- कोडीन सिरप से बच्चों की मौत का आरोप, सरकार बोली– एक भी मौत नहीं, STF जांच में सपा नेता
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा में कोडीन सिरप मामले को लेकर मंगलवार को जबरदस्त राजनीतिक घमासान देखने को मिला। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जहां इस गंभीर मुद्दे पर सरकार की सख्त कार्रवाई का ब्योरा दिया, वहीं समाजवादी पार्टी पर तीखा और चुभने वाला हमला भी बोला। सीएम योगी का एक बयान— “आपका पढ़ाई-लिखाई से लेना-देना नहीं…”—सदन में ही नहीं, बल्कि पूरे राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया।
मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि कोडीन सिरप कोई सामान्य दवा नहीं, इसका सेवन केवल डॉक्टर की सलाह पर ही किया जा सकता है। खासतौर पर बच्चों के लिए यह बेहद संवेदनशील दवा है और बिना चिकित्सकीय परामर्श इसका उपयोग अपराध की श्रेणी में आता है। उन्होंने कहा कि खांसी होने पर भी लोग सिरप लेते हैं, लेकिन डॉक्टर की सलाह से। इसके बाद सीएम योगी ने सपा विधायकों पर तंज कसते हुए कहा कि चूंकि उनका पढ़ाई-लिखाई से कोई वास्ता नहीं है, इसलिए वे इस तरह की भ्रामक बातें करते रहते हैं।
कोडीन सिरप मामले में अब तक की कार्रवाई का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि 79 मुकदमे दर्ज, 225 आरोपियों को नामजद, 78 गिरफ्तारियां और 134 स्थानों पर छापेमारी की जा चुकी है। उन्होंने दावा किया कि जांच की गहराई में जाने पर बार-बार समाजवादी पार्टी से जुड़े लोगों के नाम सामने आ रहे हैं। सीएम योगी ने यहां तक कहा कि कहीं न कहीं इस पूरे नेटवर्क की डोर सपा से जुड़ी हुई दिखाई देती है।
मुख्यमंत्री ने यह भी बड़ा खुलासा किया कि इलीगल ट्रांजेक्शन सपा की लोहिया वाहिनी के एक पदाधिकारी के खाते से हुआ है। इस पूरे मामले की जांच STF कर रही है और इसे NDPS एक्ट के तहत दर्ज किया जाना चाहिए। उन्होंने दो टूक कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार इस लड़ाई को न केवल लड़ेगी, बल्कि जीतेगी भी। कोई भी अपराधी बख्शा नहीं जाएगा और समय आने पर बुलडोजर एक्शन की तैयारी भी पूरी है।
इससे पहले नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने सरकार को घेरते हुए आरोप लगाया कि कोडीन सिरप का जाल पूरे प्रदेश में फैला हुआ है। उन्होंने दावा किया कि WHO ने भी इस पर संज्ञान लिया है और इसके सेवन से सैकड़ों बच्चों की मौत हुई है, साथ ही हजारों करोड़ रुपये का अवैध कारोबार खड़ा हो गया। हालांकि, संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यूपी में कोडीन सिरप से एक भी मौत नहीं हुई है।
साफ है कि कोडीन सिरप मामला अब केवल स्वास्थ्य या कानून व्यवस्था का मुद्दा नहीं रह गया, बल्कि यह राजनीतिक टकराव का बड़ा अखाड़ा बन चुका है, जहां आने वाले दिनों में सियासी ताप और बढ़ने के आसार हैं।