पीलीभीत। ऑनलाइन गेम खेलकर लाखों रुपये जीतने और जमीन में निवेश पर मोटा मुनाफा दिलाने का लालच देकर 14 राज्यों के लोगों से कथित तौर पर 102.54 करोड़ रुपये ठग लिए गए। पुलिस ने गिरोह के सरगना मोहसिन और नर्सिंग छात्र राहुल को गिरफ्तार किया है। नेटवर्क से जुड़े बरेली निवासी विशाल मौर्य और फरमान की तलाश की जा रही है।
45 गेमिंग एप बनाकर तलाशते थे शिकार
पुलिस के अनुसार, मोहसिन ने अपने नाना जमील और मामा तसलीम से साइबर ठगी के तरीके सीखे थे। करीब तीन साल पहले उसने बरेली निवासी विशाल मौर्य और फरमान के साथ मिलकर नेटवर्क खड़ा किया। आरोपियों ने 45 ऑनलाइन गेमिंग एप बनाए और इंटरनेट मीडिया पर ‘गेम खेलकर लाखों रुपये जीतें’ जैसे लुभावने विज्ञापन प्रसारित किए। इसके साथ ही जमीन में निवेश करने पर भारी मुनाफा दिलाने का झांसा दिया जाता था। विज्ञापन देखकर एप तक पहुंचने वाले लोगों से आरोपी ओटीपी हासिल कर लेते थे। इसके बाद उनके मोबाइल और नेट बैंकिंग का नियंत्रण लेकर रकम अपने नेटवर्क से जुड़े खातों में ट्रांसफर कर दी जाती थी।
10 हजार का लालच, बदले में एटीएम और चेकबुक
गिरोह ने ठगी की रकम खपाने के लिए छोटे दुकानदारों और फर्म संचालकों के नाम पर नए करंट अकाउंट खुलवाए। खाताधारकों से कहा जाता था कि उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाया जाएगा। इसके बदले एडवांस में 10-10 हजार रुपये देकर उनके एटीएम कार्ड, चेकबुक और पासबुक अपने कब्जे में ले ली जाती थीं। आरोपी खाताधारकों के आधार कार्ड का इस्तेमाल कर नया सिमकार्ड निकलवाते और उसी नंबर को बैंक खाते से जुड़वा देते थे। इससे लेनदेन और बैंकिंग से जुड़े सभी संदेश सीधे गिरोह के सदस्यों तक पहुंचते थे।
एक खाता खुलवाने पर 30 हजार और दो प्रतिशत कमीशन
पुलिस की जांच में सामने आया कि फर्जीवाड़े में इस्तेमाल होने वाला प्रत्येक बैंक खाता उपलब्ध कराने के बदले बरेली के भोजीपुरा निवासी विशाल और फरमान को 30 हजार रुपये दिए जाते थे। इसके अतिरिक्त दोनों को ठगी की रकम का दो प्रतिशत हिस्सा भी मिलता था। एटीएम और चेकबुक के जरिये अलग-अलग स्थानों से रकम निकाल ली जाती थी।
दानिश की शिकायत से खुला करोड़ों का नेटवर्क
पिछले महीने गौनेरी गांव निवासी दानिश ने पुलिस से शिकायत की थी। आरोप था कि मोहसिन और उसके भाई मोबीन ने 10 हजार रुपये का लालच देकर उसका आधार कार्ड, एटीएम कार्ड और अन्य दस्तावेज ले लिए थे। जांच आगे बढ़ी तो एक-दो खातों का मामला 102.54 करोड़ रुपये के बड़े साइबर नेटवर्क तक जा पहुंचा। पुलिस के मुताबिक मोहसिन ने बिलाल, हारून, अरबाज, शाहिद, जीशान, शहराब और मुस्तफा समेत कई लोगों के करंट अकाउंट पीलीभीत की बैंक ऑफ बड़ौदा शाखाओं में खुलवाए थे। इन्हीं खातों में साइबर ठगी की रकम भेजी गई।
एक खाते में 42 करोड़, दर्ज हुईं 85 शिकायतें
राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) से मिले रिकॉर्ड ने पुलिस को चौंका दिया। हारून के खाते में करीब 42 करोड़ रुपये का लेनदेन मिला, जिसे लेकर 85 शिकायतें दर्ज हैं। मोहसिन के खाते में 32 करोड़ रुपये आने की जानकारी मिली और उसके खिलाफ 15 शिकायतें दर्ज हैं। नर्सिंग छात्र राहुल के खाते में 28 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन से जुड़ी 34 शिकायतें मिलीं। अरबाज के खिलाफ नौ और दानिश से जुड़े खाते को लेकर सात शिकायतें दर्ज हैं। गिरोह के खिलाफ अलग-अलग राज्यों में कुल करीब 200 शिकायतें सामने आई हैं।
डिजिटल सबूत मिटाने के लिए जलाए सिमकार्ड
पुलिस की घेराबंदी बढ़ने पर आरोपियों ने सबूत मिटाने की कोशिश की। कई मोबाइल सिमकार्ड जला दिए गए, ई-मेल आईडी का एक्सेस खत्म कर दिया गया और मोबाइल एवं अन्य उपकरणों से अधिकतर डेटा डिलीट कर दिया गया। इसके बावजूद एनसीआरपी पोर्टल और बैंक खातों के डिजिटल रिकॉर्ड से लेनदेन की परतें खुलती चली गईं।
आठ फर्जी आधार कार्ड और 10 एटीएम बरामद
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के पास से आठ कथित फर्जी आधार कार्ड, 10 एटीएम कार्ड और अलग-अलग बैंकों की चेकबुक एवं पासबुक बरामद की हैं। पुलिस अब खाताधारकों, रकम निकालने वालों और गिरोह को बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। फरार आरोपी विशाल मौर्य और फरमान की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है।