तेहरान। पश्चिम एशिया की सियासत एक बार फिर उबाल पर है। मोजतबा खामेनेई ने परमाणु हथियारों और मिसाइल कार्यक्रम को लेकर किसी भी तरह के समझौते से साफ इनकार कर दिया है। उन्होंने दो टूक कहा कि ईरान अपनी सैन्य और परमाणु क्षमताओं को “राष्ट्रीय संपत्ति” मानता है और इन्हें किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं होने देगा। उनके इस बयान ने अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए एक सख्त संदेश दे दिया है कि ईरान पीछे हटने के मूड में नहीं है।
‘खाड़ी का भविष्य अमेरिका के बिना’—ईरान का बड़ा दावा
मोजतबा खामेनेई ने अपने संदेश में साफ कहा कि फारस की खाड़ी क्षेत्र में एक नया दौर शुरू हो रहा है, जिसमें बाहरी ताकतों—खासकर अमेरिका—की भूमिका खत्म होती नजर आएगी। उन्होंने कहा कि यह इलाका अब अपने लोगों के हित में खुद फैसले करेगा और बाहरी हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उनका यह बयान सीधे तौर पर अमेरिका की दशकों पुरानी सैन्य मौजूदगी को चुनौती देता है। खामेनेई ने यहां तक कह दिया कि “अमेरिकियों का एकमात्र स्थान खाड़ी के पानी की गहराई में है”, जो एक तीखा और प्रतीकात्मक हमला माना जा रहा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर सख्त रुख, कोई समझौता नहीं
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान का रुख पहले से ही सख्त रहा है, लेकिन इस बार बयान और ज्यादा आक्रामक है। खामेनेई ने साफ कर दिया कि इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर किसी भी तरह का समझौता नहीं होगा। यह जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में ईरान का यह बयान सिर्फ क्षेत्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी बड़ा संकेत है।
‘नेशनल पर्शियन गल्फ डे’ पर दिया गया संदेश
यह बयान इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज एजेंसी के जरिए ‘नेशनल पर्शियन गल्फ डे’ के मौके पर जारी किया गया। यह दिन 1622 में पुर्तगाली सेना को खाड़ी क्षेत्र से बाहर निकालने की ऐतिहासिक घटना की याद में मनाया जाता है। खामेनेई ने इस मौके पर ईरानी जनता की जमकर तारीफ करते हुए कहा कि हालिया संघर्ष के दौरान लोगों ने अपने देश की ताकत, सतर्कता और साहस को करीब से देखा है। उनके मुताबिक, यह एक ऐसा मोड़ है जहां से क्षेत्र का इतिहास बदल सकता है।
ईरानी जनता और सेना की ‘दृढ़ता’ का जिक्र
खामेनेई ने कहा कि फरवरी के अंत से शुरू हुए अमेरिका-इजरायल के दबाव और संघर्ष के बीच ईरानी जनता ने असाधारण धैर्य और हिम्मत दिखाई है। उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान की सैन्य ताकत और मिसाइल क्षमता ने दुश्मनों को स्पष्ट संदेश दे दिया है कि देश अपनी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब क्षेत्र में लगातार सैन्य गतिविधियां बढ़ रही हैं और खाड़ी में जहाजों की आवाजाही पर भी असर पड़ा है।
खाड़ी देशों को ‘बाहरी प्रभाव’ से मुक्त करने की बात
मोजतबा खामेनेई ने यह भी कहा कि फारस की खाड़ी का भविष्य तभी उज्ज्वल होगा, जब इसे बाहरी ताकतों के प्रभाव से मुक्त किया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि क्षेत्रीय देश मिलकर अपने साझा हितों के लिए काम करेंगे और इससे आर्थिक विकास, सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा। यह बयान उन खाड़ी देशों के लिए भी संकेत माना जा रहा है, जो लंबे समय से अमेरिका के साथ रणनीतिक साझेदारी में हैं।
अमेरिका पर सीधा हमला, ‘लालच और द्वेष’ का आरोप
खामेनेई ने अमेरिका पर निशाना साधते हुए कहा कि ईरान खाड़ी क्षेत्र को विदेशी “लालच और द्वेष” से मुक्त करेगा। उनके मुताबिक, यह क्षेत्र किसी बाहरी शक्ति का खेल का मैदान नहीं बन सकता और यहां के देशों को अपनी संप्रभुता बनाए रखने का पूरा अधिकार है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और उसके सहयोगी खाड़ी में अपनी सैन्य मौजूदगी बनाए हुए हैं।
नेतृत्व में बदलाव के बाद पहला बड़ा संकेत
अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद मोजतबा खामेनेई ने देश की बागडोर संभाली है। उनके सार्वजनिक रूप से सामने न आने के बावजूद, उनके संदेश सरकारी टीवी और एजेंसियों के जरिए जारी किए जाते हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान उनके नेतृत्व की दिशा और रणनीति का पहला बड़ा संकेत है—जिसमें आक्रामक राष्ट्रवाद और सैन्य मजबूती को प्राथमिकता दी जा रही है।
बढ़ता तनाव और वैश्विक असर
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव पहले से ही चरम पर है। हालिया संघर्ष विराम के बावजूद शांति वार्ता को लेकर असमंजस बना हुआ है। खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक बाजारों पर भी दिखने लगा है—
- कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में उछाल
- समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर चिंता
- ऊर्जा आपूर्ति पर अनिश्चितता
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी तरह का व्यवधान आता है, तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
दुनिया की नजरें खाड़ी पर टिकीं
पश्चिम एशिया की इस ताजा बयानबाजी ने एक बार फिर वैश्विक राजनीति को गर्मा दिया है। ईरान का सख्त रुख और अमेरिका की रणनीतिक मौजूदगी—दोनों के बीच टकराव की आशंका बनी हुई है। अब सवाल यह है कि क्या यह बयान सिर्फ राजनीतिक संदेश है या आने वाले समय में किसी बड़े संघर्ष की भूमिका तैयार हो रही है। फिलहाल, दुनिया की नजरें खाड़ी क्षेत्र पर टिकी हैं, जहां हर बयान और हर कदम वैश्विक संतुलन को प्रभावित कर सकता है।