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कोलकाता। पश्चिम बंगाल की सियासत में इस बार एक ऐसा चेहरा सुर्खियों में है, जो न बड़े घराने से आता है और न ही राजनीतिक विरासत रखता है। दूसरों के घरों में बर्तन धोकर गुजारा करने वाली कलिता माझी को बीजेपी ने फिर से चुनावी मैदान में उतार दिया है और अब यह नाम पूरे देश में चर्चा का केंद्र बन गया है।

झोपड़ी से राजनीति तक… ‘कलिता’ की कहानी ने सबको चौंकाया

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के ऐलान के साथ ही सियासी हलचल तेज हो गई है, लेकिन इस बार चर्चा किसी बड़े नेता की नहीं, बल्कि एक आम महिला की है। पूर्वी वर्धमान जिले की आउसग्राम सीट से भारतीय जनता पार्टी ने कलिता माझी को उम्मीदवार बनाया है। कलिता कोई बड़ी राजनीतिक हस्ती नहीं हैं, बल्कि वह दूसरों के घरों में बर्तन धोने का काम करके अपनी रोजी-रोटी चलाती हैं। उनकी यह सादगी और संघर्ष ही उन्हें बाकी उम्मीदवारों से अलग बनाती है। जैसे ही उनका नाम प्रत्याशियों की सूची में सामने आया, वैसे ही यह खबर पूरे राज्य में चर्चा का विषय बन गई।

3000 की कमाई, बड़े सपने… संघर्ष भरी जिंदगी का सच

कलिता माझी की जिंदगी गरीबी और संघर्ष की मिसाल है। वह महीने में मुश्किल से 3000 से 4000 रुपये ही कमा पाती हैं। उनके पति सुब्रतो माझी प्लंबर का काम करते हैं और परिवार का गुजारा बड़ी मुश्किल से चलता है। आर्थिक तंगी के कारण कलिता ज्यादा पढ़ाई नहीं कर सकीं, लेकिन उन्होंने अपने जीवन की कठिनाइयों को कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। यही वजह है कि आज वह राजनीति के बड़े मंच पर खड़ी हैं। उनकी कहानी यह बताती है कि हालात चाहे जैसे भी हों, अगर हौसला मजबूत हो तो मंजिल हासिल की जा सकती है।

2021 से 2026 तक… BJP का भरोसा बरकरार

यह पहली बार नहीं है जब बीजेपी ने कलिता माझी पर भरोसा जताया है। 2021 के विधानसभा चुनाव में भी उन्हें पार्टी ने टिकट दिया था। उस समय भी उनका नाम चर्चा में आया था, लेकिन वह चुनाव जीत नहीं सकीं। हार के बाद वह फिर से अपने पुराने काम—घरों में बर्तन धोने—में लग गईं। इस बार भी उन्हें उम्मीद नहीं थी कि पार्टी उन्हें दोबारा मौका देगी, लेकिन बीजेपी ने एक बार फिर उन पर भरोसा जताकर बड़ा संदेश दिया है। यह निर्णय इस बात को भी दर्शाता है कि पार्टी जमीनी कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है।

गरीबों के मुद्दे ही एजेंडा… ‘मैं जमीनी सच्चाई जानती हूं’

कलिता माझी का कहना है कि वह खुद गरीबी में जी रही हैं, इसलिए उन्हें आम लोगों की समस्याओं का सही अंदाजा है। उनका चुनावी एजेंडा भी इसी से जुड़ा है। वह अपने इलाके में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने, गरीबों के लिए अस्पताल बनवाने और रोजगार के अवसर बढ़ाने पर काम करना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि उनके क्षेत्र के लोगों को इलाज के लिए दूर बर्धमान जाना पड़ता है, जिसे वह बदलना चाहती हैं। इसके अलावा वह गरीब बच्चों की शिक्षा पर भी विशेष ध्यान देना चाहती हैं, ताकि कोई भी बच्चा पैसों की कमी के कारण पढ़ाई से वंचित न रहे।

PM मोदी की तारीफ… ‘उम्मीद और मिसाल’ बनीं कलिता माझी

कलिता माझी की कहानी सिर्फ बंगाल तक सीमित नहीं रही, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बना चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उनकी तारीफ कर चुके हैं। पीएम मोदी ने उन्हें राजनीति में एक मिसाल बताते हुए कहा था कि कलिता जैसी महिलाएं समाज के लिए उम्मीद की किरण हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कलिता का संघर्ष और सेवाभाव उन्हें खास बनाता है। यही वजह है कि अब उनकी उम्मीदवारी को बीजेपी के एक बड़े सामाजिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है—जहां आम आदमी भी राजनीति के बड़े मंच तक पहुंच सकता है।

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