कानपुर। रफ्तार और रईसी के नशे में हुई एक चूक ने कई जिंदगियां झकझोर दीं। लग्जरी लैंबॉर्गिनी से लोगों को कुचलने के मामले में आखिरकार तंबाकू कारोबारी के बेटे शिवम मिश्रा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। ड्राइवर के दावे, परिवार की सफाई और CCTV फुटेज के बीच चार दिन तक चले सस्पेंस के बाद अब सच्चाई सामने आ गई है।
कानपुर के लैंबॉर्गिनी कार हादसे में तंबाकू कारोबारी का बेटा शिवम मिश्रा गिरफ्तार, कई हुए थे घायल
कानपुर शहर की सड़कों पर फर्राटा भरती एक लग्जरी लैंबॉर्गिनी कार ने अचानक ऐसा मोड़ लिया, जिसने कई लोगों की जिंदगी को झकझोर कर रख दिया। तेज रफ्तार कार ने राहगीरों को टक्कर मार दी, कई लोग घायल हो गए और इलाके में अफरातफरी मच गई। इस हाई-प्रोफाइल हादसे में अब पुलिस ने बड़ा एक्शन लेते हुए तंबाकू कारोबारी के बेटे शिवम मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया है। घटना के बाद पहले अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज किया गया था, लेकिन घायलों और स्थानीय लोगों के विरोध-प्रदर्शन के बाद शिवम मिश्रा का नाम एफआईआर में शामिल किया गया। चार दिन की जांच, बयानबाजी और सस्पेंस के बाद आखिरकार पुलिस ने उसे पकड़ लिया। मेडिकल परीक्षण के बाद आरोपी को कोर्ट में पेश किया गया।
ड्राइवर का दावा, लेकिन CCTV ने खोला सच
मामले ने उस वक्त और तूल पकड़ लिया जब आरोपी पक्ष की ओर से दावा किया गया कि कार शिवम नहीं, बल्कि ड्राइवर चला रहा था। एक दिन पहले ड्राइवर मीडिया के सामने आया और उसने खुद को गाड़ी चलाने वाला बताया। इस बयान ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया। लेकिन पुलिस जांच और CCTV फुटेज ने इस दावे पर सवाल खड़े कर दिए। जांच में सामने आया कि हादसे के वक्त गाड़ी शिवम मिश्रा ही चला रहा था। वायरल वीडियो में भी उसे ड्राइविंग सीट से बाहर निकलते हुए देखा गया। चश्मदीद गवाहों ने भी यही बयान दिया कि कार चलाने वाला युवक शिवम ही था।
पिता का बयान, लेकिन पुलिस को मिला अलग सुराग
घटना के बाद शिवम के पिता केके मिश्रा ने दावा किया था कि उनका बेटा दिल्ली में इलाज करा रहा है और घटना के समय वहां मौजूद नहीं था। उन्होंने बेटी की तबीयत खराब होने और दिल्ली में उपचार की बात भी कही। हालांकि पुलिस की जांच में यह दावा टिक नहीं पाया। सूत्रों के मुताबिक शिवम कानपुर में ही छिपा हुआ था। पुलिस ने लगातार संभावित ठिकानों पर नजर रखी और आखिरकार उसे गिरफ्तार कर लिया। इससे साफ हो गया कि परिवार की सफाई और वास्तविकता में बड़ा अंतर था।
घायलों का गुस्सा बना गिरफ्तारी की वजह
हादसे में घायल हुए लोगों और उनके परिजनों ने आरोपी की गिरफ्तारी को लेकर विरोध-प्रदर्शन भी किया। उनका आरोप था कि प्रभावशाली परिवार से ताल्लुक रखने के कारण कार्रवाई में देरी हो रही है। सोशल मीडिया पर भी यह मामला तेजी से वायरल हुआ और पुलिस पर दबाव बढ़ा। इसी दबाव के बाद पुलिस ने जांच तेज की। DCP सेंट्रल अतुल श्रीवास्तव ने पहले ही संकेत दे दिए थे कि प्राथमिक जांच में शिवम के खिलाफ ठोस साक्ष्य हैं। CCTV, मोबाइल लोकेशन और गवाहों के बयानों के आधार पर गिरफ्तारी की गई।
हाई-प्रोफाइल केस, कानून का टेस्ट
यह मामला सिर्फ एक सड़क हादसा नहीं, बल्कि हाई-प्रोफाइल परिवार और कानून व्यवस्था की साख से जुड़ा बन गया था। सवाल उठ रहे थे कि क्या रईसी और प्रभाव के दम पर कार्रवाई टाली जा रही है? लेकिन गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि कानून सबके लिए बराबर है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और जो भी साक्ष्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। घायलों के बयान दर्ज कर लिए गए हैं और मेडिकल रिपोर्ट भी केस का अहम हिस्सा होगी।
वायरल वीडियो बना टर्निंग पॉइंट
घटना के तुरंत बाद एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसमें एक युवक को लैंबॉर्गिनी की ड्राइविंग सीट से बाहर निकलते देखा गया। यही वीडियो जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बना। जांच एजेंसियों ने फुटेज का मिलान किया और कार चालक की पहचान सुनिश्चित की। यही डिजिटल सबूत आरोपी पक्ष के दावों पर भारी पड़ा। अगर यह वीडियो सामने न आता तो मामला लंबा खिंच सकता था।
आगे क्या?
अब आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया है। अदालत में पुलिस रिमांड की मांग कर सकती है, ताकि घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच हो सके। पुलिस यह भी देख रही है कि हादसे के समय कार की स्पीड कितनी थी और क्या किसी तरह की लापरवाही या नशे की स्थिति थी। यह मामला शहर में सड़क सुरक्षा, रफ्तार और जिम्मेदारी को लेकर भी बहस छेड़ चुका है। लग्जरी कार और हाई-स्पीड ड्राइविंग के बीच कानून की पकड़ कितनी मजबूत है, यह केस आने वाले दिनों में तय करेगा।