बरेली। लोक निर्माण विभाग के भवन खंड में फर्जी हस्ताक्षर के जरिए वेतन और एरियर के नाम पर 1.28 करोड़ रुपये निकालने के मामले में चार कर्मचारियों का वेतन रोक दिया गया है। अधिशासी अभियंता अब्दुल सत्तार ने यह कार्रवाई की है। साथ ही एक कर्मचारी के निलंबन की संस्तुति भी की गई है। मामले में अब्दुल सत्तार भी आरोपी हैं, हालांकि खबर के मुताबिक उनके खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
जांच पूरी होने तक नहीं मिलेगा वेतन
प्रशासनिक अधिकारी सुरेंद्र पाल, खंडीय लेखाधिकारी राहुल शर्मा, तत्कालीन आहरण-वितरण सहायक रितेश आनंद और पटल सहायक अभिषेक चंदन कुमार का वेतन रोका गया है। आदेश के अनुसार जांच पूरी होने और वेतन बिल मिलने तक यह रोक प्रभावी रहेगी। पटल सहायक अभिषेक चंदन कुमार के निलंबन के लिए अधीक्षण अभियंता को संस्तुति भेजी गई है।
दो प्रकरणों में निकाली गई रकम
मामला 11 अधिकारियों और कर्मचारियों के अवशेष वेतन तथा एरियर भुगतान से जुड़ा है। एक प्रकरण में 67.57 लाख रुपये और दूसरे में 61.04 लाख रुपये निकाले गए। जांच में इन 11 कर्मियों में से केवल एक अवर अभियंता का 94,589 रुपये का बिल सही पाया गया। शेष 10 अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम पर किया गया भुगतान फर्जी पाया गया है। ये कर्मी अब विभाग में तैनात नहीं हैं।
हस्ताक्षर के नमूने न मिलने से अटकी एफआईआर
अधिशासी अभियंता की ओर से कोतवाली में तहरीर दिए एक सप्ताह बीत चुका है, लेकिन मुकदमा दर्ज नहीं हो सका है। तहरीर में एक मार्च 2020 से चार जनवरी 2021 तक तैनात रहे संबंधित कर्मियों के अलावा तत्कालीन अधिशासी अभियंता वीणा कुमार और वर्तमान अधिशासी अभियंता अब्दुल सत्तार के नाम भी दिए गए हैं। पुलिस ने जांच के लिए संबंधित कर्मचारियों के हस्ताक्षर के नमूने मांगे हैं। खबर के अनुसार कर्मचारियों के नमूने देने से मना करने के कारण प्राथमिकी दर्ज होने की प्रक्रिया अटकी हुई है।
दोषियों पर होगी कार्रवाई: अधीक्षण अभियंता
पीडब्ल्यूडी के अधीक्षण अभियंता प्रकाश चंद्र ने बताया कि मामले की जांच चल रही है। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। एक कर्मचारी के निलंबन का पत्र मिला है और चार कर्मचारियों का वेतन रोके जाने का मामला भी उनके संज्ञान में है।