बरेली। बरेली विकास प्राधिकरण (BDA) के अधिकारियों और उनके सहयोगियों को बदनाम करने के लिए मृत अधिवक्ता के नाम का इस्तेमाल किए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। मुख्यमंत्री के जनसुनवाई पोर्टल पर अधिवक्ता सरदार निर्मल सिंह के नाम से गंभीर आरोपों वाली शिकायत भेजी गई, जबकि उनका निधन तीन सितंबर 2023 को ही हो चुका है। अधिवक्ता के बेटे जसप्रीत सिंह ने शपथपत्र देकर साफ किया है कि उनके पिता या परिवार के किसी सदस्य ने BDA के खिलाफ कोई शिकायत नहीं की। इसके बाद पूरे मामले के पीछे सक्रिय कथित सिंडिकेट को चिह्नित कर कानूनी कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है।
मृत अधिवक्ता के नाम से लगाए गंभीर आरोप
मुख्यमंत्री तक पहुंचाई गई शिकायत में BDA की कार्यप्रणाली, टेंडर प्रक्रिया, निर्माण कार्यों और कुछ अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। शिकायत को विश्वसनीय दिखाने के लिए एक अधिवक्ता के नाम का इस्तेमाल किया गया। प्रारंभिक पड़ताल में शिकायतकर्ता का मोबाइल नंबर और पता भी संदिग्ध पाया गया। आरोप है कि असली पहचान छिपाने और शिकायतकर्ता की मृत्यु की जानकारी सामने न आने देने के लिए पते में मामूली बदलाव किया गया। शिकायत में प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारियों, निजी स्टाफ, अभियंताओं और ठेकेदारों के बीच कथित गठजोड़ का आरोप लगाते हुए स्वतंत्र जांच की मांग की गई थी। करीब सात करोड़ रुपये के आरसीसी नाला निर्माण, भुगतान और तकनीकी जांच को लेकर भी सवाल उठाए गए थे। हालांकि, शिकायत भेजने वाले वास्तविक व्यक्ति की पहचान अभी प्रमाणित नहीं हुई है और आरोपों की आधिकारिक जांच बाकी है।
बेटे के शपथपत्र ने खोल दी फर्जी शिकायत की पोल
मृत अधिवक्ता के बेटे जसप्रीत सिंह ने 25 अगस्त 2026 को BDA उपाध्यक्ष के समक्ष दिए शपथपत्र में बताया कि उनके पिता सरदार निर्मल सिंह का निधन तीन सितंबर 2023 को हो गया था। इसके प्रमाण के रूप में मृत्यु प्रमाणपत्र और अपना आधार कार्ड भी प्रस्तुत किया गया।
शपथपत्र में उन्होंने स्पष्ट कहा कि उनके परिवार के किसी सदस्य ने BDA, उसके किसी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ कोई शिकायत नहीं की। उन्होंने एक अगस्त 2026 को उनके पिता के नाम से लिखे गए किसी भी पत्र से साफ इनकार किया है। बेटे ने कहा कि मृत पिता के नाम का दुरुपयोग परिवार के लिए बेहद पीड़ादायक और मानहानिकारक है। उन्होंने ऐसा करने वाले व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग करते हुए BDA को अपनी सहमति भी दी है।
शिकायत की तारीखों ने भी खड़े किए बड़े सवाल
सामने आए दस्तावेजों में तारीखों को लेकर भी गंभीर विरोधाभास है। कथित शिकायत को आठ सितंबर 2026 को मुख्यमंत्री को भेजा जाना बताया गया है, जबकि बेटे का शपथपत्र 25 अगस्त 2026 का है और उसमें एक अगस्त 2026 के कथित पत्र का उल्लेख किया गया है। आशंका है कि मृत अधिवक्ता के नाम से अलग-अलग तारीखों में एक से अधिक शिकायतें भेजी गईं अथवा पुरानी शिकायत को बाद में नए तरीके से प्रसारित किया गया। वास्तविक स्थिति पोर्टल की लॉग डिटेल, मोबाइल नंबर, आईपी एड्रेस और संलग्न दस्तावेजों की जांच से स्पष्ट होगी।
कार्रवाई से बौखलाए सिंडिकेट पर साजिश का आरोप
प्राधिकरण से जुड़े पक्ष का आरोप है कि BDA में लंबे समय से सक्रिय कुछ लोगों का कथित सिंडिकेट नई व्यवस्था में की गई सख्ती से बौखला गया है। अधिकारियों के आने के बाद संदिग्ध गतिविधियों, अनावश्यक हस्तक्षेप और कथित दबाव बनाने के प्रयासों पर रोक लगाई गई। इसी कारण अधिकारियों का मनोबल तोड़ने और उनकी छवि खराब करने के उद्देश्य से फर्जी नामों और दस्तावेजों के सहारे शिकायतें कराई जा रही हैं। यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि सिंडिकेट से जुड़े कुछ लोग विरोधी राजनीतिक विचारधारा रखते हैं और चुनिंदा अधिकारियों से संपर्क का लाभ उठाकर प्राधिकरण के भीतर अपना प्रभाव बनाए रखना चाहते हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
मोबाइल नंबर, आईपी एड्रेस और दस्तावेजों से खुलेगा राज
अब कथित शिकायत अपलोड करने वाले व्यक्ति की पहचान के लिए मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर दर्ज मोबाइल नंबर, ईमेल, आईपी एड्रेस और डिजिटल दस्तावेजों की जांच कराने की तैयारी है। जांच में मृत व्यक्ति की पहचान का जानबूझकर इस्तेमाल किए जाने की पुष्टि हुई तो जालसाजी, प्रतिरूपण, मानहानि और सूचना प्रौद्योगिकी कानून की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया जा सकता है।
सोशल मीडिया पर दुष्प्रचार करने वालों की बनेगी सूची
BDA और प्रदेश सरकार की छवि धूमिल करने के उद्देश्य से अपुष्ट आरोप प्रसारित करने वाले सोशल मीडिया अकाउंट और डिजिटल प्लेटफॉर्म भी चिह्नित किए जा रहे हैं। तथ्यहीन सामग्री प्रकाशित करने, फर्जी दस्तावेज प्रसारित करने और अधिकारियों पर निराधार आरोप लगाने वालों को कानूनी नोटिस भेजने तथा मानहानि की कार्रवाई करने पर विचार किया जा रहा है।
प्राधिकरण से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि किसी भी तथ्यात्मक शिकायत की नियमानुसार जांच कराई जाएगी, लेकिन मृत व्यक्ति के नाम से झूठी शिकायत कर दबाव बनाने और सरकारी व्यवस्था को बदनाम करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।