बरेली/बदायूं। इस्लामनगर थाने में बरेली के कथित अफीम तस्करों को पकड़ने और आठ लाख रुपये लेकर छोड़ने के आरोपों ने पुलिस महकमे में खलबली मचा दी है। एसएसपी अंकिता शर्मा ने एक सिपाही को लाइन हाजिर करते हुए तीन सिपाहियों को थाने से हटा दिया है। मामले में एसएसपी और डीआईजी स्तर से अलग-अलग जांच शुरू कराई गई है।
तीन सिपाहियों के थाने बदले, एक लाइन हाजिर
एसएसपी ने इस्लामनगर थाने में तैनात सिपाही काले सिंह को मुजरिया, कपिल कुमार को हजरतपुर और अनुज चौधरी को फैजगंज बेहटा थाने भेज दिया है। डकैती के एक मामले के बाद पुलिस लाइन से इस्लामनगर भेजे गए सिपाही रितिक को दोबारा लाइन में बुला लिया गया है। कार्रवाई के बाद पुलिसकर्मियों की भूमिका और कथित सौदेबाजी को लेकर विभाग में चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि आरोपों की विस्तृत जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति सामने आएगी।
सीओ से हटाकर एसपी सिटी को दी जांच
शुरुआत में मामले की जांच सीओ बिल्सी आलोक सिद्धू को सौंपी गई थी। इस्लामनगर थाना सीओ बिल्सी के ही क्षेत्राधिकार में आने के कारण जांच की निष्पक्षता और प्रासंगिकता पर सवाल उठ रहे थे। इसके बाद एसएसपी ने जांच सीओ से हटाकर एसपी सिटी अभिषेक कुमार सिंह को सौंप दी। एसपी सिटी अब तस्करों को पकड़े जाने, उन्हें कथित रूप से छोड़ने, आठ लाख रुपये की सौदेबाजी और संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका की विस्तृत जांच करेंगे।
प्रारंभिक जांच में पुष्टि नहीं, फिर भी मामला गंभीर
एसएसपी अंकिता शर्मा के अनुसार, प्रारंभिक जांच में आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है। मामला गंभीर होने के कारण एसपी सिटी को विस्तृत जांच देकर जल्द रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट के आधार पर आगे की विभागीय कार्रवाई तय की जाएगी।
डीआईजी ने पीलीभीत एएसपी को सौंपी अलग जांच
डीआईजी अजय कुमार साहनी ने भी प्रकरण का संज्ञान लेते हुए अलग से उच्चस्तरीय जांच बैठा दी है। निष्पक्षता बनाए रखने के लिए जांच बरेली या बदायूं के किसी अधिकारी को देने के बजाय पीलीभीत की एएसपी नताशा गोयल को सौंपी गई है। डीआईजी ने बताया कि मामले को लेकर कई तरह के इनपुट मिले हैं। सभी आरोपों और उपलब्ध तथ्यों की जांच कर एएसपी से रिपोर्ट मांगी गई है। दो स्तरों पर जांच शुरू होने के बाद दोष साबित होने पर बड़ी कार्रवाई होना तय माना जा रहा है।