दिन के भीतर पुनर्स्थापना प्रार्थना पत्र दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं।
81 संपत्तियों के दस्तावेज लखनऊ भेजे गए
81 शत्रु संपत्तियों के डिमांड वेस्टिंग दस्तावेज पहले ही लखनऊ कार्यालय को भेजे जा चुके हैं। आदेश मिलते ही नामांतरण की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। प्रशासन का संकेत साफ है—अब कोई भी संपत्ति अनिश्चितता में नहीं छोड़ी जाएगी।
शत्रु संपत्ति क्या होती है?
भारत-पाकिस्तान और भारत-चीन युद्धों के बाद जिन लोगों ने देश छोड़कर दुश्मन देश की नागरिकता ले ली, उनकी संपत्तियों को “शत्रु संपत्ति” घोषित किया गया। इन संपत्तियों का प्रबंधन केंद्र सरकार के अधीन शत्रु संपत्ति अभिरक्षक कार्यालय करता है। इन संपत्तियों का मूल्यांकन, वेस्टिंग ऑर्डर और नामांतरण जिला प्रशासन की प्रक्रिया से होता है।
प्रशासन का सख्त संदेश
बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में कहा गया कि—
- लंबित डीवीसी 15 दिन में पूरी हों
- नामांतरण मामलों में तेजी लाई जाए
- गलत बंटवारे को सुधारा जाए
- सार्वजनिक उपयोग की भूमि को अलग चिह्नित किया जाए
यह कार्रवाई जिले में राजस्व, कानूनी और प्रशासनिक पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।