बरेली। जीएसटी में फर्जी फर्में खड़ी कर बिना माल की खरीद-बिक्री के करोड़ों रुपये की बिलिंग और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के खेल में एसआईटी-जीएसटी को बड़ी सफलता मिली है। भोजीपुरा पुलिस ने विजन ट्रेडर्स से जुड़े मामले में वांछित मुताहिर अली को गिरफ्तार किया है। जांच में फर्म के जरिए 2 करोड़ 41 लाख 32 हजार 710 रुपये की फर्जी ITC प्राप्त और हस्तांतरित किए जाने का मामला सामने आया है। पुलिस के मुताबिक आरोपी ने पूछताछ में फर्जी फर्मों के संचालन और इसके पीछे सक्रिय लोगों के संबंध में अहम जानकारियां दी हैं।
पते पर नहीं मिली फर्म, पोर्टल के आंकड़ों ने खोला खेल
राज्य कर विभाग खंड-05 की जांच में सर्वश्री विजन ट्रेडर्स अपने घोषित कारोबारी पते पर वास्तविक रूप से संचालित नहीं मिली। विभाग ने सर्वे, भौतिक सत्यापन, जीएसटी पोर्टल के डाटा और मिसमैच का विश्लेषण किया तो बिना वास्तविक माल की आपूर्ति के फर्जी चालान जारी कर ITC लेने और दूसरी फर्मों को हस्तांतरित करने के तथ्य सामने आए। मामले में 23 फरवरी 2026 को भोजीपुरा थाने में बीएनएस की धारा 318(4), 316(2), 338, 336(3) और 340(2) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। इसके बाद एसआईटी-जीएसटी ने नेटवर्क से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच शुरू की।
अभयपुर तिराहे पर पुलिस ने दबोचा
एसआईटी-जीएसटी की विवेचना के बीच आरोपी मुताहिर अली निवासी मोहल्ला सादात, जहानाबाद, पीलीभीत फरार चल रहा था। पुलिस के अनुसार एक सितंबर की रात सूचना मिली कि वह अभयपुर तिराहे पर कहीं जाने की फिराक में खड़ा है। भोजीपुरा पुलिस ने घेराबंदी कर रात करीब 9:40 बजे उसे गिरफ्तार कर लिया। उसके पास से मोटोरोला कंपनी का एक मोबाइल फोन बरामद हुआ है।
भाइयों के नाम पर खुलीं विजन ट्रेडर्स और मिनहा इंटरप्राइजेज
पुलिस पूछताछ में मुताहिर अली ने बताया कि उसकी मुलाकात वर्ष 2016 में मुरादाबाद निवासी मुबारक खां उर्फ उमेर से हुई थी। बाद में वह मुताहिर खां उर्फ उजैर और अख्तर रसूल के संपर्क में भी आया। आरोपी के मुताबिक उसके नाम से पहले MA Traders नाम की फर्म पंजीकृत थी। आरोप है कि इसके बाद उसके भाइयों के दस्तावेज लेकर दो और फर्में पंजीकृत कराई गईं। मुशफिक अली के नाम से Vision Traders और मुशाहिद अली के नाम से Minha Enterprises बनाई गई। इन फर्मों की यूजर आईडी, पासवर्ड और अन्य दस्तावेज दूसरे लोगों के पास रहने का दावा आरोपी ने किया है। जरूरत पड़ने पर OTP भी उपलब्ध कराया जाता था।
बिना कारोबार के करोड़ों की बिलिंग, नकद मिलता था हिस्सा
पुलिस का दावा है कि पूछताछ में आरोपी ने विजन ट्रेडर्स के नाम पर वास्तविक कारोबार और माल की आपूर्ति किए बिना करोड़ों रुपये की बिलिंग कर फर्जी ITC के लेन-देन की बात स्वीकार की है। इस नेटवर्क से मिलने वाली रकम अथवा कमीशन को आपस में बांटे जाने और उसे भी नकद हिस्सा मिलने की बात सामने आई है। एसआईटी अब फर्मों के बैंक खातों, फर्जी इनवॉइस, ITC ट्रांसफर और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। आरोपी को न्यायालय में पेश करने की कार्रवाई की जा रही है।