गाजियाबाद में रजिस्ट्री सिस्टम से जुड़ा एक ऐसा घोटाला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक तंत्र और टैक्स व्यवस्था दोनों को हिला कर रख दिया है। डुप्लिकेट और फर्जी PAN नंबरों के जरिए करीब 3700 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेन-देन का खुलासा हुआ है। आयकर विभाग की गोपनीय जांच में सामने आया यह मामला सिर्फ एक जिले तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में फैले बड़े नेटवर्क की ओर इशारा कर रहा है। सवाल उठ रहा है—क्या रजिस्ट्री सिस्टम लंबे समय से काले धन के खेल का अड्डा बन चुका था?
गाजियाबाद में ‘रजिस्ट्री घोटाले’ का विस्फोट
गाजियाबाद के उप-रजिस्ट्रार कार्यालय में सामने आया 3700 करोड़ रुपये का संदिग्ध लेन-देन अब एक बड़े घोटाले का रूप लेता जा रहा है। आयकर विभाग की टीमों ने गोपनीय तरीके से किए गए सर्वे में यह चौंकाने वाला खुलासा किया है। शुरुआती जांच में ही यह साफ हो गया कि संपत्तियों की खरीद-फरोख्त के दौरान भारी पैमाने पर गड़बड़ियां की गईं। इस मामले ने न सिर्फ स्थानीय प्रशासन बल्कि पूरे प्रदेश की रजिस्ट्री प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
डुप्लिकेट PAN का खेल… कैसे हुआ अरबों का फर्जीवाड़ा
जांच में सामने आया कि रजिस्ट्री के दौरान बड़ी संख्या में डुप्लिकेट और फर्जी PAN नंबरों का इस्तेमाल किया गया। कई मामलों में एक ही PAN कार्ड का उपयोग अलग-अलग लोगों की प्रॉपर्टी रजिस्ट्री में किया गया, जबकि कई दस्तावेजों में PAN नंबर गलत दर्ज पाए गए। यह तरीका टैक्स चोरी और काले धन को सफेद करने का आसान जरिया बन गया। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह सुनियोजित तरीके से किया गया फर्जीवाड़ा है, जिसमें सिस्टम की खामियों का पूरा फायदा उठाया गया।
आयकर विभाग की गोपनीय कार्रवाई और बड़े सबूत
इस पूरे मामले की जांच कानपुर निदेशालय की निगरानी में की गई। संयुक्त निदेशक विजय सिंह के नेतृत्व में आयकर विभाग की टीम ने उप-रजिस्ट्रार प्रथम (सरो-1) कार्यालय में छापा मारा। गाजियाबाद के आयकर अधिकारी सुधीर कुमार और उनकी टीम ने मौके पर मौजूद दस्तावेजों और डिजिटल डेटा को खंगाला। टीम ने रजिस्ट्री के मूल दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और एसएफटी (Statement of Financial Transaction) रिपोर्ट को अपने कब्जे में लिया है। इन दस्तावेजों के आधार पर अब यह पता लगाया जा रहा है कि इस घोटाले में किन-किन लोगों की भूमिका है।
बिल्डर-भू-माफिया पर शक, नेटवर्क बड़ा होने के संकेत
सूत्रों के अनुसार, इस घोटाले में बड़े बिल्डरों और भू-माफियाओं की भूमिका होने की आशंका जताई जा रही है। फर्जी PAN नंबरों के जरिए संपत्तियों की खरीद-फरोख्त कर टैक्स से बचने की कोशिश की गई। यह भी आशंका है कि यह नेटवर्क सिर्फ गाजियाबाद तक सीमित नहीं है, बल्कि नोएडा, कानपुर और अन्य जिलों में भी फैला हो सकता है। जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुट गई हैं, जिससे आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
पूरे प्रदेश में हड़कंप… अन्य रजिस्ट्री कार्यालय भी रडार पर
गाजियाबाद में हुए इस खुलासे के बाद प्रदेश के अन्य जिलों के रजिस्ट्री कार्यालय भी जांच के घेरे में आ गए हैं। बताया जा रहा है कि पहले भी डेटा सुधारने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन लापरवाही जारी रही। अब आयकर विभाग और अन्य एजेंसियां राज्यभर के रजिस्ट्री रिकॉर्ड्स की गहन जांच करने की तैयारी में हैं। इससे साफ है कि आने वाले दिनों में कई और जिलों से ऐसे मामलों का खुलासा हो सकता है।
स्टाम्प विभाग का खंडन, लेकिन सवाल बरकरार
जहां एक तरफ आयकर विभाग की जांच में बड़ा घोटाला सामने आया है, वहीं स्टाम्प विभाग ने इन आरोपों को खारिज किया है। एआईजी स्टाम्प पुष्पेंद्र कुमार का कहना है कि 30 लाख से अधिक की रजिस्ट्री पर एनएसडीएल पोर्टल के जरिए जानकारी साझा की जाती है और ओटीपी आधारित सत्यापन की प्रक्रिया अपनाई जाती है। हालांकि, इतने बड़े स्तर पर सामने आए फर्जीवाड़े के बाद यह सवाल उठ रहा है कि अगर सिस्टम इतना सुरक्षित है, तो फिर इतनी बड़ी गड़बड़ी कैसे हो गई? जवाब की तलाश अब जांच एजेंसियों के पास है।