जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल डी.जी. मिश्रा ने रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया

बरेली से लिपुलेख तक रोमांच और राष्ट्रसेवा का सफर

बरेली/पिथौरागढ़, सितंबर। भारतीय सेना, रेनॉल्ट इंडिया और मीडिया पार्टनर ‘मैवरिक’ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कुमाऊं कार रैली मंगलवार को पिथौरागढ़ में संपन्न हो गई। 15 सितंबर को बरेली से उत्तर भारत एरिया के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल डी.जी. मिश्रा ने रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। करीब एक सप्ताह तक चली रैली ने कुमाऊं के दुर्गम सीमावर्ती इलाकों से गुजरते हुए रोमांच, साहस और राष्ट्रीय गौरव का संदेश दिया।

दुर्गम रास्तों से गुजरा काफिला

रैली का मार्ग पिथौरागढ़ से धारचूला, गुंजी, लिपुलेख, ओम पर्वत, कालापानी और आदि कैलाश तक पहुंचा। प्रतिभागियों ने चुनौतीपूर्ण पहाड़ी मार्गों को पार करते हुए वापस पिथौरागढ़ तक का सफर पूरा किया। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के बीच यह यात्रा कुमाऊं की प्राकृतिक सुंदरता और सीमांत क्षेत्र की जीवनशैली से रूबरू कराने वाली रही।

‘पंचशूल गनर्स’ समेत युवाओं की भागीदारी

रैली में 10 ‘पंचशूल गनर्स’ के साथ पूर्व सैनिक, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और उद्यमी शामिल हुए। यात्रा के दौरान दल ने सीमावर्ती क्षेत्रों के स्कूली बच्चों, पूर्व सैनिकों और स्थानीय ग्रामीणों से संवाद किया। खासतौर पर युवाओं को भारतीय सेना में करियर और देशसेवा के लिए प्रेरित करने पर जोर दिया गया।

सीमांत गांवों में देशसेवा का संदेश

रैली का उद्देश्य केवल रोमांचक सफर तक सीमित नहीं रहा। आयोजकों के अनुसार सीमावर्ती समुदायों में देशभक्ति की भावना मजबूत करने और युवाओं को सेना की वीरता, बलिदान और सेवा से परिचित कराने का प्रयास किया गया। स्थानीय लोगों से संवाद के जरिए सेना और सीमांत समुदायों के बीच जुड़ाव को भी मजबूत करने पर जोर दिया गया।

पर्यटन और रोजगार को बढ़ावा देने पर जोर

कुमाऊं के दुर्गम क्षेत्रों में पर्यटन की संभावनाओं को सामने लाना भी रैली का प्रमुख उद्देश्य रहा। आयोजकों ने बताया कि ऐसे अभियानों के जरिए सीमावर्ती इलाकों में पर्यटन, स्थानीय आजीविका और टिकाऊ विकास के नए अवसरों को बढ़ावा देने का प्रयास है। इसके साथ ही गांवों में वापस लौटने यानी रिवर्स माइग्रेशन को प्रोत्साहित करने पर भी जोर दिया गया।

‘वाइब्रेंट विलेज’ पहल से जोड़ा अभियान

रैली को केंद्र सरकार की ‘वाइब्रेंट विलेज’ पहल के उद्देश्यों से भी जोड़ा गया। इसका फोकस सीमावर्ती गांवों में विकास और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ वहां के लोगों को मुख्यधारा से जोड़ना रहा। कुमाऊं की संस्कृति, परंपरा और प्राकृतिक विरासत को देश के सामने लाने का भी प्रयास किया गया।

सिर्फ रैली नहीं, सीमांत भारत से जुड़ाव का संदेश

कुमाऊं कार रैली ने साहसिक यात्रा के साथ सीमावर्ती समुदायों से संवाद, पर्यटन संवर्धन और सेना के प्रति सम्मान का संदेश दिया। रैली के समापन के साथ यह संदेश भी सामने आया कि सीमावर्ती गांव केवल भौगोलिक सीमाएं नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा, संस्कृति और सामाजिक शक्ति के महत्वपूर्ण केंद्र हैं।

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