बरेली। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी ने मुस्लिम युवाओं को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन से दूर रहने की नसीहत देते हुए बड़ा बयान जारी किया है। उन्होंने कहा कि किसी भी आंदोलन या धरने के दौरान यदि कोई विवाद या अप्रिय घटना होती है तो उसका ठीकरा सबसे पहले मुस्लिम युवाओं के सिर पर फोड़ा जाता है। ऐसे में उन्हें पूरी सतर्कता बरतनी चाहिए और किसी भी तरह की भीड़ या प्रदर्शन का हिस्सा बनने से बचना चाहिए।

मौलाना रिजवी ने कहा कि भारत में मुसलमान एक अल्पसंख्यक और अपेक्षाकृत कमजोर समुदाय हैं। ऐसे में किसी भी प्रकार की कानून-व्यवस्था संबंधी घटना होने पर सबसे पहले उनकी भूमिका पर सवाल उठाए जाते हैं। उन्होंने फारसी कहावत का हवाला देते हुए कहा कि नज़ला हमेशा कमजोर हिस्से पर ही गिरता है, इसलिए मुस्लिम युवाओं को भावनाओं में बहकर किसी आंदोलन में शामिल नहीं होना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले मुस्लिम युवाओं से अपील की कि वे जंतर-मंतर पर होने वाले धरना-प्रदर्शन से पूरी तरह दूरी बनाए रखें। इतना ही नहीं, कार्यक्रम के दौरान उस इलाके की ओर जाने से भी बचें, ताकि किसी भी अनचाही स्थिति में उनका नाम न आए और वे किसी विवाद में न फंसें।

पुराने आंदोलनों का दिया हवाला

मौलाना रिजवी ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में देश ने कई बड़े आंदोलन और धरने देखे हैं। एनआरसी विरोध प्रदर्शन, वक्फ संशोधन विधेयक के खिलाफ आंदोलन और किसान आंदोलन जैसे मामलों का परिणाम सभी के सामने है। इन घटनाओं से सबक लेते हुए मुस्लिम समाज को अपने हितों और भविष्य को प्राथमिकता देनी चाहिए।

युवाओं से की संयम बरतने की अपील

उन्होंने कहा कि शिक्षा, रोजगार और सामाजिक तरक्की पर ध्यान देना आज की सबसे बड़ी जरूरत है। युवाओं को ऐसे किसी भी कार्यक्रम से दूरी रखनी चाहिए, जिससे उनका भविष्य प्रभावित हो या वे किसी कानूनी विवाद में उलझ जाएं। मौलाना ने कहा कि समझदारी और संयम ही समाज को आगे बढ़ाने का सबसे मजबूत रास्ता है।

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