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काठमांडू। दक्षिण एशिया की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। China ने Nepal की नई Balen Shah सरकार को तिब्बत और ताइवान के मुद्दे पर सख्त चेतावनी देकर कूटनीतिक दबाव बढ़ा दिया है। चीन के राजदूत Zhang Maoming ने सीधे नेपाल के गृह मंत्री Sudan Gurung से मुलाकात कर साफ संकेत दिया कि काठमांडू किसी भी “बीजिंग विरोधी गतिविधियों” का मंच न बने।

बैठक में चीन का अल्टीमेटम

काठमांडू में हुई इस अहम बैठक में चीनी राजदूत ने नेपाल सरकार के सामने कई मुद्दे उठाए। खास तौर पर तिब्बती शरणार्थियों की गतिविधियों और ताइवान से जुड़े कार्यक्रमों को लेकर चीन ने गहरी चिंता जताई। सूत्रों के मुताबिक, चीन ने नेपाल को साफ कहा कि उसकी जमीन का इस्तेमाल तिब्बत से जुड़े “अलगाववादी” या चीन विरोधी एजेंडे के लिए नहीं होना चाहिए।

ताइवान के झंडे पर भड़का चीन

हाल ही में काठमांडू में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान कुछ समय के लिए ताइवान का झंडा फहराया गया था। इस घटना को लेकर चीन खासा नाराज है। Taiwan को लेकर चीन बेहद संवेदनशील है और उसे अपना हिस्सा मानता है। ऐसे में नेपाल में ताइवानी झंडा दिखना चीन के लिए सीधी चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है।

तिब्बती गतिविधियों पर सख्त रुख

चीन ने नेपाल में तिब्बती शरणार्थियों की बढ़ती गतिविधियों को लेकर भी चिंता जताई है। Tibet से जुड़े धार्मिक और राजनीतिक कार्यक्रमों पर चीन लगातार नजर बनाए हुए है। चीनी राजदूत ने खास तौर पर तिब्बती नेता Penpa Tsering के शपथ ग्रहण समारोह में नेपाल की संभावित भागीदारी पर आपत्ति जताई और इसे लेकर सख्त चेतावनी दी।

नेपाल का जवाब: ‘एक-चीन नीति’ पर कायम

चीन के दबाव के बीच नेपाल सरकार ने अपना रुख साफ किया है। गृह मंत्री सुदान गुरुंग ने बैठक में दो टूक कहा कि नेपाल “एक-चीन नीति” के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। नेपाल ने आश्वासन दिया कि उसकी जमीन का इस्तेमाल चीन विरोधी गतिविधियों के लिए नहीं होने दिया जाएगा और वह पहले की तरह संतुलित कूटनीति बनाए रखेगा।

पुराने विवाद भी बने कारण

यह पहला मौका नहीं है जब चीन ने नेपाल को इस तरह की चेतावनी दी हो। इससे पहले भी काठमांडू में बौद्ध गुरु जोनांग ग्यालत्साब रिनपोछे समेत कई धार्मिक नेताओं के दौरों पर चीन ने आपत्ति जताई थी। नेपाल की पूर्व सरकार ने एक समय ऐसे कार्यक्रमों को सीमित करने की कोशिश भी की थी, जिससे यह मुद्दा लंबे समय से संवेदनशील बना हुआ है।

क्या है चीन की असली चिंता?

विशेषज्ञों का मानना है कि चीन को नेपाल में बदलते राजनीतिक समीकरणों से चिंता है।

  • नेपाल में नई सरकार का गठन
  • पश्चिमी देशों के साथ बढ़ती नजदीकियां
  • तिब्बती और ताइवानी गतिविधियों में बढ़ोतरी

इन सभी कारणों को चीन अपने लिए खतरे के तौर पर देख रहा है।

 भारत और क्षेत्रीय राजनीति पर असर

नेपाल-चीन के इस तनाव का असर पूरे दक्षिण एशिया की राजनीति पर पड़ सकता है। भारत भी इस घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है, क्योंकि नेपाल उसकी रणनीतिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बेहद अहम पड़ोसी देश है। अगर नेपाल पर चीन का दबाव बढ़ता है, तो यह क्षेत्रीय संतुलन को प्रभावित कर सकता है।

कूटनीतिक संतुलन की बड़ी परीक्षा

नेपाल के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती संतुलन बनाए रखने की है। एक तरफ चीन जैसा शक्तिशाली पड़ोसी है, तो दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ रिश्ते भी अहम हैं। नई सरकार को यह तय करना होगा कि वह किस तरह अपने राष्ट्रीय हितों को सुरक्षित रखते हुए दोनों पक्षों के बीच संतुलन बनाए रखे।

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