बरेली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 साल पूरे होने पर भाजपा अब उनकी राजनीतिक यात्रा को नाटक के जरिए लोगों के बीच ले जाएगी। बरेली की हर विधानसभा में 30 कार्यक्रम कराने की तैयारी है। इनमें एक बड़ा इनडोर नाटक होगा, जबकि 29 नुक्कड़ नाटक स्कूलों, बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर किए जाएंगे। रविवार को प्रेस वार्ता में भाजपा नेताओं ने कार्यक्रम की रूपरेखा साझा की।
भाजपा की योजना हर विधानसभा क्षेत्र में एक बड़ा नाटक कराने की है। इसके साथ 29 अलग-अलग स्थानों पर नुक्कड़ नाटक होंगे। यानी एक विधानसभा में कुल 30 कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। पार्टी कार्यकर्ताओं को स्थानीय लोगों और खासकर युवाओं को इन कार्यक्रमों से जोड़ने की जिम्मेदारी दी जाएगी। नाटकों की कहानी नरेंद्र मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री बनने से शुरू होकर प्रधानमंत्री बनने तक पहुंचेगी। भाजपा के मुताबिक, इसमें उनके सार्वजनिक जीवन से जुड़े अलग-अलग प्रसंगों के साथ सेवा, अंत्योदय और सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को शामिल किया जाएगा। भाषण के बजाय कहानी को संवाद, अभिनय और संगीत के जरिए दर्शकों तक पहुंचाने की तैयारी है।
बाहर से आएंगे कलाकार, स्थानीय चेहरों को भी मौका
नाटकों के लिए पूरी टीम बाहर से नहीं आएगी। कुछ कलाकार बाहर से बुलाए जाएंगे, जबकि बरेली के स्थानीय कलाकारों को भी मंचन में शामिल किया जाएगा। बड़े इनडोर नाटक के साथ नुक्कड़ नाटकों का स्वरूप ऐसा रखा जाएगा, जिसे बाजार और सार्वजनिक स्थानों पर आसानी से मंचित किया जा सके।
जगहें लगभग तय, तारीखों पर अभी इंतजार
कार्यक्रम कहां-कहां होंगे, इसकी तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई है। भाजपा नेताओं के मुताबिक अधिकांश स्थान चुन लिए गए हैं। संयोजक और अतिथियों की जिम्मेदारी भी तय की जा रही है। हालांकि, किस विधानसभा में किस दिन नाटक होगा, इसकी अंतिम सूची अभी जारी नहीं हुई है। टीमों का कार्यक्रम मिलने के बाद तारीखों पर मुहर लगेगी। बरेली में 18 सितंबर से 15 अक्टूबर के बीच आयोजन प्रस्तावित हैं।
यूपीआई पर उठा सवाल, विधायक ने बताया गलत प्रचार
प्रेस वार्ता के दौरान दुकानों पर यूपीआई भुगतान बंद होने का मुद्दा भी उठा। नवाबगंज विधायक डॉ. एमपी आर्य ने कहा कि 2,000 रुपये तक के यूपीआई भुगतान पर ग्राहक से शुल्क नहीं लिया जाता। दुकानों पर यूपीआई बंद किए जाने की बात को उन्होंने गलत प्रचार बताया और कहा कि बड़े स्तर पर ऐसी स्थिति नहीं है। हालांकि, यूपीआई भुगतान पर शुल्क से जुड़े नियम लेनदेन के तरीके और श्रेणी के हिसाब से अलग हो सकते हैं। ऐसे में विधायक के इस बयान को उनके दावे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।