पीलीभीत। देश में एक सींग वाले गैंडों के संरक्षण की दिशा में केंद्र सरकार ने नई रणनीति तैयार की है। इसका असर पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) में प्रस्तावित राइनो प्रोजेक्ट पर भी पड़ सकता है। नेपाल सीमा से सटे तराई क्षेत्र में गैंडों के अनुकूल प्राकृतिक वातावरण और पहले से मौजूद वन्यजीव परिस्थितियों को देखते हुए यहां गैंडों को बसाने की योजना पर दोबारा तेजी आने की उम्मीद है।
देश में एक सींग वाले गैंडों की संख्या बढ़कर करीब 3,323 हो गई है। इनमें सर्वाधिक गैंडे असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में हैं। बढ़ती आबादी के साथ गैंडों के लिए नए और सुरक्षित प्राकृतिक आवास विकसित करने की जरूरत भी महसूस की जा रही है। इसी को देखते हुए केंद्र सरकार ने संरक्षण और पुनर्वास की रणनीति पर काम तेज किया है।
पीटीआर में पहले से प्रस्तावित है राइनो प्रोजेक्ट
पीलीभीत टाइगर रिजर्व में गैंडों को बसाने की योजना नई नहीं है। वर्ष 2021-22 में केंद्र सरकार ने पीटीआर में राइनो प्रोजेक्ट के लिए संकेत दिए थे। इसके बाद वन विभाग ने नेपाल सीमा से लगे क्षेत्र में गैंडों के अनुकूल स्थानों की तलाश शुरू की थी। वन्यजीव विशेषज्ञों और अधिकारियों की टीम ने संभावित इलाकों का सर्वे भी किया था। पीटीआर का जंगल नेपाल के शुक्ला फांटा सेंचुरी से जुड़ा हुआ है। दोनों क्षेत्रों के बीच वन्यजीवों का आवागमन होता रहता है। कई बार नेपाल से गैंडे भारतीय सीमा में प्रवेश कर पीटीआर के जंगलों तक पहुंच चुके हैं। इससे माना जाता है कि यहां का प्राकृतिक वातावरण गैंडों के लिए अनुकूल हो सकता है।
काजीरंगा में बढ़ी आबादी, नए ठिकानों की जरूरत
वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक देश में गैंडों की आबादी लगातार बढ़ी है। वर्ष 2025 की रिपोर्ट में वैश्विक स्तर पर गैंडों की संख्या करीब 26,700 बताई गई, जबकि एशिया में लगभग 4,075 गैंडे हैं। इनमें भारत में करीब 3,323 गैंडे पाए जाते हैं। अकेले काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में इनकी संख्या करीब 2,752 बताई गई है। काजीरंगा में गैंडों की बढ़ती संख्या के कारण नए प्राकृतिक आवास विकसित करने की आवश्यकता सामने आई है। ऐसे में उन क्षेत्रों पर ध्यान दिया जा रहा है, जहां पर्याप्त घास के मैदान, पानी और सुरक्षित जंगल उपलब्ध हों।
तराई का वातावरण गैंडों के लिए मुफीद
पीलीभीत के जंगलों में गैंडों के लिए जरूरी प्राकृतिक संसाधन मौजूद हैं। यहां घास के बड़े मैदान, दलदली क्षेत्र और पर्याप्त पानी उपलब्ध है। नेपाल सीमा से जुड़ा वन क्षेत्र भी इसकी उपयोगिता बढ़ाता है। पूर्व में नेपाल से आने वाले गैंडों का यहां लंबे समय तक रुकना भी इस संभावना को मजबूत करता है। हालांकि, राइनो प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारने से पहले सुरक्षा, पर्याप्त प्राकृतिक क्षेत्र और मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंकाओं का विस्तृत अध्ययन जरूरी होगा। विशेषज्ञों की रिपोर्ट और केंद्र की नई संरक्षण रणनीति के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय होने की उम्मीद है।
मार्च में भी हुआ था सर्वे
पीलीभीत टाइगर रिजर्व में राइनो प्रोजेक्ट को लेकर इसी वर्ष मार्च में केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की एक उच्चस्तरीय टीम ने दौरा किया था। टीम ने गैंडों के संभावित आवास, घास के मैदान, जलस्रोत और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया था। इसकी रिपोर्ट मंत्रालय को भेजी गई है। अब केंद्र की नई संरक्षण नीति के बाद पीटीआर के राइनो प्रोजेक्ट को फिर से गति मिलने की संभावना बढ़ गई है। अंतिम फैसला विशेषज्ञों की रिपोर्ट, वन क्षेत्र की क्षमता और सुरक्षा मानकों के आकलन के बाद लिया जाएगा।