bareillyप्रेसवार्ता में जानकारी देते कांग्रेसी नेता

बरेली। कांग्रेस पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता डॉ केबी त्रिपाठी ने नीट परीक्षा में बार-बार सामने आ रही गड़बड़ियों और पेपर लीक की घटनाओं को देश के युवाओं के भविष्य के साथ बड़ा धोखा बताया है। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तत्काल इस्तीफा देने की मांग की है। वर्ष 2015 से लेकर 2026 तक कई बार नीट और अन्य राष्ट्रीय परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक हो चुके हैं, लेकिन सरकार प्रभावी कदम उठाने में विफल रही है।

मंगलवार को प्रेसवार्ता के दौरान प्रदेश प्रवक्ता डॉ के बी त्रिपाठी ने कहा कि 3 मई 2026 को आयोजित नीट परीक्षा में 22 लाख से अधिक छात्र शामिल हुए थे। परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लीक होने की खबरें सोशल मीडिया पर वायरल हुईं, जिसके बाद केंद्र सरकार को दबाव में परीक्षा रद्द करनी पड़ी और दोबारा परीक्षा कराने का निर्णय लेना पड़ा। पार्टी ने इसे परीक्षा प्रणाली की सबसे बड़ी विफलताओं में से एक बताया।

भर्ती परीक्षाएं भी लीक माफिया की गिरफ्त में

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि नीट के अलावा सीबीएसई मूल्यांकन, लेखपाल भर्ती, यूपी पुलिस भर्ती, यूपीएसआई, आरओ-एआरओ, एसएससी जीडी और सहायक प्रोफेसर भर्ती जैसी कई महत्वपूर्ण परीक्षाएं भी पेपर लीक और अनियमितताओं की भेंट चढ़ चुकी हैं। इससे करोड़ों युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है। नीट पेपर लीक और उससे पैदा हुए मानसिक तनाव के कारण देश के विभिन्न राज्यों में अब तक 12 छात्रों ने अपनी जान गंवाई है। कांग्रेस ने इन घटनाओं को अत्यंत दुखद बताते हुए कहा कि यह केवल व्यक्तिगत त्रासदी नहीं बल्कि परीक्षा व्यवस्था की विफलता का परिणाम है।

25 हजार से 40 लाख रुपये तक में बिके प्रश्नपत्र

डॉ केबी त्रिपाठी ने आरोप लगाया कि प्रश्नपत्र छपने के बाद बिचौलियों के माध्यम से बड़े पैमाने पर बेचे जाते हैं। जांच में कुछ छात्रों ने कथित तौर पर बताया कि लीक पेपर प्राप्त करने के लिए 25 हजार रुपये से लेकर 40 लाख रुपये तक की रकम चुकाई गई। पार्टी ने इसे संगठित भ्रष्टाचार का उदाहरण बताया। पिछले 12 वर्षों में 23 राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक हुए हैं। देशभर में 90 से अधिक पेपर लीक की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, लेकिन दोषियों को सजा मिलने के मामले बेहद कम हैं। इससे छात्रों और अभिभावकों का भरोसा लगातार कमजोर हुआ है।

राहुल गांधी ने शुरू किया छात्रों की गूंज अभियान

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों की समस्याओं को समझने के लिए छात्रों की गूंज अभियान शुरू किया है। इसकी शुरुआत राजस्थान के कोटा से हुई है, जहां उन्होंने छात्रों से सीधा संवाद कर सुझाव मांगे और शिक्षा प्रणाली में व्यापक बदलाव की जरूरत बताई। कांग्रेस ने दावा किया कि नीट, जेईई, एसएससी, यूपीएससी और आरआरबी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में परिवारों का भारी आर्थिक खर्च हो रहा है। पार्टी के अनुसार लाखों परिवार अपनी आय का बड़ा हिस्सा बच्चों की पढ़ाई और कोचिंग पर खर्च करने को मजबूर हैं।

मौजूदा शिक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल

राहुल गांधी ने कहा कि वर्तमान शिक्षा व्यवस्था लाखों छात्रों को अवसर देने के बजाय बड़ी संख्या में युवाओं को बाहर कर देती है। उन्होंने आरोप लगाया कि रोजगार के अवसर सीमित हैं और शिक्षा प्रणाली युवाओं को निराशा की ओर धकेल रही है। कांग्रेस ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। पार्टी का कहना है कि 2024 और 2026 में नीट परीक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए, लेकिन सरकार ने जवाबदेही तय करने के बजाय मामले को दबाने का प्रयास किया।

निजीकरण और शिक्षा बजट में कटौती का आरोप

आरोप लगाया कि शिक्षा के निजीकरण और बजट में कमी के कारण सरकारी स्कूलों और कॉलेजों की स्थिति लगातार कमजोर हुई है। पार्टी के अनुसार आम परिवारों को महंगे निजी शिक्षण संस्थानों की ओर धकेला जा रहा है, जिससे शिक्षा गरीब और मध्यम वर्ग की पहुंच से दूर होती जा रही है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि छात्रों की गूंज अभियान के माध्यम से राहुल गांधी देशभर के छात्रों की आवाज को संसद और सरकार तक पहुंचाएंगे। पार्टी निष्पक्ष, पारदर्शी और सस्ती शिक्षा व्यवस्था की मांग को लेकर देशव्यापी आंदोलन चलाएगी। इस दौरान महानगर अध्यक्ष दिनेश दद्दा, मास्टर छोटे लाल समेत अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *