bareillyडॉक्टर नफीस और मौलाना तौकीर।

बरेली। बरेली हिंसा मामले में आईएमसी प्रमुख मौलाना तौकीर रजा खान को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने तौकीर रजा की जमानत याचिका खारिज कर दी। उनके साथ आरोपी डॉ. नफीस को भी अदालत ने जमानत देने से इनकार कर दिया। हिंसा से जुड़े मामलों में दाखिल कुल 63 याचिकाओं पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसला सुनाया। तौकीर रजा और डॉ. नफीस को छोड़कर अन्य आरोपियों को जमानत मिलने की बात सामने आई है।

मौलाना तौकीर रजा समेत अन्य आरोपियों ने जमानत के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। कोर्ट ने संबंधित याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की। 26 मई को सभी पक्षों की बहस पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया गया था। सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने पक्ष रखा। जस्टिस आशुतोष श्रीवास्तव की सिंगल बेंच ने मामले में फैसला सुनाते हुए तौकीर रजा और डॉ. नफीस की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं।

फतेहगढ़ जेल में बंद हैं तौकीर रजा

बरेली में 26 सितंबर 2025 को हुई हिंसा के मामले में पुलिस ने मौलाना तौकीर रजा को कथित मास्टरमाइंड बताया है। वह फिलहाल फर्रुखाबाद की फतेहगढ़ जेल में बंद हैं। हिंसा को लेकर शहर के अलग-अलग थानों में कई मुकदमे दर्ज किए गए थे। तौकीर रजा की ओर से अधिवक्ता के माध्यम से हाईकोर्ट में जमानत की अर्जी दाखिल की गई थी। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि उन्हें राजनीतिक कारणों से मामले में फंसाया गया है और उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों का ठोस आधार नहीं है। जांच पूरी होने का हवाला देते हुए जमानत दिए जाने की मांग की गई थी।

अभियोजन ने बताया था हिंसा को सुनियोजित

अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए अदालत में कहा था कि 26 सितंबर को नमाज के बाद हुई हिंसा सुनियोजित थी। पुलिस का आरोप है कि शहर में कई स्थानों पर उपद्रव हुआ और पुलिसकर्मियों पर हमला किया गया। हिंसा के दौरान दो पुलिसकर्मियों के घायल होने की बात भी सामने आई थी। जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल से कारतूस के खाली खोखे, टूटी कांच की बोतलों के टुकड़े, ईंट और पत्थर समेत अन्य सामग्री बरामद करने का दावा किया था। पुलिस ने तौकीर रजा की हिंसा में प्रमुख भूमिका होने का आरोप लगाते हुए उन्हें मास्टरमाइंड बताया था।

पहले भी खारिज हो चुकी है एक जमानत अर्जी

इससे पहले 5 जून को भी बरेली हिंसा से जुड़ी एक अन्य एफआईआर में मौलाना तौकीर रजा की जमानत अर्जी इलाहाबाद हाईकोर्ट से खारिज हो चुकी है। उस मामले में न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकल पीठ ने फैसला सुनाया था। अब एक अन्य मामले में भी जमानत नहीं मिलने से तौकीर रजा को हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। वहीं, डॉ. नफीस को भी फिलहाल राहत नहीं मिली है।

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