बरेली। फर्जी आईएएस बनकर सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों को ठगने वाली विप्रा शर्मा की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। अब जनपद न्यायालय से सेवानिवृत्त चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ने अपने दो बेटों की सरकारी नौकरी लगवाने के नाम पर विप्रा शर्मा और उसके अफसर पिता वीरेंद्र कुमार शर्मा पर 10 लाख रुपये ठगने का आरोप लगाया है। पीड़ित का आरोप है कि दोनों बेटों के चार फर्जी नियुक्ति पत्र भेजकर उसे लंबे समय तक गुमराह किया गया। एसएसपी अनुराग आर्य के आदेश पर बारादरी पुलिस ने विप्रा और उसके पिता के खिलाफ एक और एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
प्रेमनगर के अशोक विहार, संजय नगर निवासी राधेश्याम जनपद न्यायालय बरेली में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी थे और अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं। राधेश्याम के मुताबिक नौकरी के दौरान उनकी जान-पहचान सिंचाई विभाग के तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारी वीरेंद्र कुमार शर्मा से थी। आरोप है कि वीरेंद्र ने अपनी बेटी डॉ. विप्रा शर्मा को सचिवालय लखनऊ में आईएएस अधिकारी बताते हुए दावा किया कि वह उनके बेरोजगार बेटों की सरकारी नौकरी लगवा सकती है। इसके बदले 10 लाख रुपये मांगे गए।
सात लाख कैश, तीन लाख ऑनलाइन किये ट्रांसफर
आरोप है कि अगस्त 2022 में वीरेंद्र ने राधेश्याम को उनके बेटों के शैक्षिक प्रमाणपत्र लेकर ग्रेटर ग्रीन पार्क स्थित अपने आवास पर बुलाया। वहां विप्रा शर्मा भी मौजूद थी। राधेश्याम ने भरोसा कर सात लाख रुपये नकद, बेटों के शैक्षिक प्रमाणपत्रों की प्रतियां और फोटो विप्रा को दे दिए। इसके बाद 29 अगस्त 2022 को उनके बेटे प्रवीन कुमार और 20 सितंबर 2022 को अमित कुमार के नाम नियुक्ति पत्र घर पहुंचे। नियुक्ति पत्र आने के बाद तीन लाख रुपये और मांगे गए। राधेश्याम का आरोप है कि उन्होंने अपने मित्र के माध्यम से 20, 21 और 22 सितंबर 2022 को अलग-अलग ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के जरिए विप्रा शर्मा के खाते में कुल तीन लाख रुपये ट्रांसफर करा दिए।
एक साल बाद फिर आए नियुक्ति पत्र, ज्वाइनिंग पर निकले फर्जी
राधेश्याम के मुताबिक करीब एक साल बाद 4 अक्टूबर 2023 को उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के नाम से दोनों बेटों के लिए फिर नियुक्ति पत्र पहुंचे। वह दोनों बेटों को लेकर पत्रों में दिए गए ज्वाइनिंग स्थल पर पहुंचे तो वहां नियुक्ति पत्रों को फर्जी बताते हुए ज्वाइन कराने से इनकार कर दिया गया। राधेश्याम ने विप्रा से शिकायत की तो उसने कहा कि नियुक्ति पत्र आयोग से ही जारी हुए हैं। इसके बाद 30 अक्टूबर 2023 को राधेश्याम खुद उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग लखनऊ पहुंचे। आरोप है कि वहां कर्मचारियों ने पत्रों को फर्जी और संदिग्ध बताते हुए कहा कि आयोग इस तरह नियुक्ति पत्र जारी नहीं करता।
रुपये मांगे तो दो लाख लौटाए, आठ लाख पर धमकी का आरोप
फर्जीवाड़े का पता चलने के बाद राधेश्याम ने विप्रा और उसके पिता से अपने रुपये वापस मांगे। आरोप है कि दोनों ने दो लाख रुपये लौटा दिए, लेकिन बाकी आठ लाख रुपये नहीं दिए। लगातार रुपये मांगने और पुलिस में शिकायत की बात कहने पर उन्हें जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप है। जून 2026 में वह दोबारा ग्रेटर ग्रीन पार्क स्थित आरोपियों के घर पहुंचे तो वहां ताला लगा मिला। आसपास के लोगों से उन्हें जानकारी हुई कि विप्रा शर्मा पर फर्जी आईएएस बनकर नौकरी दिलाने के नाम पर कई लोगों से ठगी करने के आरोप लगे हैं और पुलिस उसे जेल भेज चुकी है, जबकि उसके पिता वीरेंद्र कुमार शर्मा फरार बताए जा रहे हैं। एसएसपी अनुराग आर्य के आदेश पर बारादरी थाने में विप्रा शर्मा और उसके पिता वीरेंद्र कुमार शर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
30 से अधिक मामले दर्ज, गैंगस्टर लगाने की तैयारी
राधेश्याम की हालिया रिपोर्ट के बाद बारादरी व अन्य थानों में कुल 30 से अधिक रिपोर्ट विप्रा शर्मा और उसके गिरोह के खिलाफ दर्ज हो चुकी है। अब भी उसके खिलाफ कई शिकायतें कोर्ट में विचाराधीन हैं तो कई थाना स्तर पर जांच में लंबित हैं। चूंकि प्रशासनिक अधिकारियों के फोटो लगाकर भी विप्रा ने जनता को धोखा दिया तो डीएम ने भी एसएसपी से इस गिरोह के खिलाफ अधिकतम कार्रवाई करने के लिए कहा है। अब गिरोह के खिलाफ गैंगस्टर व अन्य विधिक कार्रवाई की तैयारी चल रही है।