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बरेली। गेहूं की बुवाई से पहले किसानों को नकली खाद बेचने के कथित खेल का खुलासा हुआ है। बुखारा मोड़ के पास करेली रोड स्थित एक फर्टिलाइजर फैक्ट्री पर कृषि विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने गुरुवार देर शाम छापा मारा। यहां बड़ी मात्रा में खाद के साथ मिट्टी, कोयला और सरकारी खाद की बोरियां बरामद हुईं। टीम ने खाद और कच्चे माल के नमूने लेकर जांच के लिए सील कर दिए हैं।

गोपनीय शिकायत के आधार पर जिला कृषि अधिकारी रितुषा तिवारी और सीओ प्रथम पुलिस बल के साथ फैक्ट्री पहुंचे। करीब दो घंटे तक परिसर की जांच की गई। इस दौरान कई स्थानों पर मिट्टी के ढेर और बोरियों में कोयला मिला। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई कि मिट्टी और कोयले का इस्तेमाल मिलावटी डीएपी तैयार करने में किया जा रहा था।

सरकारी खाद की बोरियां मिलने से बढ़ा शक

जांच टीम को फैक्ट्री परिसर में यूरिया और डीएपी समेत बड़ी मात्रा में खाद का स्टॉक मिला। सरकारी खाद की बोरियां भी बरामद होने का दावा किया गया है। अधिकारियों ने इस बात की जांच शुरू कर दी है कि निजी फैक्ट्री तक सरकारी खाद की बोरियां कैसे पहुंचीं। अधिकारियों के मुताबिक फैक्ट्री प्रबंधन मौके पर मौजूद खाद के स्टॉक से संबंधित संतोषजनक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। फॉरेंसिक लैब वैन की मदद से खाद, मिट्टी और अन्य कच्चे माल के नमूने लेकर सील किए गए हैं। प्रयोगशाला की रिपोर्ट से साफ होगा कि खाद में किस स्तर तक और किन पदार्थों की मिलावट की गई थी।

250 रुपये में तैयार कर 1400 में बेचने का दावा

पुलिस ने फैक्ट्री से दो लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पूछताछ में कर्मचारियों ने दावा किया कि नकली खाद की एक बोरी तैयार करने में करीब 250 रुपये खर्च होते थे और इसे असली डीएपी बताकर करीब 1400 रुपये प्रति बोरी के हिसाब से बाजार में बेचा जाता था। पुलिस और कृषि विभाग इस दावे की भी जांच कर रहे हैं।

विभागीय कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में

छापेमारी के दौरान कृषि विभाग के कुछ कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल उठे। कुछ कर्मचारियों ने फैक्ट्री के पास लाइसेंस होने की बात कही, जिस पर पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि लाइसेंस होने से मिलावट या किसानों से धोखाधड़ी की अनुमति नहीं मिलती। निजी परिसर में सरकारी खाद की बोरियां मिलने के मामले की अलग से जांच की जाएगी। उपनिदेशक कृषि ओपी मिश्र के मुताबिक करेली रोड स्थित फैक्ट्री में नकली खाद बनाए जाने की शिकायत मिली थी। इसी आधार पर छापेमारी की गई। मौके से बड़ी मात्रा में स्टॉक मिला है और सभी जरूरी नमूने ले लिए गए हैं। फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट और संयुक्त जांच आख्या मिलने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई करते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी।

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