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ब्यावर। राजस्थान की वीर धरती ने एक बार फिर देश की रक्षा के लिए अपना लाल खो दिया। ब्यावर जिले के लागेटखेड़ा गांव का 26 वर्षीय अग्निवीर युवराज सिंह चौहान जम्मू-कश्मीर के अखनूर सेक्टर में आतंकियों के साथ मुठभेड़ के दौरान शहीद हो गया। बुधवार को सेना मुख्यालय से आई एक फोन कॉल ने पूरे परिवार की दुनिया उजाड़ दी। जिस बेटे के चार महीने बाद घर लौटने का इंतजार था, अब वही तिरंगे में लिपटकर गांव पहुंचेगा। शहादत की खबर मिलते ही गांव में मातम पसर गया। हर आंख नम है, लेकिन हर सीना गर्व से भी चौड़ा है कि गांव का बेटा मातृभूमि पर कुर्बान हुआ है।

बस चार महीने बाद आऊंगा… आखिरी बार कहे थे ये शब्द

शहीद युवराज सिंह के पिता प्रताप सिंह ने रुंधे गले से बताया कि उनका बेटा 15 फरवरी 2026 को छुट्टी लेकर घर आया था। पूरे एक महीने तक परिवार के साथ समय बिताने के बाद 19 मार्च को वह वापस ड्यूटी पर लौट गया था। घर से निकलते वक्त उसने मुस्कुराते हुए कहा था, “बस चार महीने की नौकरी और बची है, फिर हमेशा के लिए घर आ जाऊंगा।” परिवार को क्या पता था कि यह बेटे की आखिरी विदाई होगी। 5 मई की रात ड्यूटी पर जाने से पहले युवराज ने फोन कर मां-पिता, भाई और बहन से लंबी बातचीत की थी। उसने घर का हालचाल पूछा और जल्द मिलने का भरोसा दिया। अगले दिन सुबह जब परिजनों ने कॉल किया तो मोबाइल बंद मिला। कुछ देर बाद सेना मुख्यालय से आई सूचना ने पूरे परिवार को तोड़ दिया।

अखनूर सेक्टर में आतंकियों से लोहा लेते हुए दी जान

सेना सूत्रों के मुताबिक युवराज सिंह की तैनाती जम्मू-कश्मीर के संवेदनशील अखनूर सेक्टर में थी। सीमा पार से घुसपैठ की कोशिश कर रहे आतंकियों के साथ मुठभेड़ के दौरान युवराज ने बहादुरी से मोर्चा संभाला। इसी दौरान वह गंभीर रूप से घायल हो गए और मातृभूमि की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हो गए। युवराज की शहादत की खबर फैलते ही गांव में सन्नाटा छा गया। लोग शहीद के घर की ओर दौड़ पड़े। महिलाओं की आंखों से आंसू नहीं रुक रहे थे, जबकि युवाओं में गुस्सा और गर्व दोनों दिखाई दिया। गांव के लोग “भारत माता की जय” और “युवराज सिंह अमर रहे” के नारे लगा रहे हैं।

बचपन से था सेना में जाने का सपना

परिजनों ने बताया कि युवराज सिंह बचपन से ही फौजी बनना चाहते थे। गांव में जब भी सेना की भर्ती या परेड की चर्चा होती थी, युवराज सबसे ज्यादा उत्साहित नजर आते थे। उन्होंने कठिन मेहनत और संघर्ष के बाद 17 फरवरी 2022 को अग्निवीर योजना के तहत भारतीय सेना जॉइन की थी। सेना में भर्ती होने के बाद युवराज ने जबलपुर, गोवा और पठानकोट जैसे कई अहम सैन्य ठिकानों पर सेवा दी। साथी जवानों के बीच वह अनुशासन, बहादुरी और शांत स्वभाव के लिए पहचाने जाते थे। परिवार को उम्मीद थी कि चार महीने बाद सेवा पूरी कर युवराज घर लौटेंगे और फिर नई जिंदगी शुरू करेंगे, लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर था।

मां की आंखों से नहीं थम रहे आंसू

शहीद की मां बेटे की तस्वीर सीने से लगाकर बार-बार बेसुध हो रही हैं। वह सिर्फ एक ही बात दोहरा रही हैं, “मेरा बेटा कहकर गया था जल्दी लौटूंगा…” घर का माहौल पूरी तरह गम में डूबा हुआ है। छोटी बहन और भाई का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि युवराज ने पूरे इलाके का नाम रोशन कर दिया। लोग शहीद के परिवार को ढांढस बंधाने पहुंच रहे हैं। प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधि भी गांव पहुंचकर परिवार को सांत्वना दे रहे हैं।

पूरे राजकीय सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार

प्रशासन ने शहीद के अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू कर दी हैं। युवराज सिंह का पार्थिव शरीर शुक्रवार को उनके पैतृक गांव लाए जाने की संभावना है। सेना के जवानों की मौजूदगी में पूरे राजकीय और सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। गांव के लोग अपने वीर बेटे को अंतिम विदाई देने के लिए तैयारियां कर रहे हैं। जगह-जगह तिरंगे लगाए जा रहे हैं। युवाओं में भारी भावुकता है। हर कोई यही कह रहा है कि युवराज भले आज इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनका बलिदान हमेशा देशवासियों के दिलों में जिंदा रहेगा।

राजस्थान का लाल, देश का अभिमान

युवराज सिंह की शहादत ने एक बार फिर साबित कर दिया कि राजस्थान की मिट्टी में आज भी वीरता बहती है। देश की रक्षा के लिए यहां के बेटे हंसते-हंसते अपनी जान न्यौछावर कर देते हैं। युवराज सिंह अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनका नाम हमेशा भारत माता के वीर सपूतों में लिया जाएगा। उनकी शहादत पर पूरा देश नमन कर रहा है। गांव का हर बच्चा आज युवराज जैसा बनने का सपना देख रहा है। यह बलिदान सिर्फ एक परिवार का नहीं, बल्कि पूरे देश का गर्व बन गया है।

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