बरेली। कचहरी के पास वकीलों के अस्थायी चैंबर और दूसरे अतिक्रमण पर चला नगर निगम का बुलडोजर अब तूल पकड़ गया है। कार्रवाई से नाराज वकील मंगलवार को ई-रिक्शा पर टूटी हुई कुर्सी रखकर कलेक्ट्रेट गेट पर पहुंच गए। टूटी कुर्सी को आगे रखकर अधिवक्ताओं ने नगर निगम की कार्रवाई के खिलाफ प्रदर्शन किया और जमकर नाराजगी जताई।
रात साढ़े दस बजे पहुंची थी निगम की टीम
बृहस्पतिवार रात करीब साढ़े दस बजे नगर निगम के दो बुलडोजर कचहरी के पास पहुंचे थे। पुलिस की मौजूदगी में रास्ता और बिजली आपूर्ति बंद कराकर कार्रवाई शुरू की गई। करीब डेढ़ घंटे तक चले अभियान में सड़क किनारे बने वकीलों के अस्थायी चैंबर और अन्य कब्जे ढहा दिए गए। कार्रवाई इतनी रात में हुई कि जब तक कई वकीलों को इसकी जानकारी हुई, तब तक बुलडोजर लौट चुके थे।
टूटी कुर्सी लेकर सड़क पर उतरे वकील
गुरुवार रात की कार्रवाई का गुस्सा चार दिन बाद कलेक्ट्रेट गेट पर दिखाई दिया। वकीलों ने ई-रिक्शा पर कार्रवाई के दौरान टूटी कुर्सी रखी और उसे लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे। कुर्सी को सामने रखकर वकीलों ने विरोध जताया। प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं का कहना था कि चैंबर हटाने से पहले उन्हें उचित मौका दिया जाना चाहिए था।
चैंबर तोड़ दिए, अब जवाब कौन देगा
वकीलों का आरोप है कि अचानक बुलडोजर चलाने से उनके कामकाज पर असर पड़ा है। उनका कहना था कि अगर अतिक्रमण हटाना ही था तो पहले बातचीत कर रास्ता निकाला जा सकता था। वकीलों ने सवाल उठाया कि कचहरी परिसर में काम करने वाले अधिवक्ताओं के लिए वैकल्पिक व्यवस्था किए बिना चैंबर तोड़ना कितना उचित है।
टूटी कुर्सी ने खींचा सबका ध्यान
कलेक्ट्रेट गेट पर ई-रिक्शा पर रखी टूटी कुर्सी प्रदर्शन का सबसे बड़ा प्रतीक बन गई। राह चलते लोग भी इसे देखकर रुक गए। वकीलों ने इसी कुर्सी के जरिए रात की कार्रवाई का विरोध दर्ज कराया। उनका कहना था कि यह सिर्फ एक कुर्सी नहीं, बल्कि बुलडोजर कार्रवाई से हुए नुकसान की तस्वीर है।
पूर्व बार अध्यक्ष ने भी उठाए सवाल
बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के पूर्व अध्यक्ष शिरीष कुमार मेहरोत्रा ने भी कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि वैकल्पिक व्यवस्था होने तक ध्वस्तीकरण को टाला जा सकता था। उन्होंने ‘ऑफिसर ऑफ द कोर्ट’ की परिकल्पना का जिक्र करते हुए कहा कि मौजूदा घटनाक्रम में यह सिर्फ जुमला नजर आ रहा है।
निगम बोला—जाम की वजह बन रहे थे कब्जे
नगर निगम की ओर से कहा गया है कि कचहरी के पास सड़क किनारे किए गए अतिक्रमण के कारण लोगों को आवागमन में परेशानी हो रही थी और जाम की स्थिति बनती थी। सहायक नगर आयुक्त मयंक के मुताबिक इसी वजह से सड़क किनारे के अतिक्रमण को हटाया गया। वहीं पुलिस का कहना है कि कार्रवाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए टीम मौके पर मौजूद थी।
बुलडोजर के बाद अब आमने-सामने वकील और निगम
कचहरी के पास अतिक्रमण हटाने से शुरू हुआ मामला अब विरोध-प्रदर्शन तक पहुंच गया है। एक तरफ नगर निगम सड़क को अतिक्रमण मुक्त कराने की बात कह रहा है, तो दूसरी तरफ वकील रात में हुई कार्रवाई और चैंबर तोड़े जाने को लेकर नाराज हैं। कलेक्ट्रेट गेट पर टूटी कुर्सी के साथ हुआ प्रदर्शन इस विवाद के आगे बढ़ने का संकेत माना जा रहा है।