बच्चों की प्रतिभा और रचनात्मकता देखकर कुलपति ने उनका उत्साहवर्धन किया।

बरेली। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत महात्मा ज्योतिबा फूले रुहेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अनिल कुमार राय ने मंगलवार को विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए दिशा स्कूल का निरीक्षण किया। दिव्यांग एवं वंचित वर्ग के बच्चों की शिक्षा और कौशल विकास के लिए संचालित विद्यालय में उन्होंने बच्चों से आत्मीय संवाद किया और उनकी प्रतिभाओं को करीब से जाना।

बच्चों ने दिखाई रचनात्मक प्रतिभा, पेंटिंग-क्राफ्ट ने खींचा ध्यान

विद्यालय पहुंचने पर बच्चों और शिक्षकों ने कुलपति का स्वागत किया। प्रो. राय ने बच्चों से सहज माहौल में बातचीत की। विद्यार्थियों ने अपनी बनाई पेंटिंग, क्राफ्ट और अन्य रचनात्मक कार्य उन्हें दिखाए। बच्चों की प्रतिभा और रचनात्मकता देखकर कुलपति ने उनका उत्साहवर्धन किया।

कक्षाओं से संगीत कक्ष तक लिया जायजा

कुलपति ने विद्यालय की विभिन्न कक्षाओं, प्रयोगशालाओं और संगीत कक्ष का निरीक्षण किया। उन्होंने विद्यार्थियों से पढ़ाई, रुचियों, कौशल और भविष्य के सपनों के बारे में जानकारी ली। शिक्षकों और कर्मचारियों से शैक्षणिक एवं सह-शैक्षणिक गतिविधियों की जानकारी भी ली।

स्कूल की जरूरतों और भविष्य की योजनाओं पर मंथन

प्रो. राय ने विद्यालय की प्रबंध समिति और शिक्षकों के साथ बैठक कर वर्तमान आवश्यकताओं, उपलब्ध संसाधनों और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय और दिशा स्कूल के बीच सहयोग को और प्रभावी बनाया जाएगा, ताकि बच्चों को शिक्षा के साथ कौशल, रचनात्मकता और आत्मनिर्भरता के बेहतर अवसर मिल सकें।

‘इन बच्चों को केवल अवसर और अपनापन चाहिए’

कुलपति प्रो. अनिल कुमार राय ने कहा कि कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों की सेवा सामाजिक दायित्व के साथ सामूहिक जिम्मेदारी भी है। उन्होंने कहा कि दिशा स्कूल के बच्चे प्रतिभाशाली हैं और उन्हें उचित मंच व अवसर उपलब्ध कराना जरूरी है।

सर्वांगीण विकास में विश्वविद्यालय देगा हरसंभव सहयोग

प्रो. राय ने कहा, “इन बच्चों को केवल अवसर और अपनापन चाहिए। रोहिलखंड विश्वविद्यालय इनके सर्वांगीण विकास के लिए हरसंभव सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है।” उन्होंने कहा कि बच्चों के सपनों को साकार करने में सहयोग देना सामाजिक जिम्मेदारी है।

शिक्षा का उद्देश्य अंतिम पायदान तक लाभ पहुंचाना

कुलपति ने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य तभी सार्थक है, जब उसका लाभ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने शिक्षकों और कर्मचारियों के प्रयासों की सराहना करते हुए बच्चों में आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता विकसित करने को शिक्षा की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी बताया।

नशे से दूर रहने का भी दिया संदेश

कुलपति ने बच्चों को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित किया और सकारात्मक गतिविधियों के जरिए अपने कौशल व प्रतिभा को आगे बढ़ाने का संदेश दिया।

दिशा समिति के सदस्य रहे मौजूद

इस अवसर पर विश्वविद्यालय की दिशा समिति के सदस्य प्रो. एसके पांडे, प्रो. संजय गर्ग, प्रो. यशपाल, सुधाकर मौर्या और सुधांशु शर्मा मौजूद रहे। कुलपति के संवाद और निरीक्षण ने विश्वविद्यालय की समावेशी शिक्षा तथा वंचित बच्चों के सशक्तीकरण के प्रयासों को रेखांकित किया।

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