Social Sharing icon

गाजियाबाद में शिक्षा व्यवस्था की हकीकत उस वक्त सामने आ गई जब निपुण असेसमेंट टेस्ट के नतीजों ने पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया। 365 में से सिर्फ 65 स्कूल पास—ये आंकड़ा सिर्फ एक रिपोर्ट नहीं, बल्कि बुनियादी शिक्षा की गिरती नींव का अलार्म है। AI आधारित टेस्टिंग ने वो सच्चाई दिखा दी, जिसे अब तक आंकड़ों में छिपाया जाता रहा।

निपुण टेस्ट में बड़ा झटका: 365 में से सिर्फ 65 स्कूल पास

गाजियाबाद जिले में आयोजित निपुण असेसमेंट टेस्ट ने शिक्षा व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है। कुल 365 परिषदीय विद्यालयों में से केवल 65 स्कूल ही निर्धारित मानकों पर खरे उतर सके। यह स्थिति इसलिए और चिंताजनक है क्योंकि पिछले शैक्षणिक सत्र 2024-25 में 223 विद्यालय सफल हुए थे। इस बार का परिणाम सीधे तौर पर बताता है कि शिक्षा के स्तर में गिरावट आई है। यह गिरावट सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संकेत देती है कि बच्चों की बुनियादी शिक्षा—जो भविष्य की नींव होती है—वह कमजोर हो रही है।

बुनियादी शिक्षा की जांच: भाषा और गणित में बच्चों की पकड़ कमजोर

निपुण असेसमेंट टेस्ट का मुख्य उद्देश्य कक्षा 1 और 2 के बच्चों की बुनियादी समझ का आकलन करना था। इसमें बच्चों की भाषा और गणितीय दक्षता को परखा गया, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे अपनी कक्षा के स्तर के अनुरूप सीख पा रहे हैं या नहीं। लेकिन परिणामों ने साफ कर दिया कि बड़ी संख्या में बच्चे न तो पढ़ने में सक्षम हैं और न ही गणित की मूलभूत अवधारणाओं को समझ पा रहे हैं। यह स्थिति भविष्य के लिए गंभीर संकेत देती है, क्योंकि शुरुआती शिक्षा ही आगे की पढ़ाई का आधार होती है।

AI और ‘परख’ ऐप ने खोली असली तस्वीर

इस बार पहली बार निपुण टेस्ट में एआई आधारित तकनीक, ‘परख’ ऐप और ओएमआर शीट का उपयोग किया गया। इस तकनीक ने मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाया। हालांकि, इसी पारदर्शिता ने शिक्षा व्यवस्था की असल स्थिति भी उजागर कर दी। पहले जहां आंकड़ों में सुधार दिखता था, अब तकनीक ने यह साबित कर दिया कि जमीनी स्तर पर पढ़ाई की गुणवत्ता उतनी मजबूत नहीं है जितनी रिपोर्ट्स में दिखाई जाती थी।

तकनीकी खामियां और शिक्षकों की व्यस्तता बनी बड़ी वजह

खराब परिणामों के पीछे शिक्षकों ने कई कारण गिनाए हैं। उनका कहना है कि टेस्ट की प्रक्रिया पूरी तरह सुचारु नहीं रही। कई स्कूलों में तकनीकी समस्याओं के कारण डेटा अपलोड नहीं हो सका, जिससे परिणाम प्रभावित हुआ। इसके अलावा शिक्षकों की एसआईआर ड्यूटी और अन्य सरकारी कार्यों में व्यस्तता भी एक बड़ी वजह रही। जब शिक्षक ही पूरी तरह शिक्षण पर ध्यान नहीं दे पाए, तो इसका असर सीधे छात्रों के प्रदर्शन पर पड़ा।

नगर क्षेत्र सबसे फिसड्डी, ग्रामीण क्षेत्रों में भी हाल खराब

जिले के अलग-अलग ब्लॉकों का प्रदर्शन भी बेहद निराशाजनक रहा। नगर क्षेत्र सबसे कमजोर साबित हुआ, जहां 92 में से सिर्फ 13 स्कूल ही पास हो सके। भोजपुर में 73 में से 8, मुरादनगर में 69 में से 10, लोनी में 76 में से 19 और रजापुर में 55 में से 15 विद्यालय ही निपुण का दर्जा हासिल कर पाए। ये आंकड़े बताते हैं कि समस्या किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे जिले में शिक्षा व्यवस्था संघर्ष कर रही है। खासतौर पर शहरी क्षेत्रों का कमजोर प्रदर्शन चौंकाने वाला है।

निपुण भारत मिशन पर उठे सवाल, क्या लक्ष्य हो पाएंगे पूरे?

निपुण असेसमेंट टेस्ट, निपुण भारत मिशन के तहत आयोजित किया जाता है, जिसका उद्देश्य बच्चों में बुनियादी साक्षरता और गणितीय ज्ञान को मजबूत करना है। किसी भी स्कूल को निपुण घोषित करने के लिए कम से कम 50% बच्चों का मानकों पर खरा उतरना जरूरी है। सफल विद्यालयों को 50 हजार रुपये की अतिरिक्त सहायता भी दी जाती है, ताकि वे और बेहतर प्रदर्शन कर सकें। लेकिन मौजूदा नतीजे इस मिशन की सफलता पर सवाल खड़े कर रहे हैं। यदि इतनी बड़ी संख्या में स्कूल फेल हो रहे हैं, तो यह संकेत है कि जमीनी स्तर पर सुधार की जरूरत है। इसी बीच जिले में यूपी बोर्ड परीक्षाओं की कॉपियों का मूल्यांकन भी जारी है, जहां एक दिन में 28 हजार से अधिक उत्तर पुस्तिकाओं की जांच की गई। इससे यह साफ है कि शिक्षा विभाग पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *