नोएडा और ग्रेटर नोएडा में इन दिनों रसोई गैस की किल्लत ने आम लोगों की जिंदगी मुश्किल बना दी है। बाजार में छोटे सिलेंडरों की भारी कालाबाजारी हो रही है और रीफिलिंग के नाम पर 300 से 400 रुपये प्रति किलो तक वसूले जा रहे हैं। मजदूर, निम्न आय वर्ग के परिवार और छोटे दुकानदार सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें लग रही हैं और कई जगह हालात इतने बिगड़ गए कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को मोर्चा संभालना पड़ा।
गैस संकट से शहर में हाहाकार
उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहर नोएडा और ग्रेटर नोएडा में एलपीजी गैस की भारी किल्लत ने लोगों के सामने नई परेशानी खड़ी कर दी है। अचानक आपूर्ति बाधित होने से हजारों परिवारों की रसोई प्रभावित हो रही है। खासकर मजदूरों और निम्न आय वर्ग के लोगों के लिए यह संकट बेहद गंभीर बन गया है, क्योंकि उनके लिए गैस ही खाना पकाने का मुख्य साधन है। कई परिवारों को मजबूरी में लकड़ी या कोयले के सहारे खाना बनाने की स्थिति तक पहुंचना पड़ रहा है। शहर के अलग-अलग सेक्टरों में गैस की कमी की खबरें लगातार सामने आ रही हैं और लोग गैस एजेंसियों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।
कालाबाजारी ने बढ़ाई परेशानी
गैस की कमी के बीच बाजार में कालाबाजारी का खेल तेजी से शुरू हो गया है। खासकर छोटे 5 किलो वाले सिलेंडरों की भारी मांग के कारण बिचौलिए इसका फायदा उठा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले जहां 5 किलो सिलेंडर की रीफिलिंग 100 से 150 रुपये प्रति किलो के आसपास होती थी, वहीं अब यह कीमत बढ़कर 300 से 400 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। कई जगह दुकानदार खुलेआम अधिक कीमत मांग रहे हैं और उपभोक्ताओं के पास मजबूरी में महंगे दाम चुकाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। सेक्टर बीटा-1 में रहने वाले मजदूर बिहारी लाल ने बताया कि दुकानदार गैस की कमी का बहाना बनाकर मनमाने दाम वसूल रहे हैं, जिससे गरीब परिवारों की मुश्किलें कई गुना बढ़ गई हैं।
छोटे होटल और फूड स्टॉल पर संकट
कमर्शियल गैस सिलेंडरों की बुकिंग बंद होने से छोटे होटल, ढाबे और फास्ट फूड स्टॉल संचालकों के सामने भी बड़ा संकट खड़ा हो गया है। फुटपाथ पर चाय, नाश्ता और फास्ट फूड बेचने वाले दुकानदारों का कहना है कि गैस एजेंसियां कमर्शियल सिलेंडर उपलब्ध नहीं करा रही हैं। ऐसे में कई दुकानदार घरेलू सिलेंडर ब्लैक में खरीदकर काम चला रहे हैं, जिससे लागत कई गुना बढ़ गई है। व्यापारियों का कहना है कि यदि जल्द ही गैस की आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो हजारों छोटे होटल और फूड स्टॉल बंद होने की कगार पर पहुंच सकते हैं। इससे न केवल कारोबार प्रभावित होगा बल्कि हजारों लोगों की रोजी-रोटी भी संकट में पड़ सकती है।
गैस एजेंसियों पर लंबी कतारें
गैस संकट के चलते शहर की लगभग सभी गैस एजेंसियों के बाहर सुबह से ही उपभोक्ताओं की लंबी कतारें लगने लगी हैं। कई जगह लोग घंटों इंतजार करने के बाद भी खाली हाथ लौटने को मजबूर हैं। सेक्टर-54 की गैस एजेंसी के बाहर स्थिति सबसे ज्यादा तनावपूर्ण देखी गई, जहां सिलेंडर वितरण के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को तैनात करना पड़ा। इसी तरह सेक्टर-20 और सेक्टर-73 की एजेंसियों के बाहर भी भारी भीड़ जमा रही। कई स्थानों पर डिलीवरी वाहन पहुंचते ही लोग सिलेंडर लेने के लिए उसे घेर लेते हैं, जिससे अफरा-तफरी जैसी स्थिति बन जाती है।
प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों और व्यापारियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि गैस की कालाबाजारी पर तुरंत रोक लगाई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि एक तरफ शहर में गैस की भारी कमी है, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग इस संकट को मुनाफे के अवसर में बदल रहे हैं। सामाजिक संगठनों ने भी प्रशासन से मांग की है कि गैस एजेंसियों की जांच की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि सिलेंडर सही उपभोक्ताओं तक पहुंचे। यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
आपूर्ति सामान्य करने की कोशिशें
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार गैस आपूर्ति में आई रुकावट को दूर करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि संबंधित कंपनियों के साथ लगातार संपर्क में रहकर आपूर्ति को सामान्य करने की कोशिश की जा रही है। साथ ही कालाबाजारी पर नजर रखने के लिए विशेष टीमों को भी सक्रिय किया गया है। उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में गैस की उपलब्धता बेहतर होगी और बाजार में कीमतें भी नियंत्रण में आएंगी। हालांकि फिलहाल आम लोगों की चिंता यही है कि रसोई गैस जल्द उपलब्ध हो ताकि उनके घरों की रसोई फिर से सामान्य रूप से चल सके।