नई दिल्ली। अगर पर्याप्त नींद लेने और आराम करने के बाद भी दिनभर थकान, सुस्ती और शरीर में दर्द बना रहता है, तो इसे सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज न करें। यह क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम (Chronic Fatigue Syndrome-CFS) या मायालजिक एन्सेफेलोमायलाइटिस (ME/CFS) का संकेत हो सकता है। यह एक गंभीर और लंबे समय तक रहने वाली बीमारी है, जो व्यक्ति की शारीरिक और मानसिक क्षमता को प्रभावित करती है।

क्या है Chronic Fatigue Syndrome?

क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम ऐसी स्थिति है, जिसमें व्यक्ति को लगातार अत्यधिक थकान महसूस होती है। खास बात यह है कि आराम करने या पूरी नींद लेने के बाद भी यह थकान दूर नहीं होती। इससे रोजमर्रा के काम करना भी मुश्किल हो जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस बीमारी का सटीक कारण अभी तक स्पष्ट नहीं है, लेकिन कमजोर इम्यून सिस्टम, हार्मोनल असंतुलन, वायरल संक्रमण, आनुवंशिक कारण और लंबे समय तक मानसिक तनाव इसकी संभावित वजह माने जाते हैं।

ये हैं बीमारी के प्रमुख लक्षण

  • छह महीने या उससे अधिक समय तक लगातार थकान रहना।
  • पूरी नींद लेने के बाद भी तरोताजा महसूस न होना।
  • हल्का काम या सीढ़ियां चढ़ने के बाद भी अत्यधिक कमजोरी और शरीर दर्द होना।
  • ध्यान केंद्रित करने और याददाश्त में कमी आना, जिसे “ब्रेन फॉग” कहा जाता है।
  • लंबे समय तक खड़े रहने पर चक्कर आना या कमजोरी महसूस होना।
  • सिरदर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द की शिकायत रहना।

हल्की मेहनत के बाद भी बढ़ सकती है परेशानी

इस बीमारी की सबसे बड़ी पहचान पोस्ट-एक्सर्शनल मेलाइज (PEM) है। यानी हल्की शारीरिक या मानसिक गतिविधि के बाद भी मरीज की हालत पहले से ज्यादा खराब हो सकती है। कई मामलों में लक्षण 12 से 48 घंटे बाद तक बढ़ जाते हैं और कई दिनों तक बने रहते हैं।

कैसे करें बचाव?

विशेषज्ञों के अनुसार इस समस्या से बचने के लिए कुछ आसान उपाय अपनाए जा सकते हैं—

  • अत्यधिक शारीरिक और मानसिक तनाव से बचें।
  • संतुलित और पौष्टिक आहार लें।
  • शरीर में पानी की कमी न होने दें।
  • वायरल संक्रमण होने पर पर्याप्त आराम करें।
  • नियमित योग, ध्यान और मेडिटेशन करें।
  • रोजाना 7 से 8 घंटे की अच्छी नींद लें।
  • कैफीन और अल्कोहल का अधिक सेवन करने से बचें।

कब डॉक्टर से मिलें?

अगर लगातार कई महीनों तक थकान बनी रहे, आराम के बाद भी कमजोरी दूर न हो, याददाश्त कमजोर होने लगे या हल्की गतिविधि के बाद भी शरीर पूरी तरह टूटने लगे, तो इसे सामान्य कमजोरी समझने की गलती न करें। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए, ताकि समय रहते सही जांच और इलाज शुरू किया जा सके।

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