नई दिल्ली। राजधानी में ट्रैफिक चालान भरने के लिए वाहन चालकों को जल्द बड़ी सहूलियत मिल सकती है। ई-कोर्ट और लोक अदालत पर निर्भरता कम करने के लिए दिल्ली सरकार चालान जमा करने की सुविधा लोगों के घर के करीब पहुंचाने की तैयारी में है। इसके तहत दिल्ली के 13 जिलों के सभी 39 एसडीएम को ट्रैफिक चालान जमा कराने की शक्ति देने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। प्रस्ताव फिलहाल कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा गया है।
दो करोड़ से ज्यादा चालान पेंडिंग, सरकार ने बनाया नया प्लान
दिल्ली में लंबित ट्रैफिक चालानों की संख्या दो करोड़ से अधिक बताई जा रही है। बड़ी संख्या में चालान जमा नहीं होने से लगातार पेंडेंसी बढ़ रही है। बताया जा रहा है कि हर साल जारी होने वाले करीब 80 प्रतिशत चालान लंबित रह जाते हैं। इसी बोझ को कम करने के लिए सरकार ने एसडीएम कार्यालयों को भी चालान निपटाने की व्यवस्था से जोड़ने की योजना बनाई है।
SDM ऑफिस जाकर सीधे जमा करा सकेंगे चालान
प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद वाहन मालिक अपने संबंधित एसडीएम कार्यालय पहुंचकर चालान जमा करा सकेंगे। सभी 39 एसडीएम के अलावा परिवहन विभाग के कुछ अधिकारियों को भी यह अधिकार दिए जाने पर विचार किया जा रहा है। इससे वाहन चालकों को चालान निपटाने के लिए ई-कोर्ट या लोक अदालत की प्रक्रिया पर ही निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
बनेगा अलग पोर्टल, ट्रैफिक पुलिस के सिस्टम से होगा कनेक्ट
नई व्यवस्था के लिए विशेष ऑनलाइन पोर्टल तैयार करने की योजना है। इसे दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के पोर्टल से जोड़ा जाएगा। एसडीएम को अलग लॉगिन आईडी और पासवर्ड उपलब्ध कराया जाएगा, जिसके जरिए चालान की जानकारी देखकर भुगतान की प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी।
पैसा जमा होते ही सिस्टम से हट जाएगा चालान
वाहन मालिक द्वारा चालान जमा करते ही इसकी जानकारी ट्रैफिक पुलिस के सिस्टम में अपडेट हो जाएगी। भुगतान की पुष्टि के बाद संबंधित चालान पोर्टल पर लंबित सूची से हट जाएगा। इससे रिकॉर्ड अपडेट करने और चालान निस्तारण की प्रक्रिया भी तेज होने की उम्मीद है।
पहले कानून में बदलाव, फिर लागू होगी व्यवस्था
हालांकि नई व्यवस्था तुरंत लागू नहीं होगी। एसडीएम कार्यालयों को चालान जमा करने की शक्ति देने के लिए मोटर व्हीकल एक्ट से संबंधित प्रावधानों में जरूरी बदलाव की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। प्रस्तावित संशोधन को दिल्ली विधानसभा से मंजूरी मिलने के बाद निर्धारित छह महीने की अवधि में नई व्यवस्था लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। फिलहाल प्रस्ताव कैबिनेट की मंजूरी का इंतजार कर रहा है।