बरेली। मिशन शक्ति केंद्रों पर तैनात पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को पीड़ित-केंद्रित पुलिसिंग के लिए सात दिवसीय प्रशिक्षण दिया जा रहा है। पुलिस उप महानिरीक्षक, बरेली रेंज के निर्देशों और पुलिस अधीक्षक दक्षिणी के आदेश के अनुपालन में 14 सितंबर से पुलिस लाइंस स्थित मिशन शक्ति केंद्र में चल रहे प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत शुक्रवार को मनोचिकित्सक डॉ. मनाली साउ ने पुलिसकर्मियों को संवेदनशील पुलिसिंग के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी।
पीड़ित की मानसिक स्थिति समझकर करें व्यवहार
एसआरएमएस, बरेली की असिस्टेंट प्रोफेसर एवं मनोचिकित्सक डॉ. मनाली साउ ने प्रशिक्षण के दौरान बताया कि थाने या मिशन शक्ति केंद्र पर पीड़ित अथवा पीड़िता के पहुंचने पर पुलिसकर्मियों का व्यवहार सम्मानजनक, सहज और सहानुभूतिपूर्ण होना चाहिए। पीड़ित की मानसिक एवं भावनात्मक स्थिति को समझते हुए उससे बातचीत करना जरूरी है, ताकि वह बिना भय या संकोच के अपनी बात रख सके।
पूर्वधारणा से बचें, निजता रखें सुरक्षित
प्रशिक्षण में पुलिसकर्मियों को विशेष रूप से पीड़ित के प्रति किसी भी प्रकार की पूर्वधारणा बनाने से बचने की सलाह दी गई। उसकी पहचान, व्यक्तिगत जानकारी और मामले से जुड़ी संवेदनशील सूचनाओं की गोपनीयता बनाए रखने पर भी जोर दिया गया। बताया गया कि पुलिस की शुरुआती प्रतिक्रिया पीड़ित के भरोसे और आगे की कार्रवाई पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकती है।
धैर्य से सुनें पीड़ित की बात
डॉ. मनाली साउ ने पुलिसकर्मियों को पीड़ित की बात धैर्यपूर्वक सुनने, सुरक्षित एवं सहज वातावरण उपलब्ध कराने और ऐसे सवाल या व्यवहार न करने की जानकारी दी, जिससे पीड़ित को दोबारा मानसिक आघात पहुंचे। जरूरत के अनुसार उचित सहायता, परामर्श और विधिक कार्रवाई सुनिश्चित करने के पहलुओं पर भी प्रशिक्षण दिया गया।
सभी थानों की मिशन शक्ति टीम रही मौजूद
प्रशिक्षण कार्यक्रम में जनपद के सभी थानों के मिशन शक्ति प्रभारी और मिशन शक्ति टीम के अधिकारी-कर्मचारी शामिल रहे। सात दिवसीय प्रशिक्षण का उद्देश्य मिशन शक्ति केंद्रों पर आने वाले पीड़ितों को संवेदनशील, सम्मानजनक और पीड़ित-केंद्रित पुलिस सहायता उपलब्ध कराने के लिए पुलिसकर्मियों को व्यवहारिक एवं मनोवैज्ञानिक जानकारी देना है।