बरेली। आईएमए ऑडिटोरियम शनिवार रात मोहब्बत, एहसास और अल्फाज के रंग में रंगा नजर आया। बरेली लिटरेचर फाउंडेशन और अहाना के संयुक्त तत्वावधान में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) बरेली के सहयोग से ‘इश्क नहीं आसान’ मुशायरा एवं कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। शहर के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे साहित्य और शायरी प्रेमियों ने देर रात तक कार्यक्रम का आनंद लिया। मंच से जब शायरों और कवियों ने मोहब्बत और जिंदगी से जुड़ी रचनाएं सुनाईं तो सभागार बार-बार तालियों से गूंज उठा।
मोहब्बत से जिंदगी तक, हर एहसास को मिले अल्फाज
कार्यक्रम में मोहब्बत के अलग-अलग रंग देखने को मिले। किसी शायर ने इश्क की खूबसूरती को अपने शब्दों में उतारा तो किसी ने जुदाई और रिश्तों के एहसास को शेरों में पिरोया। कवियों ने जिंदगी के अनुभवों और समाज से जुड़े विषयों को भी अपनी रचनाओं में जगह दी। शेरो-शायरी और कविताओं की एक के बाद एक प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को देर तक बांधे रखा। कई रचनाओं पर श्रोताओं ने तालियां बजाकर कवियों और शायरों का उत्साह बढ़ाया।
एक के बाद एक प्रस्तुतियों से गूंजता रहा सभागार
मुशायरे और कवि सम्मेलन में डॉ. उर्वशी अग्रवाल, नवीन जोशी, माधव नूर, फैज खलीलाबादी, जहाज देहबंदी, एडवोकेट माध्यम सक्सेना, पीयूष अग्निहोत्री, तारुण्य ताडिच, पिंटू यादव, उमर खान, मुस्तकीम मजीद, अभिषेक अग्निहोत्री और हुसैन ताजब समेत कई रचनाकारों ने अपनी प्रस्तुतियां दीं। किसी की शायरी ने श्रोताओं को मुस्कुराने पर मजबूर किया तो किसी की गंभीर रचना ने सोचने के लिए विवश किया। मोहब्बत और रिश्तों पर पेश किए गए शेरों को खास तौर पर सराहना मिली।
साहित्य से नई पीढ़ी को जोड़ने की कोशिश
कार्यक्रम के आयोजन में अहाना की संस्थापक उन्नति बधवा शर्मा और बरेली लिटरेचर फाउंडेशन के संस्थापक अंकुर रस्तोगी की विशेष भूमिका रही। आयोजकों ने कहा कि इस तरह के आयोजनों का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि साहित्य, कविता और शायरी के प्रति लोगों की रुचि बढ़ाना भी है। खासकर नई पीढ़ी को साहित्यिक गतिविधियों से जोड़ने के लिए आगे भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
देर रात तक शायरी में डूबे रहे श्रोता
कार्यक्रम जैसे-जैसे आगे बढ़ा, श्रोताओं का उत्साह भी बढ़ता गया। मंच से पेश किए गए इश्क, रिश्तों और जिंदगी से जुड़े शेरों पर कभी वाह-वाह सुनाई दी तो कभी तालियों की गड़गड़ाहट। देर रात तक चले इस साहित्यिक आयोजन ने आईएमए सभागार में मोहब्बत और शायरी का ऐसा रंग जमाया कि श्रोता अंत तक अपनी सीटों पर जमे रहे।