bareillyपीड़ित को वापस कराई रकम।

बरेली। व्हाट्सएप पर आया एक मैसेज, ट्रेडिंग से मोटी कमाई का सपना और फिर देखते ही देखते खाते से 10.50 लाख रुपये साइबर ठगों के जाल में चले गए। मोहित रस्तोगी के साथ हुई इस ठगी में बरेली साइबर क्राइम पुलिस ने बड़ी रकम बचाने में कामयाबी हासिल की है। करीब दस महीने तक खातों के बीच घूमी रकम का पीछा करते हुए पुलिस ने 8,62,365 रुपये वापस मोहित के खाते में पहुंचा दिए हैं। जांच की कड़ियां पश्चिम बंगाल तक पहुंची हैं, जहां के दो लोगों की भूमिका सामने आई है।

कोतवाली के बिहारीपुर निवासी मोहित रस्तोगी के मोबाइल पर अज्ञात नंबर से व्हाट्सएप मैसेज आया था। सामने वाले ने ट्रेडिंग एप के जरिए निवेश पर अच्छा मुनाफा मिलने का भरोसा दिलाया। बातचीत बढ़ी तो मोहित को एक ट्रेडिंग ग्रुप में जोड़ लिया गया। वहां कम समय में मोटी कमाई का ऐसा सब्जबाग दिखाया गया कि वह ठगों के जाल में फंसते चले गए। ट्रेडिंग और निवेश के नाम पर मोहित से अलग-अलग बार में रुपये जमा कराए गए। जब तक उन्हें ठगी का अहसास हुआ, 10.50 लाख रुपये जा चुके थे। रकम निकालने और वापस पाने की कोशिश नाकाम हुई तो पूरा खेल समझ में आया। इसके बाद 17 अक्टूबर 2025 को मोहित ने साइबर क्राइम थाने पहुंचकर शिकायत की। पुलिस ने धोखाधड़ी और आईटी एक्ट की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी।

खाते से खाते घूमते रहे रुपये, पुलिस ने पकड़ी मनी ट्रेल

साइबर ठगों ने रकम को एक जगह रखने के बजाय अलग-अलग खातों और माध्यमों से आगे भेज दिया था। साइबर पुलिस ने बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन की परतें खोलनी शुरू कीं। बैंकों और साइबर पोर्टल से मिले रिकॉर्ड को जोड़ते हुए पुलिस उस रास्ते तक पहुंची, जहां से ठगी की रकम आगे ट्रांसफर की गई थी। लगातार कार्रवाई के बाद पुलिस ने 8 लाख 62 हजार 365 रुपये ट्रेस कर उन्हें मोहित रस्तोगी के खाते में वापस करा दिया। हालांकि पूरी रकम अभी नहीं मिल सकी है। जांच में सामने आया कि बाकी रुपये छोटे-छोटे हिस्सों में गेमिंग एप से जुड़े लेनदेन में भेजे गए हैं। पुलिस अब इस रकम को ट्रेस कर वापस कराने में जुटी है।

बंगाल तक पहुंची जांच, दो लोगों की भूमिका आई सामने

मनी ट्रेल की कड़ियां जोड़ते-जोड़ते पुलिस पश्चिम बंगाल तक पहुंच गई। जांच में वहां रहने वाले दो लोगों की भूमिका सामने आई है। पुलिस उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ा रही है और मामले में न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल करने की तैयारी है। पूरे मामले की विवेचना प्रभारी निरीक्षक धनंजय पांडेय ने की। कांस्टेबल विजय कुमार भी टीम में शामिल रहे। साइबर पुलिस अब बची हुई रकम को वापस कराने के साथ ही इस नेटवर्क से जुड़े अन्य खातों और लोगों की भूमिका भी खंगाल रही है।

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