बरेली। जमीन के नामांतरण में फर्जीवाड़े का आरोप लगाते हुए मंगलवार को एक महिला बहेड़ी तहसील में पानी की टंकी पर चढ़ गई। महिला ने वीडियो बनाकर कहा कि उसे न्याय दिलाया जाए, वरना मरने दिया जाए। उसका आरोप है कि पिता और दादी की मौत के बाद भी उनके नाम का इस्तेमाल कर जमीन दूसरे के नाम कर दी गई। महिला ने तहसीलदार पर मिलीभगत का आरोप लगाया है। एसडीएम और पुलिस के समझाने तथा निष्पक्ष जांच के आश्वासन के बाद करीब डेढ़ घंटे बाद वह नीचे उतरीं।
जयश्री के मुताबिक उनके भाई अंजनि की नवंबर 2016 में सड़क हादसे में मौत हो गई थी। इसके बाद जमुनिया निवासी उनके पिता वीरेंद्र कुमार की मानसिक स्थिति खराब हो गई। आरोप है कि 22 नवंबर 2017 को रेंज कॉलोनी भरतौल निवासी पोशाकी लाल और जाजूनगर निवासी गंगाधर उनके पिता को कार में बैठाकर ले गए और धोखे से वसीयत करा ली। जयश्री के अनुसार उनकी दादी इंद्रा देवी की मृत्यु 20 अक्टूबर 2024 को हो चुकी थी, जबकि पिता वीरेंद्र कुमार का निधन 7 दिसंबर 2025 को हुआ। उनका आरोप है कि इसके बावजूद जमीन के नामांतरण की प्रक्रिया में मृत लोगों से जुड़े दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया।
अप्रैल 2026 में चला नामांतरण का मामला
जयश्री का आरोप है कि पिता की मृत्यु के बाद 4 अप्रैल 2026 को उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 34 के तहत तहसीलदार न्यायालय में वाद संख्या 4022/26 दाखिल किया गया। इसके बाद गाटा संख्या 107 की जमीन भरतौल निवासी देवाश पुत्र देवेंद्र के नाम कर दी गई। पीड़िता का दावा है कि इस पूरी प्रक्रिया में पोशाकी लाल, गंगाधर और मीरा देवी ने कथित रूप से फर्जी दस्तावेज और अंगूठे लगाकर नामांतरण कराया। जयश्री का कहना है कि उसके पास पिता और दादी के मृत्यु प्रमाण पत्र के साथ तहसील के आदेश और संबंधित वाद की प्रति भी मौजूद है।
शिकायत की तो पूरे परिवार की लाश नहीं मिलेगी
जयश्री ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने जमीन के नामांतरण का विरोध किया तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई। उनका दावा है कि आरोपियों ने शिकायत करने पर पूरे परिवार को खत्म करने तक की धमकी दी। न्याय के लिए लगातार अधिकारियों के चक्कर लगाने के बाद भी सुनवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए मंगलवार को उन्होंने पानी की टंकी पर चढ़कर जान देने की चेतावनी दे दी। महिला के टंकी पर चढ़ने की सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस में खलबली मच गई। एसडीएम गोपाल शर्मा और पुलिस टीम मौके पर पहुंची। एसडीएम ने करीब 20 मिनट तक जयश्री को समझाया और मामले की निष्पक्ष जांच कराने के साथ दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई का भरोसा दिया। इसके बाद करीब डेढ़ घंटे बाद जयश्री टंकी से नीचे उतर आईं।
कार्यकाल के सभी नामांतरण की जांच की मांग
जयश्री ने बहेड़ी तहसीलदार भानु प्रताप पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि तहसीलदार की तैनाती के बाद तहसील में भ्रष्टाचार बढ़ा है। उन्होंने मांग की कि तहसीलदार के कार्यकाल में हुए विरासत और नामांतरण के सभी आदेशों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। हालांकि ये सभी आरोप पीड़िता के हैं और जांच में इनकी सत्यता स्पष्ट होनी बाकी है। इस संबंध में तहसीलदार भानु प्रताप से उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।
थाने में दी तहरीर, अब जांच पर टिकी निगाह
जयश्री ने पूरे मामले को लेकर बहेड़ी थानाध्यक्ष को भी तहरीर सौंपी है। प्रशासन ने निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया है। अब जांच में यह स्पष्ट होगा कि नामांतरण की प्रक्रिया में किन दस्तावेजों का इस्तेमाल हुआ, संबंधित आदेश किन आधारों पर पारित किया गया और महिला की ओर से लगाए गए फर्जीवाड़े व मिलीभगत के आरोपों में कितनी सच्चाई है।