बरेली। नाथ नगरी के रूप में पहचान रखने वाले बरेली की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत अब शहर के प्रवेश द्वारों पर और भव्य रूप में दिखाई देगी। नाथ कॉरिडोर की थीम को विस्तार देते हुए बीडीए नैनीताल रोड पर सोमनाथ द्वार और पीलीभीत रोड पर विश्वनाथ द्वार का निर्माण कराएगा। भगवान शिव की प्रतिमा, त्रिशूल, विशाल पत्थर का स्थापत्य और आधुनिक फसाड लाइटिंग दोनों द्वारों को खास बनाएगी।
नैनीताल रोड से बरेली में प्रवेश करने वालों का स्वागत अब सोमनाथ द्वार करेगा। इसका स्थापत्य भगवान शिव के प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में शामिल सोमनाथ की आध्यात्मिक और वास्तु परंपरा से प्रेरित होगा। भारतीय स्थापत्य की झलक के साथ आधुनिक डिजाइन का इस्तेमाल कर इसे नैनीताल रोड के प्रमुख लैंडमार्क के रूप में विकसित करने की योजना है। वहीं पीलीभीत रोड पर प्रस्तावित विश्वनाथ द्वार की डिजाइन काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग की सनातन आध्यात्मिक परंपरा से प्रेरित होगी। पीलीभीत की ओर से शहर में दाखिल होते ही यह द्वार नाथ नगरी की धार्मिक पहचान की पहली भव्य झलक पेश करेगा। बीडीए इसे इस मार्ग की विशिष्ट पहचान बनाने की तैयारी में है।
शिव प्रतिमा-त्रिशूल के साथ पत्थरों पर उभरेगी नाथ परंपरा
दोनों द्वारों की भव्यता उनके स्थापत्य में दिखाई देगी। पत्थर से तैयार होने वाली संरचना में भगवान शिव की आकर्षक प्रतिमा और त्रिशूल समेत अन्य पारंपरिक धार्मिक प्रतीकों को प्रमुख स्थान दिया जाएगा। भारतीय वास्तुकला और आधुनिक निर्माण तकनीक के मेल से दोनों द्वारों को ऐसा स्वरूप देने की तैयारी है, जो दूर से ही लोगों का ध्यान खींचे। सोमनाथ और विश्वनाथ द्वार की खूबसूरती रात में और निखरेगी। दोनों पर विशेष फसाड लाइटिंग लगाई जाएगी। रोशनी के जरिए शिव प्रतिमा, त्रिशूल और स्थापत्य के प्रमुख हिस्सों को उभारा जाएगा। इससे नैनीताल और पीलीभीत रोड के दोनों प्रवेश द्वार रात में भी दूर से चमकते नजर आएंगे।
चार द्वार पहले तैयार, अब दो और बढ़ाएंगे नाथ कॉरिडोर की शान
नाथ कॉरिडोर की थीम पर शहर के प्रमुख मार्गों पर पहले ही अवैधनाथ द्वार, अलखनाथ द्वार, त्रिवटीनाथ द्वार और केदारनाथ द्वार विकसित किए जा चुके हैं। अब सोमनाथ और विश्वनाथ द्वार बनने के बाद इस स्थापत्य श्रृंखला को नया विस्तार मिलेगा। शहर के अलग-अलग प्रवेश मार्गों को नाथ परंपरा से जोड़कर एक विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान देने की दिशा में इसे अहम कदम माना जा रहा है। बीडीए की योजना केवल विशाल प्रवेश द्वार खड़े करने तक सीमित नहीं है। दोनों प्रवेश मार्गों पर आसपास के हिस्से का सौंदर्यीकरण और लैंडस्केपिंग भी की जाएगी। इससे शहर में प्रवेश करने वाले मार्ग अधिक आकर्षक और व्यवस्थित दिखाई देंगे। कोशिश है कि प्रवेश करते ही लोगों को बरेली के बदलते शहरी स्वरूप का अहसास हो।
विरासत से आधुनिक विकास तक, बदलेगी बरेली की पहली तस्वीर
नाथ कॉरिडोर के जरिए बरेली की सदियों पुरानी नाथ परंपरा को आधुनिक शहरी विकास से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। प्रस्तावित दोनों द्वारों में धार्मिक आस्था, भारतीय वास्तुकला और आधुनिक सौंदर्यीकरण का संगम दिखाई देगा। इसका मकसद केवल सड़क की खूबसूरती बढ़ाना नहीं, बल्कि बरेली की सांस्कृतिक पहचान को स्थापत्य के जरिए मजबूत करना भी है। बीडीए उपाध्यक्ष सौम्या पांडेय ने बताया कि मुख्यमंत्री के विजन के अनुरूप नाथ कॉरिडोर की परिकल्पना को आगे बढ़ाते हुए बरेली की समृद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक शहरी विकास से जोड़ा जा रहा है। सोमनाथ और विश्वनाथ द्वार इसी प्रयास का हिस्सा हैं। इन्हें भव्य स्थापत्य और आधुनिक फसाड लाइटिंग के साथ विकसित किया जाएगा, ताकि ये शहर की सांस्कृतिक पहचान के प्रमुख प्रतीक बन सकें।
बरेली में कदम रखते ही दिखेगा नाथ नगरी का स्वरूप
मंडलायुक्त शंभू कुमार के निर्देशन और मार्गदर्शन में बीडीए इस परियोजना को आगे बढ़ा रहा है। प्राधिकरण का लक्ष्य है कि नैनीताल और पीलीभीत रोड से शहर में प्रवेश करने वाले लोगों को पहली नजर में ही बरेली की नाथ परंपरा, शिव आस्था, सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक विकास का संगम दिखाई दे। सोमनाथ और विश्वनाथ द्वार बनने के बाद शहर के दो प्रमुख प्रवेश मार्गों की तस्वीर पूरी तरह बदलने की उम्मीद है।