आगरा। जीएसटी चोरी की सूचना मिलने के बावजूद कथित तौर पर कार्रवाई न करना तीन वाणिज्यकर अधिकारियों को भारी पड़ गया। उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) के आगरा सेक्टर ने तत्कालीन सचल दल प्रभारी समेत तीन जीएसटी अधिकारियों और एक ट्रांसपोर्टर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। आरोप है कि अधिकारियों ने ट्रांसपोर्टर से मिलीभगत कर करीब 42 लाख रुपये कीमत का माल बिना जांच के आगरा से बांद्रा टर्मिनल जाने दिया। विजिलेंस अब आरोपियों की संपत्तियों की भी जांच करेगी।

तीन GST अधिकारी और ट्रांसपोर्टर जांच के घेरे में

सतर्कता अधिष्ठान के निरीक्षक अशोक कुमार की ओर से 18 जुलाई 2026 को थाना सतर्कता अधिष्ठान आगरा में तहरीर दी गई। इसमें तत्कालीन सचल दल पंचम प्रभारी असिस्टेंट कमिश्नर संदीप कुमार सिंह, वाणिज्यकर अधिकारी देवेश पांडेय और सतीश चंद्र के साथ ट्रांसपोर्टर असलम कुरैशी पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। विजिलेंस का आरोप है कि जीएसटी चोरी की सूचना मिलने के बावजूद अधिकारियों ने माल की जांच नहीं की और ट्रांसपोर्टर को अनुचित लाभ पहुंचाया।

फोन पर मिलती रही सूचना, फिर भी निकल गया माल

मामले की शुरुआत वर्ष 2022 में हुई थी। शिकायतकर्ता रवि गांधी ने 29 सितंबर और सात अक्टूबर 2022 को अधिकारियों को सूचना दी थी कि आगरा फोर्ट रेलवे स्टेशन पर मालवाहक रेलवे बोगी (वीपी) में जीएसटी चोरी का माल लोड किया जा रहा है, जिसे अवध एक्सप्रेस से बांद्रा टर्मिनल भेजा जाना था। शिकायत के बाद सचल दल की टीम स्टेशन पहुंची। विजिलेंस की तहरीर के मुताबिक, अधिकारियों को मौके पर बोगी खाली होने की जानकारी दी गई, जबकि रेलवे रिकॉर्ड में वीपी नंबर 201165 में 29 सितंबर को सुबह 9:15 बजे से रात 11:40 बजे तक माल लोड होने का उल्लेख मिला। आरोप है कि शिकायतकर्ता लगातार फोन कर माल लोड होने की जानकारी देता रहा, इसके बावजूद कार्रवाई नहीं की गई और माल रवाना हो गया।

रेलवे रिकॉर्ड में 2 लाख, जांच में कीमत निकली 42 लाख

विजिलेंस जांच में सबसे बड़ा अंतर माल की कीमत को लेकर सामने आया। रेलवे के आरआर और फारवर्डिंग नोट में एक वीपी में भेजे गए माल की कीमत महज दो लाख रुपये दर्शाई गई थी। वाणिज्यकर विभाग की रिपोर्ट में उसी वीपी में करीब 300 बॉक्स जूते और 100 बोरी आयरन चेन भेजे जाने की बात सामने आई। 300 बॉक्स में करीब 12 हजार जोड़ी जूते और 100 बोरियों में लगभग छह हजार किलोग्राम आयरन चेन होने का आकलन किया गया। विभागीय दरों के आधार पर जूतों की कीमत करीब 30 लाख और आयरन चेन की कीमत लगभग 12 लाख रुपये आंकी गई। इस तरह माल की कुल कीमत करीब 42 लाख रुपये निकली। विजिलेंस का आरोप है कि दस्तावेजों में वास्तविक कीमत काफी कम दिखाकर टैक्स चोरी की गई।

रिटर्न में 4.77 लाख का भाड़ा, रेलवे रिकॉर्ड में 1.52 करोड़

जांच में ट्रांसपोर्टर के जीएसटी रिटर्न और रेलवे रिकॉर्ड के बीच भी बड़ा अंतर सामने आने का दावा किया गया है। तहरीर के मुताबिक, वर्ष 2022-23 में असलम कुरैशी ने आईटीआर-3बी में कुल 4,77,620 रुपये का भाड़ा दर्शाया था। इसके उलट रेलवे रिकॉर्ड में वीपी से भेजे माल का भाड़ा करीब 33.99 लाख रुपये और अवध एक्सप्रेस के एसएलआर से भेजे माल का भाड़ा करीब 1.18 करोड़ रुपये दर्ज मिला। दोनों को मिलाकर रेलवे को दिए गए भाड़े की रकम लगभग 1.52 करोड़ रुपये बताई गई है। विजिलेंस जांच के मुताबिक, घोषित भाड़े और रेलवे रिकॉर्ड की रकम में करीब 1.47 करोड़ रुपये का अंतर सामने आया।

बिल्टी-बिल नहीं काटने और फर्जी दस्तावेजों का आरोप

विजिलेंस की तहरीर में ट्रांसपोर्टर पर माल भेजते समय बिल्टी और बिल जारी नहीं करने का भी आरोप लगाया गया है। आरोप है कि वास्तविक कीमत अधिक होने के बावजूद रेलवे रिकॉर्ड में प्रति वीपी महज दो लाख रुपये का माल दर्शाया जाता था। जांच एजेंसी ने ट्रांसपोर्टर और वाणिज्यकर अधिकारियों की कथित मिलीभगत से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दूसरे राज्यों में माल भेजकर टैक्स चोरी किए जाने का आरोप लगाया है।

स्कैनर मशीन का मामला भी जांच में आया

आगरा फोर्ट रेलवे स्टेशन पर पार्सल स्कैनिंग के लिए लगाई गई स्कैनर मशीन का मामला भी विजिलेंस जांच में सामने आया। आरोप है कि पार्सल स्कैन किए बिना गलत आंकड़े दिखाकर रेलवे से भुगतान लिया गया। तहरीर के मुताबिक, शिकायत के बाद रेलवे की गोपनीय जांच हुई और बाद में संबंधित अनुबंध निरस्त कर दिया गया। जनवरी 2025 में स्कैनर मशीन स्टेशन से हटवा दी गई और जमानत राशि भी जब्त कर ली गई।

शासन के आदेश पर खुली जांच, अब दर्ज हुआ मुकदमा

मामला सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश शासन के सतर्कता अनुभाग-3 ने दो जनवरी 2023 को खुली जांच के आदेश दिए थे। आगरा सेक्टर की विजिलेंस टीम ने जांच पूरी कर रिपोर्ट शासन को भेजी। इसके बाद शासन की अनुमति पर मुकदमा दर्ज कराया गया। एसपी विजिलेंस आलोक शर्मा के मुताबिक, शासन के छह अप्रैल 2026 के पत्र के क्रम में तत्कालीन सहायक आयुक्त संदीप कुमार सिंह, वाणिज्यकर अधिकारी देवेश पांडेय, सतीश चंद्र और ट्रांसपोर्टर असलम कुरैशी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। अधिकारियों पर आईपीसी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं में कार्रवाई की गई है, जबकि ट्रांसपोर्टर के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई प्रस्तावित है। विजिलेंस अब आरोपियों की संपत्तियों की भी जांच करेगी।

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