यूपी विधानसभा का बजट सत्र हंगामे के साथ शुरू, पहले ही दिन गरमाई सियासत
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानमंडल का बजट सत्र 2026-27 सोमवार को शुरू होते ही सियासी हंगामे की भेंट चढ़ गया। पहले ही दिन राज्यपाल आनंदी बेन पटेल के अभिभाषण के दौरान समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के विधायकों ने जोरदार नारेबाजी की, जिससे सदन का माहौल तनावपूर्ण हो गया। लगातार व्यवधान से नाराज राज्यपाल ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि “आप लोगों के समय में सब कुछ जीरो था। पिछले पांच-सात साल से आप सिर्फ हंगामा ही कर रहे हैं और आगे भी आपका जीरो ही रहने वाला है।”
राज्यपाल के इस बयान के बाद सदन में सत्ता पक्ष की ओर से जोरदार प्रतिक्रिया देखने को मिली। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना राज्यपाल के पास बैठकर जोर-जोर से हंसते नजर आए, जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत भाजपा के मंत्री और विधायक मेज थपथपाकर समर्थन जताते दिखे। यह दृश्य सदन में सत्ता और विपक्ष के बीच गहरी खाई को साफ तौर पर दर्शाता नजर आया।
अभिभाषण के दौरान बढ़ा विवाद
दरअसल, राज्यपाल आनंदी बेन पटेल अपने अभिभाषण में प्रदेश सरकार की उपलब्धियों, विकास कार्यों, कानून-व्यवस्था, महिला सुरक्षा, निवेश और कल्याणकारी योजनाओं का जिक्र कर रही थीं। इसी दौरान सपा और कांग्रेस विधायकों ने सरकार विरोधी नारे लगाने शुरू कर दिए। बार-बार टोकने के बावजूद नारेबाजी जारी रही, जिससे राज्यपाल का धैर्य जवाब दे गया।सदन में शोर-शराबा इतना बढ़ गया कि कई बार कार्यवाही बाधित हुई। विधानसभा अध्यक्ष ने विपक्षी विधायकों से शांति बनाए रखने की अपील की, लेकिन इसका कोई असर नहीं दिखा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हाल के वर्षों में राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान हंगामा आम हो गया है, लेकिन इस बार की तल्खी असाधारण रही।
सत्र शुरू होने से पहले ही प्रदर्शन
बजट सत्र शुरू होने से पहले ही सपा और कांग्रेस के तेवर सख्त नजर आए। दोनों दलों के विधायकों ने विधानसभा परिसर में प्रदर्शन किया। विशेष रूप से एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया में फॉर्म-7 के कथित दुरुपयोग को लेकर विपक्ष ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। सपा विधायक जाहिद बेग नारे लिखी तख्तियां लेकर सदन पहुंचे, जिसने पूरे घटनाक्रम को और ज्यादा उग्र बना दिया। उनके साथ अन्य विपक्षी विधायक भी लगातार नारेबाजी करते रहे।
इन मुद्दों को लेकर किया गया विरोध
सपा और कांग्रेस विधायकों ने सरकार के खिलाफ कई मुद्दों को उठाया, जिनमें शामिल हैं—
- वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर कथित तोड़फोड़
- एसआईआर और फॉर्म-7 का दुरुपयोग
- किसानों की बदहाल स्थिति
- बढ़ती बेरोजगारी
- महिला सुरक्षा पर सवाल
- कानून-व्यवस्था की स्थिति
- महंगाई और आम जनता पर आर्थिक बोझ
विपक्ष का आरोप है कि सरकार जमीनी समस्याओं से ध्यान भटकाकर सिर्फ अपनी उपलब्धियों का प्रचार कर रही है।
सत्ता पक्ष का पलटवार
वहीं, सत्ता पक्ष ने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। भाजपा नेताओं का कहना है कि विपक्ष के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं है और वह सिर्फ हंगामा करके सुर्खियों में बने रहना चाहता है। भाजपा विधायकों ने राज्यपाल के अभिभाषण को सरकार की विकास यात्रा का आईना बताया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पूरे घटनाक्रम के दौरान शांत और आत्मविश्वास से भरे नजर आए। सत्ता पक्ष की मेज थपथपाने की प्रतिक्रिया को राजनीतिक जानकार सरकार की ताकत और एकजुटता के प्रदर्शन के रूप में देख रहे हैं।
राज्यपाल की टिप्पणी पर सियासी बहस
राज्यपाल आनंदी बेन पटेल की “जीरो प्रदर्शन” वाली टिप्पणी अब सियासी बहस का बड़ा मुद्दा बन गई है। भाजपा नेताओं ने इसे सच्चाई करार दिया, जबकि सपा और कांग्रेस ने इसे राज्यपाल पद की गरिमा के खिलाफ बताया।
संवैधानिक विशेषज्ञों की राय इस मुद्दे पर बंटी हुई है। कुछ का मानना है कि राज्यपाल को पूरी तरह निष्पक्ष रहना चाहिए, जबकि अन्य विशेषज्ञ इसे लगातार हो रहे व्यवधान पर स्वाभाविक प्रतिक्रिया बता रहे हैं।
आगे कैसा रहेगा बजट सत्र?
पहले ही दिन के हंगामे से साफ है कि यूपी विधानसभा का यह बजट सत्र काफी तूफानी रहने वाला है। सरकार जहां विकास और आर्थिक सुधारों पर केंद्रित बजट पेश करने की तैयारी में है, वहीं विपक्ष बेरोजगारी, महंगाई और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना चुका है। अब देखना यह होगा कि क्या इस तीखी सियासी खींचतान के बीच सदन में सार्थक चर्चा हो पाएगी या आने वाले दिन भी हंगामे की भेंट चढ़ेंगे।