8 अगस्त से शुरू हुआ साक्षरता अभियान, पांच महिला बंदी भी परीक्षा में शामिल
बरेली। जेल की सलाखों के पीछे अब शिक्षा आत्मनिर्भरता की राह खोल रही है। जिला कारागार बरेली में निरक्षर बंदियों को साक्षर बनाने के लिए शुरू किए गए अभियान के तहत 20 सितंबर को नवभारत साक्षरता परीक्षा आयोजित की गई। परीक्षा में 35 बंदियों ने हिस्सा लिया, इनमें पांच महिला बंदी भी शामिल रहीं।
8 अगस्त से शुरू हुआ साक्षरता अभियान
जिला कारागार में निरक्षर बंदियों को शिक्षा से जोड़ने के उद्देश्य से 8 अगस्त से साक्षरता कार्यक्रम शुरू किया गया था। कार्यक्रम का उद्घाटन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बरेली की सचिव जया प्रियदर्शिनी ने किया। अभियान को शुरू कराने में सेवानिवृत्त जेल अधीक्षक मो. अकरम खान का भी सहयोग रहा।
नवभारत साक्षरता परीक्षा में 35 बंदी शामिल
भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत 20 सितंबर को परीक्षा कराई गई। इसमें 35 नवसाक्षर बंदियों ने भाग लिया। खास बात यह रही कि परीक्षा में पांच महिला बंदियों ने भी हिस्सा लेकर शिक्षा की ओर बढ़ते कदम का परिचय दिया। सफल अभ्यर्थियों को शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत एनआईओएस की ओर से प्रमाण पत्र दिया जाएगा।
शिक्षक की भूमिका से अभियान को मिला आधार
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के मार्गदर्शन और बेसिक शिक्षा विभाग के सहयोग से कारागार में साक्षरता अभियान संचालित किया जा रहा है। बंदियों को पढ़ाने के लिए तैनात शिक्षक संजीव गंगवार की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका रही। नियमित शिक्षा के जरिए बंदियों को पढ़ने-लिखने की बुनियादी जानकारी देने पर जोर दिया गया।
शिक्षा के साथ कौशल, पुनर्वास पर जोर
जेल अधीक्षक आलोक शुक्ला ने कहा कि बंदियों के सुधार और पुनर्वास के लिए शिक्षा के साथ कौशल विकास से जुड़े कार्यक्रम भी संचालित किए जा रहे हैं। शिक्षा और कौशल हासिल करने से बंदियों के लिए भविष्य में रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जुड़ने में मदद मिल सकती है।
जेल प्रशासन की टीम ने संभाली परीक्षा व्यवस्था
परीक्षा के संचालन में जेलर आनन्द सिंह, सुशील वर्मा, डिप्टी जेलर राघवेन्द्र सिंह वर्मा, वीरेश्वर प्रताप सिंह, सौमित्रदेव त्रिपाठी और देवदत्त ने सहयोग किया। इस दौरान फार्मासिस्ट यादवेन्द्र मोहन, कनिष्ठ सहायक राहुल मिश्रा, चीफ हेड वार्डर रामगोपाल सिंह सहित अन्य कारागारकर्मी मौजूद रहे।