उत्तर भारत की सबसे महत्वाकांक्षी अवसंरचना परियोजनाओं में शामिल नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट अब लगभग तैयार हो चुका है। ग्रेटर नोएडा के जेवर में बन रहा यह एयरपोर्ट देश के सबसे बड़े एविएशन हब में बदलने की क्षमता रखता है। नवरात्र के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों इसके उद्घाटन की संभावना जताई जा रही है।
नवरात्र में उद्घाटन की संभावना, तैयारियों का काउंटडाउन
ग्रेटर नोएडा के जेवर में बन रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है। यह परियोजना उत्तर भारत के एविएशन नेटवर्क को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है। सूत्रों के अनुसार नवरात्र के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस एयरपोर्ट का उद्घाटन कर सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो यह देश की सबसे बड़ी हवाई परियोजनाओं में से एक का औपचारिक शुभारंभ होगा। एयरपोर्ट का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है और टर्मिनल, रनवे तथा अन्य बुनियादी ढांचे का काम तेजी से अंतिम रूप ले रहा है। सरकार की योजना है कि एयरपोर्ट के शुरू होने के बाद यह दिल्ली-एनसीआर और उत्तर भारत के लिए एक बड़े अंतरराष्ट्रीय हवाई केंद्र के रूप में विकसित होगा। हालांकि उद्घाटन से पहले सबसे बड़ी चुनौती एयरपोर्ट तक आसान और तेज कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना है।
कनेक्टिविटी अभी भी बड़ी चुनौती
हालांकि एयरपोर्ट का ढांचा तैयार है, लेकिन वहां तक पहुंचने वाले मार्ग अभी पूरी तरह विकसित नहीं हो पाए हैं। फिलहाल एयरपोर्ट तक पहुंचने का मुख्य रास्ता यमुना एक्सप्रेसवे ही है, जिससे अधिकांश यात्री और वाहन वहां पहुंचेंगे। लेकिन इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के लिए केवल एक प्रमुख मार्ग पर्याप्त नहीं माना जा रहा। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि एयरपोर्ट शुरू होने के बाद यातायात का दबाव बढ़ा तो यमुना एक्सप्रेसवे पर जाम जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं। इसी वजह से सरकार और यमुना प्राधिकरण कई वैकल्पिक मार्गों और एक्सप्रेसवे परियोजनाओं पर तेजी से काम कर रहे हैं। हालांकि इनमें से कई परियोजनाएं अभी निर्माणाधीन हैं, जिससे एयरपोर्ट के उद्घाटन से पहले कनेक्टिविटी पूरी तरह विकसित हो पाना मुश्किल दिख रहा है।
60 मीटर रोड से मिलेगी वैकल्पिक राह
एयरपोर्ट तक पहुंच आसान बनाने के लिए यमुना प्राधिकरण ने ग्रेटर नोएडा से जेवर तक 60 मीटर चौड़ी सड़क का निर्माण कराया है। करीब 26 किलोमीटर लंबी यह सड़क यमुना एक्सप्रेसवे के समानांतर बनाई जा रही है। इस सड़क का उद्देश्य यात्रियों को एक वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराना है ताकि उन्हें एक्सप्रेसवे पर निर्भर न रहना पड़े। इस मार्ग की खासियत यह भी होगी कि लोग बिना टोल दिए सीधे एयरपोर्ट तक पहुंच सकेंगे। हालांकि इस सड़क के कुछ हिस्सों में अभी निर्माण कार्य बाकी है। दनकौर, रबूपुरा और दयानतपुर के पास कुछ अवरोधों के कारण काम अधूरा है, जिसे जल्द पूरा करने की कोशिश की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि सड़क पूरी होने के बाद ग्रेटर नोएडा और आसपास के क्षेत्रों से एयरपोर्ट पहुंचना काफी आसान हो जाएगा।
ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा एयरपोर्ट
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को क्षेत्रीय और राष्ट्रीय हाईवे नेटवर्क से जोड़ने के लिए कई बड़ी परियोजनाएं चल रही हैं। इनमें सबसे अहम है ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से कनेक्टिविटी। इसके लिए जगनपुर-अफजलपुर के पास लगभग 60 हेक्टेयर जमीन पर एक विशाल इंटरचेंज बनाया जा रहा है। इस इंटरचेंज में 8 क्लोवर लीफ और 8 लूप तैयार किए जा रहे हैं, जिससे यातायात का प्रवाह सुचारु रहेगा। इस परियोजना के पूरा होने के बाद मथुरा, गाजियाबाद, बागपत और मेरठ से आने वाले वाहनों को 15 से 20 किलोमीटर कम दूरी तय करनी पड़ेगी। पहले इस परियोजना को 2027 तक पूरा करने की योजना थी, लेकिन अब इसे तेजी से पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है ताकि एयरपोर्ट के संचालन के साथ ही बेहतर कनेक्टिविटी मिल सके।
ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे से तेज होगी यात्रा
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे को नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से जोड़ने के लिए ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का निर्माण भी तेजी से किया जा रहा है। यह परियोजना लगभग 65 प्रतिशत पूरी हो चुकी है। इसके शुरू होने के बाद फरीदाबाद के सेक्टर-65 इंटरचेंज से यात्री केवल 20 मिनट में एयरपोर्ट पहुंच सकेंगे। इस एक्सप्रेसवे के माध्यम से दिल्ली, गुरुग्राम, गुजरात और मुंबई की दिशा में जाने वाले वाहनों को भी तेज और सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के अधिकारियों के अनुसार यह परियोजना 2027 तक पूरी होने की उम्मीद है। इसके पूरा होने के बाद जेवर एयरपोर्ट दिल्ली-एनसीआर और देश के अन्य हिस्सों से बेहतर तरीके से जुड़ जाएगा।
टैरिफ दरें तय करने की प्रक्रिया शुरू
एयरपोर्ट के संचालन से पहले यात्रियों से लिए जाने वाले शुल्क को भी अंतिम रूप दिया जा रहा है। भारतीय विमान पत्तन आर्थिक विनियामक प्राधिकरण (AERA) ने इसके लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है। 23 मार्च को दिल्ली में इस विषय पर हितधारकों की बैठक आयोजित की जाएगी। प्रस्तावित शुल्क के अनुसार यात्रियों से यूजर डेवलपमेंट फीस (UDF) ली जाएगी। प्रस्ताव में घरेलू उड़ानों के प्रस्थान पर लगभग 690 रुपये और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए 1380 रुपये शुल्क तय करने की बात कही गई है। वहीं आगमन पर घरेलू यात्रियों से 300 रुपये और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों से 595 रुपये तक शुल्क लिया जा सकता है। एयरपोर्ट शुरू होने के बाद यह उत्तर भारत के सबसे बड़े एविएशन हब के रूप में विकसित होने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।